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एफएआईएफए ने तंबाकू किसानों के लिए तत्काल राहत पैकेज की मांग की क्योंकि 4400 करोड़ रुपये की फसलें खेतों में बिना बिके खड़ी हैं

• स्टोर में पड़े 1700 करोड़ रुपये की करीब 13 करोड़ किलोग्राम पलू क्योर्ड तंबाकू की नीलामी को तत्काल प्रारंभ कराने की मांग; गुणवत्ता बिगड़ने के कारण किसानों को 200 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान

• किसान अपना उत्पाद बेच नहीं पा रहे हैं, इसलिए गुजरात में 2700 करोड़ रुपये की 33 करोड़ किलोग्राम तंबाकू खुले आसमान के नीचे पड़ी है

• सरकार से प्रत्येक रजिस्टर्ड तंबाकू उत्पादक किसानों को 25,000 रुपये की राहत राशि देने और फसल लोन को री-शेड्यूल करने की अपील

• उबारने के लिए की गई यह मांग पूरी नहीं होने से नीलामी की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी और किसानों की आय कम होगी, जिससे मुख्य तौर पर तंबाकू उत्पादों की आय पर निर्भर रहने वाले आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे सूखा संभावित क्षेत्रों के छोटे व हाशिए पर जी रहे किसानों की आजीविका पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा

• सिगरेट पर टैक्स अस्थायी रूप से कम करने की अपील, क्योंकि लंबे लॉकडाउन के चलते एफसीवी तंबाकू की मांग बहुत तेजी से गिरी है

नई दिल्ली : आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात आदि राज्यों में वाणिज्यिक फसलों के लाखों किसानों और खेत श्रमिकों के हितों के लिए प्रतिनिधि गैर-लाभकारी संगठन फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस (एफएआईएफए) ने आज भारत सरकार से मौजूदा महामारी की परिस्थिति में उनकी आजीविका की रक्षा की अपील की है क्योंकि लंबे लॉकडाउन के कारण सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री में आई कमी के कारण उनकी फसलों की मांग कमजोर पड़ गई है।

एफसीवी तंबाकू उत्पादकों को अपनी फसल बेचने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है और साथ ही लॉकडाउन के कारण नीलामी में आई बाधा के चलते श्रम एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर की बढ़ी हुई लागत भी चुकानी पड़ रही है। इस समय नीलामी की प्रक्रिया धीमी पड़ जाने के कारण करीब 1700 करोड़ रुपये मूल्य की 13 करोड़ किलोग्राम फ्लू क्योर्ड तंबाकू बिना बिके पड़ी है, जिससे इनकी गुणवत्ता खराब होती जा रही है।

गुजरात के किसान जिनके तंबाकू का इस्तेमाल बीड़ी व अन्य तंबाकू उत्पादों में होता है, वे भी अपनी आजीविका बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 2700 करोड़ रुपये मूल्य की 33 करोड़ किलोग्राम से ज्यादा की तंबाकू वहां खेतों में खुले आसमान के नीचे पड़ी है, क्योंकि सरकार की ओर से तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक के कारण व्यापारी इन उत्पादों को उठाने के लिए तैयार नहीं हैं। आने वाले दिनों में बारिश की भी आशंका है और अगर सरकार ने तंबाकू उत्पादों की बिक्री शुरू नहीं की तो व्यापारी और किसान दोनों दिवालिया हो जाएंगे। गुजरात में आणंद, खेड़ा, वडोदरा, पंचमहल, बनासकांठा और साबरकांठा आदि कई जिलों में तंबाकू उत्पादन होता है।

किसानों ने सिगरेट पर कराधान को भी जीएसटी लागू होने से पहले के स्तर पर करने की अपील की है, जिससे घरेलू वैध सिगरेट उद्योग में मांग बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह उद्योग एक्साइज ड्यूटी और कंपनसेशन सेस में लगातार बढ़ोतरी के कारण भारी भरकम कराधान से जूझ रहा है। किसानों को एक और झटका देते हुए भारत सरकार ने तंबाकू निर्यात में मिलने वाले इन्सेंटिव को भी रोक दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में भारत और भी कम प्रतिस्पर्धी हो गया है; वहीं जिंबाब्वे, मालावी आदि देश इन्सेंटिव और सब्सिडी के जरिये अपने तंबाकू किसानों को प्रोत्साहन दे रहे हैं।

