Saturday , April 13 2024
ताज़ा खबर
होम / देश / छठ महापर्व का तीसरा दिन: 36 घंटे का निर्जला उपवास जारी, पहला अर्घ्य आज

छठ महापर्व का तीसरा दिन: 36 घंटे का निर्जला उपवास जारी, पहला अर्घ्य आज

पटना ।

महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान रविवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया। सोमवार को खरना पूजा संपन्‍न हो गया। अब आज सांयकालीन अर्घ्‍य दिया जाएगा।

खरना के साथ शुरू हो गया निर्जला उपवास
सोमवार को पर्व के दूसरे दिन सुबह में व्रती गंगा सहित विभिन्न नदियों व तालाबों में स्नान कर पवित्र पात्र में जल भरकर घर आए तथा प्रसाद बनाया। जो व्रती नदी किनारे या तालाब किनारे छठ करेंगी वे वहीं मिट्टी के चूल्हे में प्रसाद बनाने में जुटीं दिखीं। इसके बाद देर शाम खरना की पूजा के बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ हो गया। अब आज शाम में भगवान भास्‍कर को पहला अर्घ्‍य दिया जाएगा।सोमवार सुबह गंगा स्नान के लिए पटना के गंगा के विभिन्न घाटों पर लोगों की भीड़ जुटी। पटना के विभिन्न घाटों पर व्रती स्नान करने पहुंचे और गंगाजल भरा। व्रतियों ने दिनभर निर्जला व्रत रखकर शाम में खरना का प्रसाद भगवान को अर्पण कर खुद भी ग्रहण किया तथा सगे संबंधियों व मित्रों को भी प्रसाद खिलाया।

सायंकालीन अर्घ्‍य आज
अब मंगलवार को अस्ताचलगामी और बुधवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। मंगलवार को ही अर्घ्य के लिए ठेकुआ का प्रसाद तैयार किया जाएगा। फिर उसे कलसूप में फल-फूल और पूजन सामग्रियों के साथ सजाया जाएगा।

क्यों की जाती है सूर्य की पूजा
छठ पर्व पर एक तरफ छठी मइया का गीत गाया जाता है तो दूसरी ओर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह पूजा की जाती है। षष्ठी तिथि शुक्र की तिथि मानी जाती है और शुक्र की अधिष्ठात्री स्वयं मां जगदंबिका हैं। इस वजह से छठ माता कहा जाता है और उनके मंगल गीत गाकर उनकी पूजा की जाती है। चूंकि यह पर्व संतान की मंगल कामना से जुड़ा हुआ है, इस वजह से यह सूर्य से भी संबंधित हो जाता है।

सूर्य कालपुरुष के पंचम भाव के स्वामी हैं। पंचम भाव संतान, विद्या, बुद्धि आदि भावों का कारक माना जाता है। इस कारण इस दिन सूर्य की पूजा करके संतान की प्राप्ति व संतान से संबंधित याचनाओं की पूर्ति के लिए सूर्य की अाराधना की जाती है। इसमें समस्त ऋतु फल अर्पित किए जाते हैं और संकल्प के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)