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चंदेरी / लोगों को लुभा रहा है, चंदेरी के पहाड़ों से गिरते हुए झरने, राजघाट का विहंगम दृश्य

आम सभा, विशाल सोनी, चंदेरी। प्रकृति की गोद में बसा चंदेरी वारिस के मौसम में किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यह वर्षाकाल में शिमला नैनीताल से कम नहीं है। बस इसके आनंद की लेने की जरूरत है। इस प्राकृतिक आनंद को लेने के लिए कई प्रकृति प्रेमी भी इन दिनों चंदेरी में देखे जा सकते हैं चंदेरी में प्राकृतिक झरनों से इस समय चारों तरफ जलप्रपात का विहंगम दृश्य ही नजर आ रहा है। जैसे मालन खो, कटौती खो,सूखा झोरा, राजघाट बांध आदि देखने लायक ओर वारिस के आनंद के लिए आनंददायक स्थल है।

चंदेरी को इसीलिए चंदा के आकार लिए हुए कहा जाता है जो इस वर्षाकाल में प्रकृति प्रेमियों को आनंददायक अनुभूति करा रही हैं। ऐसे ओर भी कई स्थान हैं जो वर्षाकाल में पानी पहाड़ों से गिरते हुए नजर आता है। इन जल प्रपात के साथ साथ चंदेरी क्षेत्र में मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश सीमा पर रानी लक्ष्मीबाई राजघाट बांध भी इस बर्षाकाल में लबालब भरा हुआ है। भोपाल के बड़े तालाब से बेतबा नदी जुड़ी हुई है। भोपाल विदिशा में भारी बारिश होने के कारण बेतबा नदी पर बना रानी लक्ष्मीबाई राजघाट बांध बना हुआ है जो यहां लबालब भरा हुआ है, पानी बांध में अधिक आ जाने से इस बांध के गेट भी रात में खोल दिए जाते हैं। आज भी बांध के दस गेट खोल दिए हैं जिससे ललितपुर जाने वाले मार्ग का संपर्क कटा हुआ है। यहां पर भी लोगों का आना और यहां कि प्रकृति का आनंद ले रहे हैं।

जल प्रपात पर पहुंच मार्ग की हालत खराब

इन स्थलो पर जाने के लिए मार्गों कि हालत बहुत ही खराब है। इन स्थान पर जाने के लिए आपको पैदल ही चल कर जाना पड़ता है। चंदेरी का सबसे दर्शनीय जलप्रपात व सिद्ध स्थान मालन खो के मार्ग की हालत इतनी दयनीय है वहां वाहन तो पहुंच ही नहीं पा रहा है। कोशक महल के पास से मालन खो के जाने वाले मार्ग लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह मार्ग वन विभाग के अधीन होने के कारण इसका निर्माण नहीं हो पा रहा है।बस श्रृद्धालु ही पत्थर मुरम डाल कर ही मार्ग बना लेते हैं।

उस पर ही वनविभाग वाले मार्ग बनाने का मना करते हैं। इसलिए पहुंच मार्ग का रास्ता अभी वर्षाकाल में पैदल ही जाना पड़ता है। इसके बाद भी सबसे अधिक सैलानी मालन खो पर जातें। अन्य दर्शनीय जल प्रपात भी वनविभाग के अधीन होने के कारण जर्जर हालत में है। वन विभाग न तो स्वयं यह मार्ग बना रहा और ना ही किसी विभाग को बनाने देता। जबकि इन दर्शनीय रमणीय स्थल पर पहुंच मार्ग होना बहुत आवश्यक है।

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