भोपाल
'ब्रिक्स' देशों के सांस्कृतिक कार्य समूह और संस्कृति मंत्रियों का सम्मेलन बुधवार से भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में होगा। इसमें सदस्य देशों के बीच यूनेस्को की विश्व धरोहर के लिए संयुक्त नामांकन पर सहमति बन सकती है।अभी एक देश वर्ष में एक धरोहर के लिए नामांकन कर सकता है। भारत की आखिरी (45वीं) धरोहर सारनाथ को इसमें शामिल किया गया है।
भारतीय विरासत की वापसी की उम्मीद
संयुक्त नामांकन का लाभ यह होगा कि कोई भी देश अपनी संस्कृति से जुड़ी दूसरे देश में स्थित धरोहर के लिए नामांकन कर सकता है। जैसे बौद्ध संस्कृति से जुड़ी कई धरोहरें जापान और दूसरे देशों में हैं। कंबोडिया सहित कुछ देशों में मंदिर भी इसी तरह से हैं। इससे भारत के साथ सहभागी देशों को भी लाभ मिलेगा।
इसके अतिरिक्त लूट या चोरी कर एक से दूसरे देशों में ले जाई गईं सांस्कृतिक धरोहरों (मूर्तियां, पांडुलिपियां, कलाकृतियां, आभूषण, शिलालेख आदि) को वापस लाने के लिए संयुक्त घोषणा पत्र जारी हो सकता है। बैठक में सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा, संग्रहालय, सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर चर्चा होगी।
संस्कृति से संबंधित विषयों पर होगी चर्चा
इस आयोजन में पहले दो दिन यानी 5 और 6 अगस्त को ब्रिक्स देशों के सांस्कृतिक समूहों की बैठक होगी. इस दौरान सम्मेलन में संस्कृति से संबंधित कई विषयों पर चर्चा होगी. ब्रिक्स देशों के कलाकार रवींद्र भवन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी देंगे. सम्मेलन के दौरान प्रतिनिधिमंडल जनजातीय संग्रहालय, राज्य संग्रहालय, वन विहार और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का दौरा करेंगे. इसके बाद 7 और 8 अगस्त को संस्कृति मंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित होगी।
मेहमान चखेंगे मध्य प्रदेश के खास स्वाद
सम्मेलन में आए मेहमानों को मध्य प्रदेश के कई पारंपरिक डिश परोसी जाएंगी। इनमें दाल बाफले, निमोना, गुइया की सब्जी, बड़ा, कोदो और कुटकी जैसे मिलेट्स से बने पकवान शामिल हैं। विदेशी मेहमानों की पसंद को देखते हुए पश्चिमी और दूसरे देशों के खाने की भी व्यवस्था की गई है ताकि सभी अपनी पसंद का भोजन कर सकें।
संस्कृति और परंपरा से होंगे रूबरू
पहले दिन मेहमान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय जाएंगे। यहां उनका पारंपरिक स्वागत किया जाएगा। वे मिट्टी के बर्तन बनाने की कला, जनजातीय जीवन, पुराने घरों की बनावट और भारत की अलग-अलग परंपराओं को करीब से देखेंगे। शाम को कथक, लोक नृत्य और पारंपरिक कपड़ों पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। मिंटो हॉल में कई खास प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी जिन्हें आम लोग भी देख सकेंगे।
6 से 8 अगस्त तक होंगे कई खास कार्यक्रम
सम्मेलन के दौरान संस्कृति से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा होगी। अलग-अलग देशों के प्रतिनिधि सांस्कृतिक सहयोग, विरासत को बचाने और आपसी संबंध मजबूत करने पर बात करेंगे। 6 अगस्त से सांस्कृतिक महोत्सव भी शुरू होगा जिसमें कई देशों के कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। 7 अगस्त को म्यूजिक का बड़ा कार्यक्रम होगा, जहां भारत और दूसरे देशों के कलाकार एक साथ मंच साझा करेंगे। इसका मकसद कला के जरिए दोस्ती और एकता का संदेश देना है।
मेहमानों के लिए विशेष कार्यक्रम
सम्मेलन के दौरान विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भोपाल की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए हेरिटेज वॉक, बर्ड वॉचिंग बड़ी झील में शिकारा राइड, मध्यप्रदेश के हस्तशिल्प की शॉपिंग जैसे कई कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
वहीं इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन की एक विशेष आकर्षण विभिन्न देशों के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी. विदेशी कलाकार अपने-अपने देशों की लोक कला, संगीत, नृत्य और पारंपरिक संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे. सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं. देश-विदेश से आने वाले मेहमानों के स्वागत के लिए राजधानी पूरी तरह तैयार है।
वाग्देवी की प्रतिमा लाने के लिए हो रहा पत्राचार
केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि ब्रिटिश म्यूजियम लंदन में रखी वाग्देवी (मां सरस्वती) की प्रतिमा को लाने का प्रयास किया जा रहा है। भारत सरकार की तरफ से ब्रिटेन सरकार और म्यूजियम को पत्र लिखा गया है।
निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत इसे लाने का प्रयास एक वर्ष से किया रहा है। तमिलनाडु की दो प्रतिमाएं लाने में हम सफल भी रहे हैं। वर्ष 2014 के बाद 650 धरोहरों को लाया गया है, जबकि इसके पहले 13 ही लाई गई थीं।
संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति
मंगलवार को भोपाल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल और मप्र के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के एसीएस शिवशेखर शुक्ला ने यह जानकारी दी। अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत कर रहा है।
इसके अंतर्गत अलग-अलग कार्य समूह की बैठकें अलग-अलग स्थानों पर हो रही हैँ। संस्कृति समूह की पहली बैठक वर्चुअल, दूसरी जून में वाराणसी में और तीसरी व अंतिम बैठक भोपाल में हो रही है जिसमें संयुक्त घोषणा पत्र भी जारी किया जाएगा।
सम्मेलन में पहले दो दिन 5 और 6 अगस्त को सदस्य और सहभागी (पार्टनर) देशों के अधिकारियों के बीच सांस्कृतिक संबंध बढ़ाने और घोषणा पत्र के संभावित बिंदुओं पर चर्चा होगी। 7 और 8 अगस्त को सदस्य देशों के संस्कृति मंत्रियों की बैठक होगी, जिसमें घोषणा पत्र को अंतिम रूप दिया जाएगा।
इसमें नौ देशों के डिप्टी मिनिस्टर और भारत के संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शामिल होंगे। कुल 11 सदस्य देशों में से सऊदी अरब शामिल नहीं हो रहा है।
कार्यक्रम स्थल पर ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट मौसम और प्रोजेक्ट बृहत्तर भारत की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। 6 और 7 अगस्त को ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव भोपाल के रवींद्र भवन में होगा, जिसमें सदस्य देशों के 40 कलाकार प्रस्तुतियां देंगे।
प्रतिनिधि सांची और भीमबेटका का भ्रमण करेंगे। बता दें कि इस संगठन में भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सदस्य हैं।
इसी दिन शाम को प्रतिनिधि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का दौरा करेंगे। जहां पॉटरी (मृदा शिल्प) प्रदर्शनी में उनका पारंपरिक स्वागत किया जाएगा और स्वदेशी शिल्प व पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के लाइव प्रदर्शन दिखाए जाएंगे।
इसके बाद प्रतिनिधि ट्राइबल हैबिटेट में 'नागा हाउस' और 'हिमालयी गांव' का गाइडेड भ्रमण कर वहां की वास्तुकला, जीवन शैली व सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन करेंगे। प्रेक्षागृह में एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा।
जिसमें कथक नृत्य, पारंपरिक सामुदायिक नृत्य और भारत की विविध पारंपरिक व जनजातीय पोशाकों को प्रदर्शित करने वाला एक फैशन शो प्रस्तुत किया जाएगा।
पहले दिन से प्रदर्शनी भी होगी
मुख्य कार्यक्रम मिंटो हॉल में होगा। यहां 'ज्ञान भारतम', 'प्रोजेक्ट मौसम' और 'प्रोजेक्ट बृहत्तर भारत' पर तीन विशेष प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाएगा। ये प्रदर्शनियां इन चारों दिन आम जनता के लिए खुली रहेंगी।
ये प्रदर्शनियां भारत की पांडुलिपि विरासत, समुद्री सांस्कृतिक संबंधों और सभ्यतागत जुड़ाव को प्रदर्शित करने के साथ विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक कूटनीति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में भारत की पहलों को रेखांकित करेंगी।
6 से 8 अगस्त तक ये कार्यक्रम
6 अगस्त बैठक में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों के घोषणापत्र के मसौदे और सांस्कृतिक सहयोग के अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इनमें सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा, संग्रहालय, सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और ब्रिक्स देशों के बीच लोगों से लोगों का जुड़ाव शामिल हैं।
कार्य समूह की सिफारिशें मंत्रस्तरीय बैठक के दौरान संस्कृति मंत्रियों के विचार का आधार बनेंगी। शाम को, रवींद्र भवन में ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। जिसमें ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
यह कार्यक्रम आम जनता के लिए खुला रहेगा और भाग लेने वाले देशों की समृद्ध और विविध प्रदर्शन कला परंपराओं को देखने का अवसर प्रदान करेगा। शाम का समापन संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित रात्रिभोज के साथ होगा।
