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जम्मू-कश्मीर: 13 साल बाद स्थानीय निकाय चुनाव, 422 वॉर्डों में कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान जारी

श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर में 13 साल के लंबे इंतजार के बाद सोमवार को स्थानीय निकाय चुनाव का आगाज हुआ है। सेना और अर्धसैनिक बलों के 10 हजार से अधिक जवानों की सुरक्षा में जम्मू-कश्मीर के कुल 422 वॉर्डों में 820 पोलिंग स्टेशनों पर निकाय चुनाव के प्रथम चरण का मतदान कराया जा रहा है। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार आम लोगों के लिए निकाय चुनाव की वोटिंग के लिए सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है और इसके लिए घाटी के सभी पोलिंग बूथों समेत सार्वजनिक स्थानों और महत्वपूर्ण स्थानों पर कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। साथ ही हिंसक प्रदर्शनों की आशंका में दक्षिण कश्मीर और श्रीनगर के कई इलाकों में सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की अतिरिक्त कंपनियों को तैनात किया गया है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शालीन काबरा के अनुसार निकाय चुनाव के पहले चरण के लिए कुल 321 वॉर्डों में विभिन्न प्रत्याशियों के लिए वोट डाले जा रहे हैं। चुनाव आयुक्त के मुताबिक पहले चरण के लिए कुल 422 वॉर्ड में वोटिंग कराई जानी थी, लेकिन 78 वॉर्ड में सिर्फ एक प्रत्याशी के नामांकन करने के कारण इन्हें निर्विरोध विजयी घोषित कर दिया गया। वहीं 23 वॉर्ड में किसी ने भी नामांकन नहीं दायर किए, जिसके कारण प्रथम चरण में इन सभी पर मतदान नहीं कराया जा रहा है।

निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक पहले चरण के लिए कुल 1204 प्रत्याशी मैदान में है, जिनके लिए मतदाता ईवीएम के जरिए अपने वोट का प्रयोग कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक पहले चरण में जम्मू संभाग के जम्मू नगर निगम, राजौरी, नौशेरा, सुंदरबनी, पुंछ, सुरनकोट, आरएसपुरा, अखनूर, ज्यौड़िया, कालाकोट, अरनिया और खौड़ इलाकों में वोटिंग कराई जा रही है। वहीं कश्मीर में कोकरनाग, हंदवाड़ा, बांदीपोरा, बारामुला, कुपवाड़ा और श्रीनगर नगर निगम के 3 वॉर्डों में वोटिंग कराई जा रही है। इन सभी हिस्सों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच मतदान कराया जा रहा है।

जम्मू शहर में 4 लाख से अधिक मतदाता
इनमें जम्मू जोन के 1000, कश्मीर जोन के 138 और लद्दाख के कुल 66 उम्मीदवार शामिल हैं। चुनाव आयोग के अनुसार पहले चरण में जम्मू शहर के 247 वॉर्डों में वोटिंग हो रही है, जिसके लिए 4 लाख से अधिक मतदाताओं को फोटो युक्त मतदाता पहचान पत्र जारी किए गए हैं। इसके अलावा कश्मीर में 149 और लद्दाख के कुल 26 वॉर्ड में पहले चरण का मतदान कराया जा रहा है। इन चुनावों में सुरक्षा के लिए सेना, सीआरपीएफ, सीमा सुरक्षा बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस के करीब 15 हजार जवानों को अलग-अलग पोलिंग स्टेशनों पर तैनात किया गया है। इसके अलावा तमाम हिस्सों में ड्रोन कैमरों से मतदान केंद्रों की निगरानी की जा रही है।

उमर फारूक नजरबंद, कड़ी सुरक्षा में उम्मीदवार
प्रशासन ने उम्मीदवारों को सुरक्षित जगहों पर रखा है और भयमुक्त चुनाव कराने का दावा किया है। उधर, चुनावों का बहिष्कार करने वाले हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नरमपंथी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक को पुलिस ने नजरबंद कर दिया है। बता दें कि 10 अक्टूबर को दूसरे चरण में 384 वार्ड, तीसरे चरण में 13 अक्टूबर को 207 वार्ड, और 16 अक्टूबर को आखिरी चरण में 132 वार्डों में वोट डाले जाएंगे। मतगणना 20 अक्टूबर को होगी। जम्मू और श्रीनगर नगर निगमों समेत प्रदेश में कुल 1,145 वार्डों के लिए चार चरणों में होने वाले चुनाव के लिए 2,990 उम्मीदवार मैदान में हैं। जम्मू क्षेत्र से कुल 2,137 उम्मीदवार मैदान में हैं जबकि श्रीनगर से 787 उम्मीदवार और लद्दाख क्षेत्र से 66 उम्मीदवार मैदान में हैं। कश्मीर घाटी में 231 और जम्मू में 13 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।

मुख्य पार्टियों का बहिष्कार
राज्य की दो प्रमुख पार्टियों नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के चुनावों का किया है। इसके अलावा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, हाकिम यासीन के नेतृत्व वाले पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) और गुलाम हसन मीर की अध्यक्षता वाली डेमोक्रेटिक पार्टी नैशनलिस्ट (डीपीएन) समेत मुख्य राजनीतिक दलों ने भी इन चुनावों से अलग रहने का फैसला किया है।

संवेदनशील जिलों में इंटरनेट सेवाओं पर रोक
इसके अलावा प्रदेश के तमाम संवेदनशील जिलों में इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाई गई है। निकाय चुनाव के दौरान घाटी में किसी बड़े आतंकी हमले की आशंका में सैन्य प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। इसके अलावा श्रीनगर समेत तमाम जिलों में सुरक्षा ड्यूटी के लिए सीआरपीएफ, सीमा सुरक्षा बल, सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। साथ ही जम्मू, श्रीनगर, अनंतनाग, बारामुला, शोपियां और पुलवामा जिलों में वाहनों की चेकिंग के लिए पुलिस नाके लगाए गए हैं।

मीरवाइज उमर फारूक को किया नजरबंद
जम्मू कश्मीर में शहरी स्थानीय निकाय के पहले चरण के चुनाव से पहले हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नरमपंथी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक को रविवार को नजरबंद कर दिया गया। इससे पहले पुलिस ने दो अक्टूबर को जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक को एहतियाती तौर पर हिरासत में ले लिया था। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के प्रमुख सैयद अली शाह गिलानी की नजरबंदी जारी रहेगी।

अलगाववादी नेताओं ने किया है बहिष्कार
फारूक ने ट्वीट किया, ‘नजरबंद हूं। चुनाव की विचित्र लोकतांत्रिक प्रक्रिया चल रही है। बड़ी संख्या में बल तैनात किए गए हैं। पीएसए लगाने, लोगों को कैद और नजरबंद करने, छापेमारी करने, पाबंदियां लगाने और इंटरनेट पर रोक लगाने की प्रक्रिया तेज हुई है। यह जिक्र नहीं करना चाहिए कि उम्मीदवार नामालूम हैं और जनता हैरान है। लोकतंत्र का क्या मजाक उड़ाया जा रहा है।’ तीनों अलगाववादी नेताओं ने सोमवार से शुरू हो रहे चुनावों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है।

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