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पॉलीहाउस किसानों का NHB के खिलाफ देशव्यापी विरोध, सब्सिडी और लंबित GoC आवेदनों पर उठाए सवाल

– 10 राज्यों के किसानों ने 11 शहरों में प्रदर्शन कर NHB से मांगा स्पष्ट जवाब; 21 अगस्त के संशोधन पर पुनर्विचार और पुरानी परियोजनाओं को सुरक्षित रखने की मांग

भोपाल : राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की पॉलीहाउस एवं संरक्षित खेती से संबंधित प्रक्रियाओं और हालिया नियमों में बदलाव को लेकर किसानों तथा पॉलीहाउस उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का विरोध देश के विभिन्न हिस्सों में सामने आया है। आयोजकों के अनुसार गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, हरियाणा, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और महाराष्ट्र सहित 10 राज्यों के किसानों ने 11 शहरों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर अपनी मांगें NHB तक पहुंचाईं।

किसानों का कहना है कि नई परियोजनाओं के लिए Grant of Clearance (GoC) से जुड़ी प्रक्रिया में लंबे समय से अनिश्चितता बनी हुई है। NHB की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 21 अगस्त 2026 को Commercial Horticulture और Cold Storage Schemes से संबंधित दिशानिर्देशों में संशोधन किया गया तथा 4 सितंबर 2026 से Scheme No. 1 और Scheme No. 2 के तहत नए GoC आवेदनों की प्राप्ति को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया।

किसानों और उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार इस स्थिति का असर उन आवेदकों पर पड़ रहा है, जिन्होंने बैंक ऋण, भूमि, निर्माण, पॉलीहाउस संरचना और अन्य सामग्री की तैयारी में निवेश कर रखा है। उनका कहना है कि यदि GoC प्रक्रिया में देरी जारी रहती है तो बैंक ऋण की स्वीकृति की समय-सीमा, परियोजना की लागत और निर्माण की निर्धारित अवधि प्रभावित हो सकती है। पॉलीहाउस निर्माता, निर्माण एजेंसियां, फिल्म एवं नेट आपूर्तिकर्ता तथा संबंधित तकनीकी टीमें भी नए ऑर्डर और परियोजनाओं के अभाव से प्रभावित हो सकती हैं।

50 प्रतिशत सहायता बहाल करने की मांग

किसानों ने 21 अगस्त के संशोधन में सामान्य क्षेत्रों के लिए सहायता की दर में किए गए बदलाव पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सहायता में कमी से परियोजना की शुरुआती पूंजी की आवश्यकता बढ़ सकती है और किसानों को अतिरिक्त ऋण लेने या परियोजना का आकार कम करने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने मांग की है कि 21 अगस्त के संशोधन पर पुनर्विचार किया जाए, 50 प्रतिशत सहायता व्यवस्था बहाल की जाए और भविष्य में बड़े नीतिगत बदलाव लागू करने से पहले किसानों तथा उद्योग प्रतिनिधियों से व्यापक चर्चा की जाए।

किसानों की प्रमुख मांग यह भी है कि 21 अगस्त से पहले पात्रता पूरी करने वाले आवेदन, लंबित GoC, जारी स्वीकृतियां और पहले से किए गए वित्तीय दायित्वों को पुरानी व्यवस्था के तहत सुरक्षित रखा जाए। साथ ही बैंक ऋण से लेकर निर्माण, निरीक्षण और अंतिम सब्सिडी दावे तक प्रत्येक चरण की स्पष्ट समय-सीमा लिखित रूप में जारी करने की मांग की गई है।

मंत्री से भी मांगा गया स्पष्टीकरण

विरोध के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री और NHB के पदेन उपाध्यक्ष भागीरथ चौधरी से भी स्पष्टीकरण की मांग उठी। यह मांग उनके राजस्थान स्थित खीरा उत्पादन प्रोजेक्ट को मिली लगभग ₹99 लाख की NHB सहायता को लेकर सामने आए विवाद के संदर्भ में की गई।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चौधरी के प्रोजेक्ट को लगभग ₹99 लाख की सहायता मिली थी। चौधरी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्होंने नियमों का पालन किया और परियोजना के लिए आवेदन पहले किया था। बाद में केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि चौधरी ने संबंधित बैंक को सब्सिडी लौटाने की सूचना दी और बैंक को यह राशि NHB को वापस करने के निर्देश दिए गए।

किसानों का सवाल है कि किसी एक मामले से जुड़े विवाद के बाद किए गए नीतिगत बदलावों का आर्थिक प्रभाव उन किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए, जिन्होंने नियमों के तहत अपनी परियोजनाओं की तैयारी पहले से कर रखी है।

पारदर्शी प्रक्रिया और स्पष्ट समय-सीमा की मांग

किसानों ने नए GoC आवेदन दोबारा कब शुरू होंगे, लंबित आवेदनों का निपटारा कब तक होगा और दस्तावेजों की कमी होने पर आवेदक को कितनी जल्दी सूचना दी जाएगी—इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट कार्यक्रम जारी करने की मांग की है। साथ ही शिकायतों के निपटारे के लिए निर्धारित समय-सीमा वाली व्यवस्था बनाने की मांग भी रखी गई है।

आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने पॉलीहाउस परियोजनाओं पर लागू GST को कम करने, लागत मानकों को मौजूदा बाजार परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित करने और संरक्षित खेती के लिए पर्याप्त वार्षिक बजट सुनिश्चित करने की मांग भी रखी है।

किसानों ने NHB को सात दिन में लिखित जवाब देने और 21 अगस्त के संशोधन पर पुनर्विचार करने की मांग की है। आयोजकों के अनुसार यदि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो किसान दोबारा बड़ी संख्या में NHB मुख्यालय, गुरुग्राम में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सकते हैं।

किसानों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि पॉलीहाउस किसानों, परियोजना निवेशकों और इस क्षेत्र से जुड़े रोजगार की सुरक्षा के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित कराना है।