7 अगस्त को ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्री भोपाल पहुंचेंगे। शाम को प्रमुख 'ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव 2026' आयोजित किया जाएगा, जो भारत और भाग लेने वाले ब्रिक्स देशों के प्रख्यात संगीतकारों और कलाकारों को एक साथ लाने वाला एक विशेष रूप से तैयार किया गया सहयोगात्मक संगीतमय कार्यक्रम है।
कार्यक्रम की शुरुआत "सर्वे भवन्तु सुखिनः" के आह्वान के साथ होगी। जिसके बाद हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय परंपराओं का उत्सव मनाता हुआ "कलर्स ऑफ इंडियन म्यूजिक" प्रस्तुत किया जाएगा। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण "ब्रिक्स पीस सॉन्ग – पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड" होगा, जो भाग लेने वाले ब्रिक्स देशों की एक संगीतमय यात्रा प्रस्तुत करेगा।
इसमें बेलारूस, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की संगीतमय परंपराओं का समावेश होगा। कार्यक्रम में आर्केस्ट्रा प्रस्तुतियां "पीस टू ऑल, हार्मनी टू ऑल" और "क्रेस्केंडो ऑफ यूनिटी" भी शामिल होंगी।
विशेष समापन सांस्कृतिक प्रस्तुति – ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’
इसी दिन शाम को संस्कृति विभाग कार्यक्रम की अंतिम और भव्य प्रस्तुति के रूप में "अमृतस्य मध्य प्रदेश- एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा" का मंचन करेगा। विख्यात कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के कुशल निर्देशन में 125 से अधिक सिद्धहस्त कलाकारों द्वारा प्रस्तुत यह नृत्य-संरचना ॐ की अनादि ध्वनि के साथ मध्य प्रदेश की जीवंत आत्मा को सजीव करेगी।
यह महायात्रा भीमबेटका, सांची और खजुराहो के यूनेस्को वैभव से लेकर चित्रकूट के 'राम-पथ गमन' और उज्जैन के संदीपनि आश्रम की 'कृष्ण-लीला' तक का पावन सफर तय कराती है।
इसमें ग्वालियर, ओरछा व मांडू के ऐतिहासिक किलों की गाथा, महेश्वरी-चंदेरी के वस्त्र-शिल्प का लालित्य, तथा बैगा, मटकी व बधाई जैसे समृद्ध जनजातीय लोक-नृत्यों का उल्लास समाहित है।
भोपाल की झीलों से लेकर बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन, ओंकारेश्वर के अध्यात्म और मां नर्मदा की महाआरती से सराबोर यह प्रस्तुति अतिथियों को 'सिंहस्थ कुंभ 2028' का भव्य आध्यात्मिक निमंत्रण भी प्रदान करेगी। शाम का समापन मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित रात्रिभोज के साथ होगा।
8 अगस्त को मंत्रियों की बैठक होगी
8 अगस्त को भारत की अध्यक्षता में तीसरी ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक आयोजित की जाएगी। मंत्री ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के बीच सांस्कृतिक विरासत, संग्रहालयों, रचनात्मक अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और लोगों से लोगों के बीच जुड़ाव के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करेंगे।
यह बैठक 'ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की घोषणा' को अपनाने के साथ समाप्त होगी, जो ब्रिक्स ढांचे के भीतर बेहतर सांस्कृतिक सहयोग के लिए एक साझा दृष्टिकोण और भविष्य का रोडमैप निर्धारित करेगी। इसके बाद मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दोपहर के भोजन (लंच) का कार्यक्रम होगा।
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल 'सांची' की सांस्कृतिक यात्रा बैठक और भोजन के बाद विदेशी मंत्री एवं प्रतिनिधिमंडल भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत और स्थापत्य कला के अवलोकन के लिए सांची के लिए प्रस्थान करेंगे। प्रतिनिधि 'बुद्ध जंबूदीप' का भ्रमण करेंगे और तत्पश्चात विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप का एक विशेष गाइडेड टूर लेंगे।
यात्रा के दौरान प्रतिनिधि चेतियागिरी मंदिर में दर्शन के साथ-साथ योग एवं ध्यान सत्र में भाग लेंगे। शाम को बौद्ध इतिहास और कला पर आधारित एक आकर्षक 3D प्रोजेक्शन मैपिंग तथा लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया जाएगा।
9 अगस्त को रवाना होंगे मेहमान
अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए उनकी आगे की रवानगी से पहले यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका शैलाश्रय के लिए एक वैकल्पिक भ्रमण की व्यवस्था की गई है।
Dainik Aam Sabha