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लखनऊ
राजधानी की पहली हाईटेक टाउनशिप सुशांत गोल्फ सिटी में घर व दुकान खरीदारों को बड़ी राहत देने वाली खबर है। यह अहम परियोजना अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के हाथ होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में एलडीए को हाईटेक टाउनशिप टेकओवर करने पर मुहर लग गई है। इतना ही नहीं सरकार विकास कार्य व देनदारियों के लिए 2912 करोड़ रुपये की धनराशि भी देगी।
मेसर्स अंसल प्रापर्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर (अंसल एपीआइ) की अधूरी आवासीय परियोजना को लेकर पिछले डेढ़ साल से उहापोह का माहौल रहा। राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले की सुनवाई हुई। अब खरीदारों को राहत देने का रास्ता प्रदेश सरकार ने निकाला है।
अधूरी परियोजना को पूरा कराने का विस्तृत प्रस्ताव एलडीए ने तैयार किया। उसी प्रस्ताव पर कैबिनेट में मंथन करने के बाद निर्णय लिया गया कि हाईटेक टाउनशिप के तहत अंसल एपीआइ को लाइसेंस दिया गया था, अब स्वीकृत परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण टेकओवर करते हुए उसे पूरा कराने का प्रस्ताव एनसीएलटी के समक्ष प्रस्तुत करे।
यह भी चर्चा हुई कि प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस परियोजना की अधिकतम देनदारी करीब 2912 करोड़ रुपये है, लेकिन इसकी वास्तविक देयता सीआइआरपी यानि कारपोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया से ही तय होगी।
देनदारियों के भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि प्राधिकरण को सीड कैपिटल यानि शुरुआती धन दिया जाएगा। एलडीए के टेकओवर करने से होम बायर्स में विश्वास पैदा होगा। रियल एस्टेट क्षेत्र व निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार का सृजन तेजी से बढ़ेगा।
यह होंगे तत्काल लाभ
इस कदम से 5000 होम बायर्स यानि घर-दुकान खरीदारों की समस्या का समाधान हो सकेगा। साथ ही टाउनशिप की शेष अवस्थापना सुविधाओं व उपयोगिताओं का विकास संभव होगा।
बंधक व ग्राम समाज की भूमि किसी तीसरे पक्ष को देने की जगह अब लखनऊ विकास प्राधिकरण को दी जाएगी, ताकि सरकार के भूमि की रक्षा होगी और भविष्य में शासकीय विभागों की देनदारियां पूरी की जा सकेंगी। परियोजना पूरी होने से शहर का सुनियोजित विकास होगा। अब फिर से परियोजना में विकास कार्य शुरू होंगे।
यह है मामला
अंसल एपीआइ ने आइएल एंड एफएस फाइनेंशियल सर्विसेज से मार्च 2016 में 50 करोड़ और नवंबर 2016 में 100 करोड़ रुपये ऋण लिया था, खाता एनपीए होने से ब्याज सहित बकाया बकाया 257 करोड़ रुपये पहुंचने पर फाइनेंस कंपनी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) में याचिका दाखिल की थी।
एनसीएलटी ने 25 फरवरी 2025 को अंसल ग्रुप को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए आइआरपी (रिसीवर) नवनीत कुमार गुप्ता को नियुक्त किया था। यह आदेश को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में होम बायर्स ने चुनौती दी।
एनसीएलएटी ने होम बायर्स का पक्ष स्वीकार करके एनसीएलटी में एलडीए का पक्ष सुनने का आदेश दिया। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई लेकिन, शीर्ष कोर्ट ने एनसीएलएटी के आदेश को सही माना। एनसीएलटी में अब 23 सितंबर को सुनवाई होनी है।
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