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हरियाणा में आज स्वास्थ्य से जुड़े तीन महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों का शुभारंभ किया गया

चंडीगढ़ : हरियाणा में आज स्वास्थ्य से जुड़े तीन महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों का शुभारंभ किया गया, जिनमें स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए एनफ्लूएंजा-ए एच1एन1 टीकाकरण अभियान, राष्ट्रीय वायरल हैपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत हैपेटाइटिस-बी नियंत्रण कार्यक्रम और प्रदेश के 21 जिला अस्पतालों में नेत्रदान केंद्रों की शुरुआत शामिल है। इसके साथ ही, अब राज्य के सभी नागरिकों के लिए हैपेटाइटिस-बी की जांच, निदान और उपचार मुफ्त उपलब्ध होगा।

स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने इन तीनों कार्यक्रमों का शुभारंभ करने उपरांत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों के सिविल सर्जनों और अस्पतालों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस बात का पता लगाया जाना चाहिए कि प्रदेश में कितने प्रतिशत आबादी हैपेटाइटिस-बी से पीडि़त है और इससे निपटने के लिए एक वर्क प्लान तैयार किया जाना चाहिए।

श्री अरोड़ा ने कहा कि हैपेटाइटिस-बी नियंत्रण कार्यक्रम के प्रथम चरण में नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों को कवर किया जाना चाहिए। साथ ही, इसे सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे जिलों में लागू किया किया जाए। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में हैपेटाइटिस-बी जांच सुविधा बढ़ाई जाए और ज्यादा प्रभावित जिलों में ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच की जाए। उन्होंने कहा कि आगामी अगस्त माह से हैपेटाइटिस-बी और दृष्टिहीनता और दृष्य दुर्बलता (विजुअल इंपेयरमेंट)नियंत्रण कार्यक्रम की विस्तृत कार्य योजना बनाकर इन दोनों कार्यक्रमों को विधिवत रूप से लागू किया जाएगा। उन्होंने कि कोरोना महामारी के कारण स्वास्थ्य विभाग मुख्य भूमिका में आ गया है और स्वास्थ्य के प्रति जनसाधारण में जागरूकता बढ़ी है। इसलिए इस समय जो मोबिलाइजेशन हुई है, हमें अपने कार्यक्रमों के लक्ष्य हासिल करने में उसका उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत में, 2016 के बाद से लगभग 85,000 व्यक्ति एनफ्लूएंजा-ए एच1एन1 वायरस से संक्रमित हो रहे हैं और पिछले कुछ वर्षों में 4900 मौतें हुई हैं। भारत में यह आमतौर पर जनवरी-मार्च तथा मानसून के बाद अगस्त से अक्तूबर तक चरम पर होता है। यह संक्रमण मुख्य रूप से खांसी, छींक की बूंदों या ऐसी किसी वस्तु को छूने से फैलता है जिस पर छींक की बूंदें लगी हुई हों। यह किसी भी आयु और लिंग को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता उच्च जोखिम वाली श्रेणी में आते हैं, इसलिए इन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। पूरे राज्य में लगभग 13,000 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को अभियान के तौर पर टीका लगाया जाएगा। इसके लिए जिस वैक्सीन का उपयोग करने की योजना बनाई गई है, वह सिंगल डोज वैक्सीन है और एक वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी है। उन्होंने बताया कि राज्य में पहले से ही सभी 22 जिलों में एनफ्लूएंजा-ए एच1एन1 की मुफ्त जांच, निदान और उपचार की सेवाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। उन्होंने एनफ्लूएंजा-ए एच1एन1 और कोरोना आदि जैसे संक्रमणों से निपटने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा पर भी बल दिया।

राजीव अरोड़ा ने बताया कि हैपेटाइटिस लीवर से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। उन्होंने आगे बताया कि हरियाणा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुसार 2030 तक हैपेटाइटिस-सी के उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है और हैपेटाइटिस-बी और सी से संबंधित रोगों की संख्या और मृत्यु दर को कम करने के लिए और इसे हासिल करने के लिए 2020-2021 में आईसीटीसी और एआरटी केंद्रों में उच्च जोखिम समूह (एचआरजी) सहित प्रदेश में 4 लाख लोगों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और राज्य में सभी संक्रमित रोगियों का मुफ्त इलाज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एनवीएचसीपी कार्यक्रम के तहत राज्य में पहले से ही सभी 22 जिला नागरिक अस्पतालों और राज्य की सभी जेलों, जिन्हें उपचार केंद्रों के तौर पर नामित किया गया है, में हैपेटाइटिस-सी की मुफ्त जांच, निदान और उपचार सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। राज्य में हैपेटाइटिस-बी से पीडि़त रोगियों को भी अब वही सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

राजीव अरोड़ा ने बताया कि आज दृष्टिहीनता और दृष्य दुर्बलता के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीबी एंड वीआई) के तहत प्रदेश के 21 जिला अस्पतालों में स्थापित नेत्रदान केंद्रों का भी शुभारंभ किया गया है। उन्होंने बताया कि एनपीसीबी एंड वीआई कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हरियाणा में रोकथाम योग्य दृष्टिहीनता को कम करना, आंखों की देखभाल पर सामुदायिक जागरूकता बढ़ाना और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं और मेडिकल कॉलेजों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश से कॉर्नियल ब्लाइंडनेस बैकलॉग को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नेत्रदान के महत्व पर बल देते हुए जनसाधारण को इस नेक काम के लिए आगे आने का आह्वान करते हुए कहा कि रोकथाम योग्य दृष्टिïहीनता में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों और निजी चिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि कमल, खानपुर और मेवात मेडिकल कॉलेजों में जल्द ही तीन नए ‘आई बैंक’ शुरू किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए राज्य के सभी 68 नेत्र सहायकों को कॉर्निया संग्रह में प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान के लिए कोई भी व्यक्ति टोल फ्री नंबर 108 पर फोन कर सकता है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक प्रभजोत सिंह, महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सूरजभान कंबोज और निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. उषा गुप्ता समेत विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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