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भोपाल / कुपोषण को समाप्त करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी – श्रीमती शिवा खरे, महिला बाल विकास अधिकारी

– कुपोषण को समाप्त करने में बाल आरोग्य संवर्धन अभियान प्रारंभ

आम सभा, धर्मेंद्र साहू, भोपाल : समाज में कुपोषण कलंक की भांति है, इसे समाप्त करना हम सभी की सामूहिक जिम्मदारी है। यह बात भोपाल महिला बाल विकास अधिकारी श्रीमती शिवा खरे CDPO. ने रसधाम गार्डन में बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम के तहत पोषण मित्र तथा कुपोषित बच्चों के अभिभावकों के उन्मुखीकरण कार्यशाला में कही।

भोपाल जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या बहुत कम है। महिला बाल विकास विभाग का अमला और पोषण मित्र पूरी गम्भीरता से प्रयास करें तो कुपोषण को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रायः हर घर में पर्याप्त पोष्टिक आहार होता है लेकिन बच्चे को उचित मात्रा एवं समय-समय पर खिलाने में लापरवाही कर जाते हैं, जिससे बच्चा कुपोषित हो जाता है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता केवल इस बात की है कि ऐसे बच्चों को पौष्टिक आहार संतुलित मात्रा में समय-समय पर दिया जाए। कुपोषित बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार समय पर खिलाये जाने में पोषण मित्र की महत्वपूर्ण भूमिका है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कि उनका ऐसे बच्चों के परिजनों से सीधा सम्पर्क रहता है। वे हर रोज ऐसे बच्चों के घर जाकर अपने बच्चे की भांति ही उसे पोष्टिक आहार खिलाएं। इससे बच्चा जल्द कुपोषण से बाहर आ जाएगा। उन्होंने पोषण मित्रों से कहा भी अपने संरक्षित बच्चे के घर जाकर उन्हें पोष्टिक आहार खिलाया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बच्चों के अभिभावकों कों घर पर बाड़ी में हरी सब्जी लगाने के लिए बीज दिया जाए। इसके साथ ही उनकी पात्रतानुसार शासन की अन्य योजनओं का भी लाभ दिलाया जाए। आयुर्वेदिक तेल का भी महत्व है। अभिभावकों को सही तरीके से बच्चों की मालिश करना बताया जाए।

कुपोषण को समाप्त करने में पोषण मित्र और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यशाला में कहा कि संभागायुक्त कविन्द्र कियावत के निर्देश पर भोपाल संभाग से कुपोषण को पूरी तरह समाप्त करने के लिए बाल आरोग्य संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जिले के अधिकारियों तथा अन्य लोगों को कुपोषित बच्चों का पोषण मित्र बनाया गया है। जिले से कुपोषण को पूरी तरह समाप्त करने में पोषण मित्रों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। कुपोषित बच्चे को एक निश्चित समय-सीमा में कुपोषण से बाहर निकालना इन पोषण मित्रों की जिम्मदारी होगी। आंगनबाड़ी की माध्यम से टेक होम राशन या मिड-डे-मील के तहत जो राशन दिया जाता है, वह कई बार बच्चों की बजाय घर के परिजन ही उस खाद्यान का स्वयं उपयोग कर लेते हैं। पोषण मित्र यह भी देखेंगे कि कुपोषित बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पोषिट और स्वादिष्ट आहार बच्चों को खिलाया जाए। कार्यशाला में महिला बाल विकास अधिकारी CDPO शिवा खरे सुपरवाइजर शगुफ्ता फारुकी सुपरवाइजर चंद्रमा माहौर पोषण मित्र तथा बच्चोें के अभिभावक उपस्थित थे।

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