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मोहन भागवत के ‘राम मंदिर राग’ पर नीतीश की पार्टी को ऐतराज, जानिये किसने क्या कहा…

नई दिल्ली: 
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने फिर से राम मंदिर राग (Ram Mandir) छेड़ा है. उनकी मांग है कि अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए सरकार कानून बनाए. जानकारों का कहना है कि चुनावों से पहले अक्सर संध परिवार को मंदिर याद आता है. जबकि जो क़ानूनी स्थिति है, उसमें सरकार के लिए राम मंदिर पर क़ानून बनाना आसान नहीं है. उधर, बिहार में बीजेपी की सहयोगी दल जेडीयू संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान से इत्तेफाक नहीं रखता. जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि राम मंदिर के मुद्दे पर पार्टी का स्टैंड पूरी तरह साफ है. इस मसले का हल या तो हिन्दू-मुस्लिम समाजों के प्रतिनिधि निकालें या फिर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मान्य हो, क्योंकि यह मामला अभी तक सुप्रीम कोर्ट के अधीन है. हमारा मानना है कि हमें उसके फैसले तक इंतजार करना चाहिए. इस मुद्दे को बेवजह तूल देने की जरूरत नहीं है. एक बार फैसला आ जाए फिर सभी पार्टी को इसका सम्मान करना चाहिए.

‘राम मंदिर बनाने के लिए सरकार कानून बनाए’

  1. मोहन भागवत ने कहा, ‘राम जन्मभूमि स्थल का आवंटन होना बाकी है, जबकि साक्ष्यों से पुष्टि हो चुकी है कि उस जगह पर एक मंदिर था. राजनीतिक दखल नहीं होता तो मंदिर बहुत पहले बन गया होता. हम चाहते हैं कि सरकार कानून के जरिए (राम मंदिर) निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे.’
  2. आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘राष्ट्रहित के इस मामले में स्वार्थ के लिए सांप्रदायिक राजनीति करने वाली कुछ कट्टरपंथी ताकतें रोड़े अटका रही हैं. राजनीति के कारण राम मंदिर निर्माण में देरी हो रही है.’
  3. उधर, उद्धव ठाकरे ने शिवसेना की दशहरा रैली में कहा है कि सभी लोग अयोध्या गए थे, सभी ने अपना सहयोग भी किया, बाबरी मस्जिद को भी गिरा दिया, लेकिन इसके बाद भी राम मंदिर नहीं बन पाया. मंदिर के लिए कई लोगों ने अपने प्राण गंवाए, उनके बारे में तो सोचो. इसलिए मैं अयोध्या जाने वाला हूं. बता दें कि उद्धव ने कहा कि वह 25 नवंबर को अयोध्या जाएंगे.
  4. उधर, विहिप के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने आरोप लगाया कि आरएसएस अब यह मुद्दा उठा रही है, क्योंकि चुनाव नजदीक है और भाजपा सरकार का प्रदर्शन निराशाजनक है. अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के प्रमुख तोगड़िया ने कहा, ‘भाजपा के संसद में पूर्ण बहुमत होने के बावजूद राम मंदिर कानून के लिए साढ़े चार सालों तक देरी क्यों हुई?’ उन्होंने कहा, ‘केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के सभी मोर्चो पर विफल रहने और कई राज्यों और 2019 में लोकसभा चुनाव होने के मद्देनजर राम मंदिर का मुद्दा उठाया जा रहा है.’
  5. वहीं, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा ‘बहुलतावाद’ और कानून-व्यवस्था में विश्वास नहीं करते हैं. ओवैसी ने कहा, ‘आरएसएस और उनकी सरकार को कौन राम मंदिर बनाने के लिए कानून बनाने से रोक रहा है? यह एक देश को अधिनायकवाद (शासन) में तब्दील करने का उदाहरण है. आरएसएस और भाजपा अधिनायकवाद में विश्वास करते हैं. वह ‘बहुलतावाद’ और ‘कानून-व्यवस्था’ में विश्वास नहीं करते हैं.’
  6. वहीं, सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा, ‘आरएसएस प्रमुख द्वारा राम मंदिर पर दिया गया बयान आने वाले चुनावों से पूर्व का राजनीतिक बयान है.’ चौधरी ने कहा कि आरएसएस राजनीतिक कारणों से भगवान के नाम का इस्तेमाल करती है.
  7. बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जीलानी ने कहा कि भागवत पूर्व में भी ऐसे बयान दे चुके हैं, जिनमें उन्होंने जनता और सरकार से आग्रह किया कि 2019 से पहले मंदिर निर्माण सुनिश्चित किया जाए. उच्चतम न्यायालय ने इस मुददे पर यथास्थिति बनाये रखने का निर्देश दिया है.
  8. कांग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने कहा कि यह खुली बात है कि जब भी आरएसएस और भाजपा भगवान राम की बात करते हैं तो समझ लेना चाहिए कि चुनाव नजदीक हैं.
  9. उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनाने का कानून संविधान के मुताबिक होगा. शर्मा ने कहा कि राम मंदिर बनाने के लिए हमेशा दो विकल्प हैं. पहला कानूनी रास्ता अख्तियार किया जाए और दूसरा आम सहमति बनाई जाए. उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में अध्यादेश लाना कानूनी रास्ता होगा. उन्होंने कहा कि अदालतों में मामला काफी समय से लंबित है.
  10. भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा कि भगवान राम के जन्म स्थान पर भव्य राम मंदिर बनना चाहिए. यह सभी हिंदुओं की इच्छा है.

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