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भोपाल
राजधानी भोपाल के न्यू मार्केट में कपड़ा, ज्वैलर्स समेत करीब 900 दुकानों के बीच भटि्टयां भी सुलग रही हैं। जिस छोले-भटूरे की दुकान में 8 अक्टूबर को भीषण आग लगी, वहां से सिर्फ 50 फीट दूर ही 3 दुकानें और हैं। यहां खतरे के बीच ही भटूरे तले जा रहे हैं।
जांच में खुलासा हुआ कि इन दुकानों पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। दुकान की न तो फायर और न ही इलेक्ट्रिक एनओसी है। फायर एक्सटिंग्विशर जरूर हैं, लेकिन कोने में रखे हैं। यदि आग लग जाए तो इन्हें चलाने के लिए कर्मचारी भी प्रशिक्षत नहीं है।
ये खामियां मिलीं…
कलकत्ता छोले-भटूरे: जिस जगह पर छोले तले जा रहे, उसके ऊपर ही धूप से बचने के लिए रिट्रैक्टेबल अवनिंग लगी है। जरूरत के हिसाब से इसे खोल और बंद कर सकते हैं। यहां आग बुझाने के लिए एक्सटिंग्विशर तो है, लेकिन इन्हें चलाना नहीं आता।
देहली के छोले-भटूरे: यहां किचन इतना छोटा है कि 2 कर्मचारी मुश्किल से बैठकर भटूरे तलते हैं। ऐसे में आग लग जाए तो कर्मचारी निकल ही नहीं सकते। बिजली के तार भी खुले हुए हैं।
पंजाब छोले-भटूरे: फायर और इलेक्ट्रिक एनओसी नहीं मिली। कई जगहों से बिजली के तार खुले मिले। फायर एक्सटिंग्विशर तो है, लेकिन कोने में रखे हैं।
अब शिफ्टिंग पर जोर
फायर ऑफिसर सौरभ पटेल ने बताया कि दुकान में अग्निशामक यंत्र होने चाहिए। कर्मशियल सिलेंडर ही होना चाहिए। भटि्टयां नहीं होना चाहिए। जांच में सामने आया कि भटि्टयां पाई गईं। देहली के छोले-भटूरे में ऊंचाई पर बैठकर कर्मचारी भटूरे तलते हुए मिला। इलेक्ट्रिक सर्टिफिकेट किसी के पास नहीं है। बिजली के तार भी खुले ही पड़े हैं। इन सभी खामियों के चलते दुकानों को शिफ्ट करने का प्लान है।
8 अक्टूबर को लगी थी भीषण आग
बालाजी छोटे भटूरे दुकान में 8 अक्टूबर को भीषण आग लगी थी। आग ने पास की 5 बड़ी दुकानों और 12 से ज्यादा रेहड़ियों को चपेट में ले लिया था। इससे करोड़ों रुपए का नुकसान हो गया। जिस जगह आगजनी हुई थी, उससे 100 फीट की दूरी पर ही दो और छोले भटूरे की दुकानें खुली हुई है। इसके पास में दो से तीन नमकीन दुकानें भी हैं। जहां पर सुबह से रात तक भट्टी जलती है। ऐसे में फिर से हादसा होने की संभावना है।
लापरवाही पर हो चुकी FIR
8 अक्टूबर को बालाजी छोला भटूरे दुकान में आग लगी थी और इसके बाद पास की अन्य दुकानें भी चपेट में आ गई थीं। इस मामले में टीटी नगर पुलिस ने आम्रपाली रेस्टोरेंट के संचालक पवन अग्रवाल की शिकायत पर छोला भटूरे की दुकान के संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के विरुद्ध केस दर्ज किया है।
जांच में सामने आया कि बालाजी छोला-भटूरा दुकान में भट्टी जल रही थी। इसके पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैल गईं और देखते ही देखते आसपास की दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। हादसे में आम्रपाली रेस्टोरेंट, विजय स्टोर, एक कैफे और मोबाइल दुकान को नुकसान हुआ था। घटना के बाद ने पुलिस को शिकायत की थी।
थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर ने बताया कि आग लगने की शुरुआत भट्टी के पास रखे कपड़े से हुई थी। अब मामले में दुकान संचालक की लापरवाही को लेकर कार्रवाई की गई है। दूसरी ओर, दुकान में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं? इसकी पड़ताल नगर निगम कर रहा है। अग्नि सुरक्षा के इंतजामों की जांच के बाद इस पहलू पर स्थिति स्पष्ट होगी।
चौक बाजार में 22 लाख का सिस्टम, पर हादसे के वक्त काम नहीं करता
जानकारी के अनुसार चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की 10 से 12 फीट चौड़ी गलियों में आग बुझाने के लिए निगम ने 22 लाख रुपए का अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया था। जुलाई 2026 में नेमा डिजाइनर स्टूडियो में आग लगने के दौरान यह सिस्टम काम नहीं आया। इसकी प्रेशर टेस्टिंग और मेंटेनेंस नहीं होने की बातें सामने आई हैं।
शहर के जुमेराती, इब्राहिमपुरा, नदीम रोड, घोड़ा नक्कास समेत 8 प्रमुख बाजारों में भी यही स्थिति है। आग लगने या हादसे के बाद सुरक्षा इंतजाम होते हैं, लेकिन नियमित जांच नहीं होती।
बैरागढ़ में दिखावे का सिस्टम
17 दिसंबर 2017 को संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 100 से ज्यादा कपड़ा दुकानें जलकर खाक हो गई थीं। इसके बाद होज-रील पाइप, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर और फायर वाटर पंप लगाने के निर्देश मिले। सिस्टम लगा, लेकिन देखरेख नहीं हुई। उपकरण जंग खा रहे हैं। मेन कॉरिडोर तक कब्जे हैं। यहां कभी मॉकड्रिल तक नहीं हुई।
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