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गुजरात दंगे: पीएम मोदी को क्लीन चिट के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में टली सुनवाई

नई दिल्ली: 

साल 2002 के गुजरात दंगों के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य लोगों को क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई टल गई. सुप्रीम कोर्ट अब इस याचिका पर अगले साल जनवरी के तीसरे हफ्ते में सुनवाई करेगा. याचिकाकर्ता की और से इस संबध में और दस्तावेज दाखिल करने के लिए वक्त मांगा था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टालने का फैसला किया.

पिछले साल गुजरात हाई कोर्ट ने गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार मामले में एसआइटी द्वारा मोदी और अन्य को क्लीन चिट दिए जाने के फैसले को बरकरार रखा था. इसके साथ ही कोर्ट ने जकिया जाफरी और तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका को खारिज कर दिया था. साथ ही उन्हें आगे की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्देश दिया था. जकिया ने पांच अक्टूबर, 2017 के गुजरात हाई कोर्ट के इस फैसले को खारिज करने की अपील सुप्रीम कोर्ट में की थी.

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 गौरतलब है कि पांच अक्तूबर 2017 को  गुजरात हाईकोर्ट ने साफ किया था कि गुजरात दंगों की दोबारा जांच नहीं होगी. जकिया जाफरी की बड़ी साजिश वाली बात से भी हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया था. हालांकि, कोर्ट ने उनसे कहा था कि अगर वे चाहती हैं तो आगे अपील कर सकती हैं.

कोर्ट में दाखिल याचिका में साल 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य को विशेष जांच दल द्वारा दी गई क्लीन चिट को बरकरार रखने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी. जकिया जाफरी दिवंगत पूर्व सांसद अहसान जाफरी की पत्नी हैं. उन्होंने और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ ‘सिटीजन फार जस्टिस एंड पीस’ ने दंगों के पीछे ‘‘बड़ी आपराधिक साजिश” के आरोपों के संबंध में पीएम मोदी और अन्य को एसआईटी द्वारा दी गई क्लीन चिट को बरकरार रखने के मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ आपराधिक पुनर्विचार याचिका दायर की थी.

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वहीं इसके अलावा 2002 से 2006 के बीच गुजरात में हुए 22 एनकाउंटरों को फर्जी बताने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी एक हफ्ता के लिए टल गई है. पत्रकार बीजी वर्गीज और गीतकार जावेद अख्तर की याचिका ने याचिका दाखिल की थी. 16 मामलों की समीक्षा रिपोर्ट कोर्ट में जमा हो चुकी है. याचिकाकर्ता कॉपी चाहते हैं. अब गुजरात सरकार मांग पर जवाब देगी. याचिका में इन एनकाउंटर की जांच करने की मांग की गई थी और कहा गया था कि बेगुनाह लोगों को आतंकवादी बताकर मार दिया गया. इसी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए पैनल का गठन किया था.

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