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यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) द्वारा 28 अध्ययनों की समीक्षा में आया सामने : धूम्रपान करने वालों में कोरोना वायरस का खतरा कम

• यूसीएल ने चीन, अमेरिका, फ्रांस, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन में हुए 28 अध्ययनों की समीक्षा की

नई दिल्ली : वैज्ञानिक अध्ययनों की एक समीक्षा में इस बात के और भी प्रमाण मिले हैं कि धूम्रपान करने वालों में कोविङ-19 से गंभीर तरीके से बीमार होने का खतरा कम रहता है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन एकेडमिक्स ने 28 अध्ययनों की समीक्षा की है और पाया है कि अस्पताल में भर्ती कोविड-19 बीमारों में धूम्रपान करने वालों का अनुपात अनुमान से बहुत कम होता है। एक पब्लिक हेल्थ ऑफिसर ने कहा कि धूम्रपान और कोरोना वायरस के बीच संबंधों को लेकर स्थिति बहुत स्पष्ट है और विशेषज्ञ इस संबंध को समझाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एक अध्ययन में पाया गया है कि ब्रिटेन में कोविड-19 मरीजों में धूम्रपान करने वाले मात्र पांच प्रतिशत हैं, जबकि यहां आबादी में धूम्रपान करने वाले 14.4 प्रतिशत हैं।

एक अन्य अध्ययन के मुताबिक, फ्रांस में यह चार गुना कम है। चीन में एक अध्ययन के अनुसार, मरीजों में 38 प्रतिशत लोग धूम्रपान करने वाले हैं, जबकि यहां करीब आधी जनसंख्या धूम्रपान करती है। दो अध्ययनों की समीक्षा में सामने आया है कि जब धूम्रपान करने वाले वायरस का शिकार होते हैं, तो उनके इतना ज्यादा बीमार होने की आशंका रहती है कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़े। पिछले महीने पांच अध्ययनों की समीक्षा में भी इसी तरह की बात सामने आई थी कि धूम्रपान करने वालों में गंभीर संक्रमण कम होता है, लेकिन अगर ऐसा हो तो उनकी स्थिति ज्यादा गंभीर होती है।

चीन में 22 अध्ययन, अमेरिका में तीन, दक्षिण कोरिया में एक, फ्रांस में एक अध्ययन किया गया। एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन की भी समीक्षा भी की गई, जिसमें ज्यादातर डाटा ब्रिटेन का था। इनमें से तीन अध्ययनों में धूम्रपान करने वालों को तीन श्रेणी में बांटा गया था – जो अभी धूम्रपान करते हैं, जो पहले धूम्रपान करते थे और जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। अन्य 25 अध्ययनों में केवल अभी धूम्रपान करने वाले और पहले धूम्रपान करने वालों के बारे में जानकारी है। इनमें ऐसे लोगों की कोई जानकारी नहीं थी, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया था और कितने लोगों के बारे में ऐसी जानकारी नहीं है। अमेरिका में हुए अध्ययन में पाया गया है कि कभी धूम्रपान नहीं करने वालों की तुलना में धूम्रपान करने वालों में सार्स-सीओवी-2 से संक्रमित होने की आशंका कम रहती है।

क्या कहते हैं प्रत्येक देश में किए गए अध्ययन?

चीन के अस्पतालों में किए गए अध्ययनों में पाया गया कि कोविड-19 मरीजों में धूम्रपान करने वालों की संख्या 3.8 से 17.6 प्रतिशत होती है। वहीं पांच प्रतिशत से कुछ ज्यादा लोग ऐसे पाए गए जो पहले धूम्रपान करते थे लेकिन अब छोड़ चुके हैं। हालांकि 2018 में एक डाटा में सामने आया था कि देश में आधे से ज्यादा लोग धूम्रपान करते हैं (50.5 प्रतिशत पुरुष और 2. 1 प्रतिशत महिलाएं)। और चीन में धूम्रपान नहीं कर रहे हर 10 व्यक्ति में करीब एक व्यक्ति ऐसा है, जिसने पहले कभी धूम्रपान किया है (8.4 प्रतिशत पुरुष और 0.8 प्रतिशत महिलाएं)।

अमेरिका में हुए अध्ययन में कोविड-19 के बीमारों में धूम्रपान करने वालों की संख्या 1.3 से 27.2 प्रतिशत के बीच पाई गई है, जबकि 2018 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक यहां आबादी में 138 प्रतिशत लोग धूम्रपान करते हैं। मरीजों में 2.3 से 30. 6 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो पहले धूम्रपान करते थे और अब छोड़ चुके हैं। आबादी में ऐसे लोगों की संख्या 20.9 प्रतिशत है

दक्षिण कोरिया में हुए अध्ययन के मुताबिक, मरीजों में 18.5 प्रतिशत लोग धूम्रपान करने वाले वाले हैं, जो 2016 के अध्ययन के मुताबिक यहां की आबादी में 19.3 प्रतिशत धूम्रपान करने वालों के लगभग बराबर ही है।

फ्रांस में हुए अध्ययन के मुताबिक यहां धूम्रपान करने वालों की संख्या 7.1 प्रतिशत है, जिनमें से 6.1 प्रतिशत अस्पताल में भर्ती हैं। यहां आबादी में धूम्रपान करने वालों की संख्या 32 प्रतिशत है, जो बहुत ज्यादा है।

हालांकि यहां धूम्रपान छोड़ चुके लोगों के बारे में नतीजे अलग हैं। फ्रांस में ऐसे लोग 314 प्रतिशत हैं, जो पहले धूम्रपान करते थे और अब छोड़ चुके हैं। वहीं कोविङ-19 मरीजों में ऐसे लोगों की संख्या 59.1 प्रतिशत पाई गई है।

वहीं अंतरराष्ट्रीय अध्ययन, जिनमें ज्यादातर मरीज ब्रिटेन के थे, उसके मुताबिक मरीजों में धूम्रपान करने वाले या धूम्रपान छोड़ चुके लोगों की संख्या पांच प्रतिशत है।

इंग्लैंड में 2018 में धूम्रपान करने वाले 14.4 प्रतिशत और धूम्रपान छोड़ चुके लोग 25.8 प्रतिशत थे और इससे तुलना के आधार पर बताया गया कि अध्ययन में शामिल मरीजों में धूम्रपान करने और धूम्रपान छोड़ चुके लोगों की संख्या अनुमान से बहुत कम है। आमतौर पर धूम्रपान करने वालों में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है, क्योंकि पैथोजन और म्यूकस को बाहर निकालने में मदद करने वाले श्वसन तंत्र और फेफड़ों में मौजूद सूक्ष्म बाल जैसी संरचनाएं सिगरेट के धुएं में पाए जाने वाले खतरनाक रसायनों के कारण प्रायः क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। सिद्धांत के तौर पर देखा जाए तो कोरोना वायरस का संक्रमण धूम्रपान करने वालों को ज्यादा खतरे में डाल देता है क्योंकि लंग इन्फ्लेमेशन के कारण इस बीमारी में उनकी ब्लडस्ट्रीम में ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती है।

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