
रायबरेली। लगातार बढ़ तेजा रहे प्रदूषण के लिए किसानों को जिम्मेदार ठहराना अफसरशाही व सरकार को तत्काल बंद कर देना चाहिए प्रदूषण के लिए जिम्मेदार किसान की पराली नहीं वरन पूंजी पतियों की मिलों से लगातार उगलता हुआ धुआं बढ़ती जा रही वाहनों की संख्या ईट भ_ों की चिमनियों से छोड़ा जा रहा धुआं जिम्मेदार है ना कि किसान की पराली अगर सरकार को प्रदूषण पर नियंत्रण करना है तो तत्काल प्रभाव से वाहन बनाने वाली फैक्ट्रियों पर रोक तथा चल रही मिलों को बंद करा देना चाहिए अथवा ऐसे उपाय करने चाहिए कि इन मीलो तथा वाहनों का धुआं वातावरण में न फैलने पाए यह विचार हैं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला मंत्री चंद किशोर आजाद के जो उन्होंने पत्रकारों से वार्ता करते हुए व्यक्त किए कॉमरेड आजाद ने कहा किसान की धान की 80 प्रतिशत फसल अभी खेतों में ही खड़ी है अपने जानवरों को खिलाने के लिए किसान ज्यादातर धान की कटाई हंसीए से कराता है ताकि उसे अपने जानवरों के लिए चारा मिल सके जो किसान मशीनों से भी फसल कटवाते हैं।
उनका भी यही प्रयास रहता है कि अधिक से अधिक धानह्य का पुआल खेतों में सड़ जाए ताकि खाद का काम कर सके अगर किसी किसान को पराली जलाने की आवश्यकता भी पड़ती है तो वह भी बहुत आंशिक रूप में पराली जलाता है इन हालातों में प्रदूषण का दोष किसान पर मरना अफसरशाही का एक कुचक्र है और सरकार का पूंजीपतियों को बचाने का तिकड़म उन्होंने कहा की मिलों की जहर उगलती सीमा नहीं हो पर रोक लगाने में सरकार नाकाम रही है क्योंकि पूंजीपति सरकार को चंदा देते हैं निरीह किसान से उन्हें कोई फायदा नहीं होता इसलिए प्रदूषण का सारा दोष किसान पर मढ़ा जा रहा है।
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