
– डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से माल परिवहन क्षेत्र को व्यापक लाभ
आम सभा, जबलपुर। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) भारतीय रेल के माल परिवहन को तेज, सुरक्षित, विश्वसनीय एवं अधिक दक्ष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 2,843 किलोमीटर की उच्च क्षमता वाले डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क में 1,337 किलोमीटर लंबा ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC), पंजाब के न्यू साहनेवाल से बिहार के न्यू सोननगर तक तथा 1,506 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC), उत्तर प्रदेश के न्यू दादरी से महाराष्ट्र के न्यू जेएनपीटी तक विस्तृत है। दोनों कॉरिडोर देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, उत्पादन केंद्रों, प्रमुख बाजारों एवं बंदरगाहों के बीच माल परिवहन को गति प्रदान कर रहे हैं।
राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स को मिलेगी मजबूती
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से माल परिवहन की लागत कम करने, भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने तथा देश के औद्योगिक एवं आर्थिक गलियारों को मजबूत करने में सहायता मिलेगी। पश्चिमी एवं पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तथा गति शक्ति मल्टीमोडल कार्गो टर्मिनल उच्च क्षमता वाले माल परिवहन नेटवर्क को बढ़ावा दे रहे हैं।
तेज एवं विश्वसनीय माल परिवहन से उद्योगों को कच्चे माल की सुगम आपूर्ति और तैयार उत्पादों के कुशल वितरण में सुविधा होगी। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’जैसी पहलों को गति मिलेगी। विद्युतीकृत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से डीजल खपत एवं ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने में भी सहायता मिलेगी।
यात्री रेल सेवाओं को भी मिलेगा लाभ
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर मालगाड़ियों के संचालन से पारंपरिक रेल मार्गों पर संकुचन कम होगा। इससे अतिरिक्त यात्री सेवाओं के संचालन, ट्रेनों की गति बढ़ाने तथा समयपालन में सुधार के लिए क्षमता उपलब्ध हो सकेगी।
सड़क से रेल की ओर माल परिवहन बढ़ने से राजमार्गों पर भारी वाहनों का दबाव एवं सड़क दुर्घटनाओं की संभावना कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही डीजल खपत, वायु एवं ध्वनि प्रदूषण में भी कमी आएगी।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के प्रमुख लाभ
* माल परिवहन की गति एवं क्षमता में वृद्धि तथा डिलीवरी समय में कमी।
* लॉजिस्टिक्स लागत में कमी एवं भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि।
* डबल-स्टैक कंटेनर एवं लंबी मालगाड़ियों से अधिक माल की ढुलाई।
* यात्री रेल सेवाओं के लिए अतिरिक्त क्षमता तथा समयपालन में सुधार।
* सड़क यातायात पर दबाव एवं डीजल खपत कम करने में सहायता।
* कोयला, इस्पात, सीमेंट, खाद्यान्न, उर्वरक एवं पेट्रोलियम जैसे उत्पादों की तेज आवाजाही।
* बंदरगाहों, औद्योगिक क्लस्टरों एवं मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्कों से बेहतर कनेक्टिविटी।
* डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर फ्रेट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (DFIS)के माध्यम से डिजिटल ट्रैकिंग एवं माल की बेहतर निगरानी।
* ‘ट्रक्स ऑन ट्रेन’ एवं कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स जैसी आधुनिक सुविधाओं को बढ़ावा।
* लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग एवं विनिर्माण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर।
इस प्रकार, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) देश की माल परिवहन व्यवस्था को तेज, किफायती, पर्यावरण-अनुकूल एवं भविष्य-उन्मुख बनाने के साथ भारत को वैश्विक विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक्स हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
Dainik Aam Sabha