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मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के बाद पुजारी महासंघ की CM मोहन यादव से बड़ी मांग

dainikaamsabha:

उज्जैन
 मंदिरों की पवित्रता, धार्मिक परंपराओं और गर्भगृह की मर्यादाओं को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. मद्रास हाई कोर्ट के उस निर्णय का अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने स्वागत किया है, जिसमें मंदिरों को पर्यटन स्थल के बजाय धार्मिक आस्था का केंद्र मानते हुए रीति रिवाजों और परंपराओं का सम्मान करने पर जोर दिया गया है। 

महासंघ ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की है कि प्रदेश के सभी शासकीय और अशासकीय मंदिरों के लिए एक समान आचार संहिता लागू की जाए. साथ ही मंदिरों की मर्यादा भंग करने वालों के प्रवेश पर प्रतिबंध और पुजारियों की सुरक्षा के लिए अलग कानून बनाया जाए। 

'मंदिर की परंपराओं और नियमों का सख्ती से हो पालन'
महासंघ की मांग केवल गैर हिंदुओं तक सीमित नहीं है. अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश गुरु का कहना है, "मंदिर की परंपराओं और नियमों का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति चाहे किसी धर्म या वर्ग का हो उसके खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए. यहां तक की सनातन धर्म को मानने वाले लोगों और साधु-संतों को भी मंदिर के निर्धारित नियमों का पालन करना चाहिए। 

महासंघ ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई प्रमुख मंदिरों में गर्भगृह की मर्यादा और निर्धारित वेशभूषा संबंधी नियमों का उल्लंघन हो रहा है. उज्जैन के महाकालेश्वर, काल भैरव, हरसिद्धि, गढ़कालिका जैसे प्रसिद्ध मंदिरों का उदाहरण देते हुए संगठन ने व्यवस्थाओं को सख्ती से लागू करने की मांग की है। 

पुजारी सुरक्षा अधिनियम की मांग
महासंघ ने ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में पुजारियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया. संगठन के सचिव रूपेश मेहता ने बताया, "कई स्थानों पर मंदिर परिसर में ताश, जुआ, बीड़ी सिगरेट जैसी गतिविधियां भी होती हैं. पुजारी द्वारा रोकने पर उनके साथ अभद्रता और मारपीट की घटनाएं सामने आती हैं. कुछ मामलों में पुजारियों की हत्या तक हो जाती है. ऐसे में पुजारियों को कानूनी संरक्षण देने के लिए मध्य प्रदेश में पुजारी सुरक्षा अधिनियम लागू करने की मांग की गई है। 

'मद्रास हाईकोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य'
अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश गुरु का कहना है, "मंदिर की पवित्रता, मर्यादा और परंपरा अक्षुण्ण रहना चाहिए. मद्रास हाईकोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य है. मंदिर धर्मस्थल हैं पर्यटन स्थल नहीं. वहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मंदिर के रीति रिवाजों और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। 

पुजारी महासंघ की मांग है, मध्य प्रदेश में भी ऐसी व्यवस्था लागू हो जिससे मंदिर की मर्यादा भंग करने वाले किसी भी व्यक्ति पर कार्रवाई हो सके. चाहे वह गैर हिंदू हो या सनातन धर्म को मानने वाला व्यक्ति. कई बार सनातन धर्म के रक्षक माने जाने वाले साधु संत भी मंदिरों की निर्धारित परंपराओं का पालन नहीं करते. महाकाल मंदिर में निर्धारित नियमों के बावजूद कुछ लोग उनका उल्लंघन करते हैं. मंदिर प्रबंधन और अधिकारियों से शिकायत के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं है, अब मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। 

महासंघ की प्रमुख मांगे

    प्रदेश के सभी शासकीय एवं अशासकीय मंदिरों के लिए एक समान आचार संहिता.

    मंदिरों की धार्मिक परंपराओं के साथ निर्धारित वेशभूषा और गर्भगृह की मर्यादा का अनिवार्य पालन.

    नियम तोड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई और आवश्यकतानुसार प्रवेश प्रतिबंध.

    मंदिर परिसरों में अनुचित गतिविधियों पर रोक और मंदिर प्रबंधन की जवाबदेही तय करना.

    पुजारियों की सुरक्षा सम्मान और कानूनी संरक्षण के लिए पुजारी सुरक्षा अधिनियम लागू करना.