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मॉब लिंचिंग का शिकार बने अखलाक के परिवार ने दादरी में डाला वोट

ग्रेटर नोएडा के बिसाहड़ा गांव में बीफ को लेकर हुए बवाल में मारे गए अखलाक के परिवार ने गुरुवार को दादरी में मतदान किया. पहले इस प्रकार की खबरें आई थीं कि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है. ग्रेटर नोएडा के बिसाहड़ा गांव में बीफ बवाल में मारे गए अखलाक का परिवार बिसाहड़ा से शिफ्ट कर चुका है, अब बिसाहड़ा में परिवार का कोई नहीं रहता, लिहाजा वहां के वोटर लिस्ट में उनका नाम नहीं है.

अखलाक की हत्या के बाद सरकार की तरफ से अखलाक के भाई और परिवार वालों को दादरी में रहने के लिए फ्लैट मिला था, परिवार के कुल 9 लोगों का वहां की वोटर लिस्ट में नाम है.

अखलाक के भाई जान मोहम्मद ने आजतक से फोन पर हुई बातचीत में इसकी पुष्टि की. जान मोहम्मद का कहना है की परिवार के सभी लोगों ने दादरी में आज वोट भी डाला है, अखलाक के परिवार के कुछ लोग दिल्ली में भी रहते हैं अब वहां की वोटर लीस्ट में उनका नाम है.

बता दें कि 2015 में गोमांस रखने के शक में पीट-पीटकर मार दिए गए अखलाक के परिवार का नाम वोटर लिस्ट से गायब होने की खबर आई थी.

गौतमबुद्धनगर संसदीय सीट पर भी पहले चरण में वोटिंग हो रही है. गौतमबुद्धनगर के डीएम वार रूम ने बताया कि इलके में शांतिपू्र्ण वोटिंग चल रही है. दोपहर 1 बजे तक 61 फीसदी मतदान हो चुका है. नोएडा विधानसभा क्षेत्र नोएडा में 35 फीसदी मतदान, दादरी में 43% मतदान हुआ है.

कौन है अखलाक?

गोमांस रखने की अफवाह की वजह से लोगों ने अखलाक नाम के शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इस घटना में मृतक के बेटे को भी गंभीर चोट आई थी. जिसके बाद यूपी के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए जांच के आदेश दिए थे.

अखलाक हत्याकांड में उत्तर प्रदेश पुलिस ने कहा था कि हत्या बीफ की अफवाह के चलते की गई थी. जिसके मुख्य आरोपी विशाल और शिवम नामक दो व्यक्ति हैं.

इस मामले में 15 लोगों के खिलाफ चार्जशीट तैयार की गई जिसमें दो नाबालिग भी शामिल थे. लेकिन बाद में पाया गया कि एक किशोर नाबालिग नहीं था.

एसपी संजय ने हत्या का मकसद बताते हुए कहा था कि यह हत्याकांड गौ मांस की अफवाह के चलते हुआ. अफवाह की वजह से ही भीड़ ने अखलाक के घर पर हमला कर दिया था, जिसमें अखलाक को मार दिया गया जबकि दानिश को बुरी तरह से पीटा गया था.

इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी विशाल भाजपा के एक स्थानीय नेता का बेटा है. विपक्षी दलों ने इस हत्याकांड पर बीजेपी की खूब आलोचना की थी.

यह है घटनाक्रम

28 सितंबर, 2015: यूपी के दादरी के बिसहड़ा गांव में मो. अखलाक को घर में बीफ रखने के आरोप में कुछ लोगों ने हत्या कर दी.

6 अक्टूबर, 2015: केंद्र सरकार को भेजे गए रिपोर्ट में यूपी सरकार ने अखलाक के घर मिले मीट के सैम्पल बकरे का मांस बताया था.

24 दिसंबर, 2015: यूपी पुलिस ने चार्जशीट दाखिल किया. इसमें 15 लोगों को नामजद करते हुए बीफ को अफवाह बताया.

31 मई, 20016: मथुरा की फोरेंसिक लैब रिपोर्ट ने पुष्टि की कि अखलाक के फ्रिज से लिया गया मीट का सैंपल गौमांश ही था.

9 जून, 2016: मथुरा लैब की रिपोर्ट के आधार पर बिसाहड़ा के लोगों ने कोर्ट में अखलाक के परिवार के केस दर्ज करने की मांग की थी.

14 जुलाई, 2016: स्थानीय अदालत ने अखलाक के परिजनों के खिलाफ गोहत्‍या का केस दर्ज करने का आदेश दिया था.

16 सितंबर, 2016: अखलाक के परिजनों के खिलाफ गोहत्या मामले में आईपीसी की धारा 3/8 और 3/11 के तहत केस दर्ज.

27 सितंबर, 2016: यूपी पुलिस ने फिर कहा है कि अभी तक अखलाक के परिवार द्वारा गोकशी करने का कोई प्रामाणिक सबूत नहीं मिला.

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