सर्दियों के एफसीवी उत्पाद के लिए आमतौर पर मार्च में नीलामी शुरू हो जाती है और आंध्र प्रदेश में किसानों ने 2019 में औसतन 121. 51 रुपये प्रति किलो पर अपनी फसल बेची थीइस साल लॉकडाउन के कारण बाजार में सिगरेट का स्टॉक बढ़ने और निर्यात के लिए माल जाने में हो रही देरी के कारण व्यापारियों और विनिर्माताओं की ओर से मांग बहुत कमजोर हो गई है। 95 प्रतिशत से ज्यादा फसल बिकने का इंतजार कर रही है और आंध्र प्रदेश के तंबाकू किसानों को गुणवत्ता खराब हो जाने और वजन कम हो जाने के कारण 200 करोड़ रुपये के अतिरिक्त नुकसान की आशंका सता रही है।

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस (एफएआईएफए) के प्रेसिडेंट श्री जावरे गौड़ा ने कहा, “हम सरकार से तत्काल सभी तंबाकू नीलामी प्लेटफॉर्म से नीलामी शुरू कराने की अपील करते हैं। सरकार को तंबाकू बोर्ड एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश देना चाहिए कि वे एफसीवी तंबाकू के विनिर्माताओं, निर्यातकों और व्यापारियों के साथ मिलकर काम करें और आंध्र प्रदेश व कर्नाटक में एफसीवी तंबाकू उत्पादों के लिए नीलामी में उचित मूल्य (कोविड-19 आपदा से पहले वाली कीमत) सुनिश्चित करें। एफसीवी तंबाकू किसान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, इसलिए हम भारत सरकार से तत्काल प्रत्येक रजिस्टर्ड एफसीवी तंबाकू उत्पादक के लिए 25,000 रुपये की राहत राशि जारी करने की मांग करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मौजूदा हालात में तंबाकू किसानों को राहत पैकेज नहीं देने से इनमें से कई किसान कर्ज के जाल में फंस जाएंगे, जिससे हाशिए पर जी रहे किसानों, श्रमिकों और इन उत्पादों की देखरेख व परिवहन से जुड़ी व्यवस्थाओं में रोजगार पाए लोगों की पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी और किसान गलत कदम उठाने को मजबूर हो जाएंगे।”

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस (एफएआईएफए) के जनरल सेक्रेटरी श्री मुरली बाबु ने कहा, “हम माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) और राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के साथ मिलकर अगले 2-3 सत्र के लिए फसल लोन को रीशेड्यूल करने और किसानों को प्रत्येक सीजन में 30-30 प्रतिशत लोन चुकाने की अनुमति देने की मांग करते हैं और साथ ही नियमित तौर पर मिलने वाले सीजनल लोन को भी जारी रखने की अपील करते हैं। इस फैसले से लाखों एफसीवी तंबाकू किसानों, उनके परिवारों और इस उद्योग पर निर्भर कामगारों को फायदा होगा, जो गैर संस्थागत लोन के कारण पहले से ही भारी भरकम ब्याज के बोझ से दबे हैं।”

एफएआईएफए ने 2020-21 के लिए एक व्यापक एफसीवी तंबाकू उत्पादन योजना तैयार करने की भी मांग की है। कोविङ-19 के कारण पैदा हुए अवसर को ध्यान में रखते हुए तंबाकू बोर्ड को भारतीय निर्यात में बढ़ोतरी की दिशा में ज्यादा प्रयास करना चाहिए। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय ट्रेंड को देखते हुए यह जरूरी है कि व्यापारियों के वास्तविक संकेतों के अनुरूप घरेलू /निर्यात बाजार की मांग का आकलन करते हुए अगले सीजन के लिए एक एक्शन प्लान तैयार किया जाए।

मौजूदा हालात में हम भारत सरकार से करबद्ध निवेदन करते हैं कि हमारी मांगों को माने और हमारी आजीविका की रक्षा करे।

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