जम्मू-कश्मीर
अमेरिका के भारत में राजदूत और दक्षिण-मध्य एशिया के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर दो दिन के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दौरे पर होंगे. उनका यह दौरा सिर्फ एक राजनयिक यात्रा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे बड़ा रणनीतिक संदेश भी देखा जा रहा है. खासकर इसलिए क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर और 2020 की गलवान झड़प के बाद किसी शीर्ष अमेरिकी राजनयिक का यह दौरा काफी अहम है l
सर्जियो गोर बुधवार को श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात करने वाले हैं. इसके अलावा सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के साथ भी उनकी बातचीत होनी है. इसके बाद 20 अगस्त को वह लद्दाख जाएंगे. यानी अमेरिकी राजदूत का दौरा कश्मीर से शुरू होकर सीधे उस इलाके तक पहुंच रहा है, जहां भारत और चीन के बीच सीमा तनाव का सबसे बड़ा अध्याय लिखा गया था l
पाकिस्तान को क्या संदेश?
सबसे पहले बात पाकिस्तान की. लंबे समय से पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है. भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की उम्मीद भी जताता रहा है. लेकिन सर्जियो गोर का सीधे श्रीनगर आना इस मामले में एक अलग तस्वीर दिखाता है l
सर्जियो गोर भारत के निर्वाचित मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले हैं. जम्मू-कश्मीर के प्रशासन और सुरक्षा हालात को सीधे समझने की कोशिश कर रहे हैं. इसमें पाकिस्तान के लिए एक साफ संकेत देखा जा सकता है कि अमेरिका कश्मीर को लेकर भारत के साथ सीधे संवाद को प्राथमिकता दे रहा है l
ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह संदेश और अहम हो जाता है. भारत लगातार सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाता रहा है. ऐसे में अमेरिकी राजदूत का कश्मीर दौरा यह दिखाता है कि वॉशिंगटन इस इलाके की सुरक्षा को भारत के नजरिए से भी समझना चाहता है l
चीन के लिए लद्दाख वाला संदेश
अब आते हैं चीन पर. गोर के दौरे का दूसरा और शायद ज्यादा रणनीतिक हिस्सा है लद्दाख. 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय तक तनाव रहा. ऐसे में किसी अमेरिकी राजदूत का गलवान के बाद पहली बार लद्दाख जाना अपने आप में काफी अहम है l
अमेरिका पहले भी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी LAC पर यथास्थिति बदलने की कोशिशों का विरोध कर चुका है. ऐसे में गोर का लद्दाख जाना भारत के साथ अमेरिका की रणनीतिक और रक्षा साझेदारी की अहमियत को दिखाता है l
हालांकि, इसे सीधे तौर पर चीन के खिलाफ किसी अमेरिकी कदम के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी. लेकिन इतना जरूर है कि वॉशिंगटन भारत के सीमावर्ती इलाकों और सुरक्षा चुनौतियों को करीब से समझने में दिलचस्पी दिखा रहा है l
क्या मुनीर-शहबाज की रणनीति को झटका?
पाकिस्तान की कोशिश रही है कि कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका का ध्यान खींचा जाए. भारत-पाकिस्तान के बीच किसी तरह की मध्यस्थता की गुंजाइश बने. कई बार कुछ अमेरिकी सांसद जम्मू-कश्मीर का दौरा कर तनाव जरूर पैजा कर देते हैं. मामले को ग्लोबल लेवल पर ले जाने की कोशिश करते हैं l
हालांकि सर्जियो गोर श्रीनगर में भारत के निर्वाचित नेतृत्व से मुलाकात करेंगे. इसके बाद लद्दाख जा रहे हैं. यानी उनका फोकस कश्मीर को किसी अलग अंतरराष्ट्रीय विवाद के रूप में पेश करने से ज्यादा भारत के साथ सीधे संवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा पर नजर आता है l
भारत के लिए क्यों अहम?
भारत के लिहाज से यह दौरा इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिका का शीर्ष राजनयिक कश्मीर और लद्दाख दोनों जगह जाकर जमीनी हालात समझ रहा है. एक तरफ पाकिस्तान के साथ सुरक्षा चुनौती है, तो दूसरी तरफ चीन के साथ LAC का मुद्दा. ऐसे में सर्जियो गोर की यात्रा को भारत-अमेरिका रिश्तों में बढ़ते रणनीतिक जुड़ाव के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है. हालांकि, इस दौरे से कोई बड़ा नीतिगत ऐलान होता है या नहीं, यह अभी साफ नहीं है l
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