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विश्वभर में सुर्खियों में रहा भारत का एंटी सेटेलाइट मिसाइल टेस्ट

नई दिल्ली : भारत द्वारा बुधवार को किया गया गए एंटी-सेटेलाइट मिसाइल टेस्ट भारत के लिए काफी बड़ी उपलब्धि है. इस टेस्ट के साथ ही भारत दुनिया में चौथा ऐसा देश बन गया है जिसके पास अंतरिक्ष में सेटेलाइट को मार गिराने की क्षमता है. भारत की मीडिया ही नहीं दुनिया भर के अन्य अखबारों में भी यह सुर्खियां बना रहा. दुनिया भर की मीडिया में इसके अलग-अलग रिएक्शन देखने को मिले-

पाकिस्तान के अखबार डॉन ने भारत में होने वाले लोकसभा चुनावों से इसे जोड़ते हुए लिखा, ‘लोकसभा चुनावों के पहले भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने एंटी- सेटेलाइट मिसाइल टेस्ट किया है.’ पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का हवाला देते हुए डॉन ने लिखा कि पाकिस्तान हमेशा से अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ का विरोधी रहा है. डॉन ने लिखा कि प्रवक्ता ने बताया, ‘अंतरिक्ष सभी का है इसलिए अंतरिक्ष में इस तरह की एक्टिविटी से वहां सैन्य कार्रवाई बढ़ेगी.’

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा, ‘भारत ने अंतरिक्ष में एक सेटेलाइट को मार गिराया. एशिया में शक्ति का संतुलन बदल रहा है.’ हालांकि अखबार ने लिखा कि इसके खराब परिणाम भी हो सकते है. भारत के इस तरह के टेस्ट से चीन के साथ प्रतियोगिता जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि इससे भारत के पास ऐसी शक्ति आ जाएगी कि वह किसी भी देश के सैटेलाइट को ध्वस्त करके उसे पूरी तरह से संचार माध्यम से काट सकता है. इसके अलावा भारतीय राजनीति का भी जिक्र अखबार ने किया है. ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए लिखा कि उन्होंने पीएम मोदी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में उन्होंने कहा है कि पीएम मोदी ऐसा राजनीतिक लाभ लेने के लिए कर रहे हैं.

चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने हेडलाइन लगाई है- ‘सेटेलाइट को ध्वस्त करके भारत अंतरिक्ष शक्तियों में हुआ शामिल.’ टाइम्स ने लिखा कि यह ऐसे समय में हुआ है जब कुछ ही दिन पहले भारत और पाकिस्तान के बीच पुलवामा हमले के बाद युद्ध की स्थिति बन गई थी.

एक और अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने भी इस टेस्ट को पुलवामा हमले से जोड़ा है. वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि भारत ने यह टेस्ट पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान के साथ बढ़ते हुए तनाव के बाद किया है. भारत के पुराने हो रह लड़ाकू विमानों का भी जिक्र इसमें किया है. अखबार ने लिखा है कि एशिया में चीन की बढ़ती शक्ति को देखते हुए भारत की अंतरिक्ष को लेकर महत्वाकांक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं.

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