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क्या लद्दाख लोकसभा सीट पर फिर खिलेगा बीजेपी का ‘कमल’?

जम्मू कश्मीर के लद्दाख लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी सज्जाद हुसैन स्थानीय समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने और उन्हें सुलझाने के मकसद के साथ चुनाव लड़ रहे हैं. सज्जाद करगिल के रहने वाले हैं. उनका कहना है कि, ‘पूरे देशभर में करगिल को लेकर यह आम धारणा बनी हुई है कि यह वॉर जोन है जिसे हम खत्म करना चाहते हैं.’

वह ये चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं यहां यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज और सड़क-बिजली की उपलब्धता के लिए लड़ रहा हूं. मैं चाहता हूं कि अस्पताल बने.’ उन्होंने कहा, ‘यह इलाका ज्यादातर समय देश के बाकी हिस्सों से कटा रहता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2018 में लेह-लद्दाख में जिस जोजिला टनल का शिलान्यास किया और जिस कंपनी को इसके निर्माण की जिम्मेदारी दी गई, वह लिक्वीडिटी क्रंच की शिकार हो गई. यानी केंद्र सरकार का विकास यहां तक नहीं पहुंच सका है.’

दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ह्यूमन राइट्स में पोस्ट ग्रेजुएट सज्जाद हुसैन राष्ट्रीय राजधानी में तमाम मुद्दों पर जन आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं. उन्होंने जामिया के ही पर्शियन डिपार्टमेंट से इरानोलॉजी में डिप्लोमा की डिग्री हासिल की. इसके बाद वह अपने घर करगिल लौट गए. ईरान के एक समाचार चैनल के साथ उन्होंने काम भी किया और अब वह लोकसभा चुनाव के लिए मैदान में हैं.

कन्हैया की तरह मिला समर्थन?

इस सवाल पर कि क्या कन्हैया कुमार की तरह उन्हें भी दिल्ली के प्रबुद्ध वर्ग से समर्थन मिल रहा है? उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की मदद से वह चुनाव लड़ रहे हैं. चुनावी खर्चे का बोझ स्थानीय लोग चंदे के माध्यम से उठा रहे हैं. सज्जाद ने इस बात को लेकर थोड़ी निराशा जाहिर की कि लद्दाख जैसे दूर दराज क्षेत्र की बात केंद्र तक नहीं पहुंच पाती है. वह लेह और करगिल क्षेत्र की समस्याओं को संसद में रखेंगे.

अगर चुनाव जीतते हैं तो आपका मुख्य मकसद क्या होगा? सज्जाद ने इस सवाल पर कहा कि लद्दाख क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मुहैया कराना उनका मुख्य मकसद है, लेकिन वह करगिल को लेकर देशवासियों में जो वॉर जोन की धारणा बनी हुई है, उसे खत्म करना चाहेंगे ताकि लद्दाख आने वाले किसी व्यक्ति का कोई परिजन उसकी सुरक्षा को लेकर निश्चित रह सके. उन्होंने कहा कि जैसे ही करगिल का नाम जेहन में आता है लोग इस इलाके को युद्ध मैदान के तौर पर याद करते हैं, इसे तोड़ना है.

गौरतलब है कि भौगोलिक रूप से लद्दाख भारत की सबसे बड़ी लोकसभा सीट है. 2014 के लोकसभा चुनाव में इसे बीजेपी के तुस्पतान चेववांग ने मात्र 36 वोट यानी 0.03 फीसदी के अंतर से जीत ली थी. चेववांग ने पिछले साल संसद और पार्टी की सदस्यता से इ​स्तीफा दे दिया था. इस बार लद्दाख सीट पर बीजेपी ने जामयांग तेजरिंग नामग्याल को उतारा है. उनका मुकाबला कांग्रेस के रिगजिन स्पालबार, निर्दलीय असगर अली कर्बलाई, निर्दलीय प्रत्याशी सज्जाद हुसैन से है, जिन्हें पीपुल्स डेमो​क्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) का समर्थन हासिल है.

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