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क्या PM मोदी से अब भी रूठे हैं भाजपा की ‘धरोहर’ मुरली मनोहर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से क्या बीजेपी के संस्थापक सदस्य और पूर्व अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी अब भी रूठे हुए हैं? यह सवाल इसलिए भी क्योंकि आज जब मुरली मनोहर जोशी वाराणसी सीट पर वोट डालने के बाद पत्रकारों के सवालों के जवाब जिस अंदाज से दे रहे थे, उससे ऐसे ही कुछ संकेत मिल रहे हैं.

जबकि, एक दौर पार्टी का नारा था कि बीजेपी की तीन धरोहर अटल, आडवाणी और मुरली मनोहर. हालांकि पार्टी आज भी उन्हें अपना धरोहर मानती है, इसीलिए मार्गदर्शक मंडल में उन्हें जगह दे रखा है.

मुरली मनोहर जोशी से पत्रकारों द्वारा किए गए सवाल और उनके द्वारा दिए गए जवाब..

सवाल-मुरली मनोहर जोशी जी ये बताइये कि इस चुनाव का सबसे अहम क्या है?

जवाब– मतदान

सवाल-बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के लिए क्या कहेंगे ?

जवाब- वो आते हैं, वोट करते हैं और अपना कर्तव्य निभाते हैं.

सवाल- नरेंद्र मोदी जी पर आपका आशीर्वाद?

जवाब- आशीर्वाद जनता दे रही है.

सवाल- और आपका वोट?

जवाब- हमारा वोट तो गोपनीय बात है.

सवाल- आप मार्गदर्शक मंडल में हैं क्या आपसे सलाह ली जाती है ?

जवाब- मैं आज के दिन कोई भी राजनीतिक बात नहीं करता हूं. आपके दर्शन हो गए (पत्रकार ) यही बहुत बड़ी बात है. हम तो आपके दर्शक हैं.

सवाल- आपका लंबा राजनीतिक सफर रहा है, क्या कहेंगे इस बार के चुनाव के बारे में ?

जवाब- मैं कोई राजनीतिक बात नहीं करता हूं अगर आप सवाल करोगे तो हमारा एक ही जवाब होगा एक्सट्रा स्मार्ट बनने की कोशिश न करें.

सवाल- काशी से आपका लगाव रहा है, काशी के विकास से आप कितना सहमत हैं?

जवाब- देखिए विकास तो एक सतत प्रक्रिया है और हो रही है.

सवाल- काशी में पांच सालों में विकास हुआ है ऐसा मानते हैं?

जवाब- ये तो जनता तय कर रही  है कि कितना विकास हुआ है ये तो देश के सामने है.

बता दें कि मुरली मनोहर जोशी ने पूरे बातचीत में एक बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का न तो नाम लिया और न ही उन्हें आशीर्वाद देने पर कोई जवाब दिया. इतना ही नहीं काशी में पांच साल में कराए विकास कार्य के सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि ये सतत प्रक्रिया है और हो रहा है. जनता तय करेगी की कि विकास हुआ है कि नहीं.

मुरली मनोहर जोशी 2009 में काशी से लोकसभा सदस्य चुने गए थे. 2014 में वो काशी सीट से ही चुनाव लड़ना चाह रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काशी से चुनाव लड़ने के कारण वो कानपुर सीट से चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंचे. इसके बाद उन्हें मोदी सरकार में मंत्री नहीं बनाया गया था. हालांकि इस बार के चुनाव में 75 साल की उम्र पार करने के कारण  पार्टी ने उन्हें मैदान में नहीं उतारा.

मुरली मनोहर जोशी ने मोदी सरकार पर कई बार सवाल खड़े किए थे. इसके चलते माना जा रहा है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नाराज चल रहे हैं. काशी में रविवार को जब मतदान करने गए तो उनकी बातों से साफ तौर पर उनकी नाराजगी झलकी.

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