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फ्रांस में शमोंडा वायरस से पहली मौत का दावा, जानिए कितना खतरनाक है यह वायरस

dainikaamsabha:

नई दिल्ली
जानवरों को बीमार करने वाला शमोंडा वायरस अब इंसानों में भी पहुंच गया है. फ्रांस में इस वायरस से संक्रमित एक मरीज की मौत हो गई है. यह पहली बार है जब किसी इंसान में इस वायरस का संक्रमण मिला है. मरीज का इलाज फ्रांस के लियोन शहर के एक अस्पताल में चल रहा था. वह पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहा था और उसके शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत भी काफी कम थी. इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जानवरों में फैलने वाला यह वायरस इंसानों के लिए कितना खतरनाक है। 

शमोंडा वायरस मुख्य रूप से गाय और दूसरे मवेशियों को बीमार करता है. यह मिज (Midge) नाम के छोटे कीड़ों के काटने से फैलता है. इस वायरस का पता पहली बार 1965 में नाइजीरिया में चला था. अब यह यूरोप के 12 से ज्यादा देशों में फैल चुका है. हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, फिलहाल इंसानों में इसके बड़े स्तर पर फैलने का खतरा कम है। 

क्या है शमोंडा वायरस?
शमोंडा वायरस एक ऐसा वायरस है जो ज्यादातर जानवरों को संक्रमित करता है. गायों में इससे बुखार, दस्त और दूध कम देने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. जब कोई संक्रमित मिज किसी जानवर को काटता है, तो यह वायरस उसके शरीर में पहुंच सकता है. इस वायरस का पता सबसे पहले 1965 में नाइजीरिया में गायों और दूसरे मवेशियों में चला था. इसके बाद अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में भी इसके मामले मिले। 

इस साल जुलाई के आखिर में पहली बार यूरोप में इस वायरस का पता चला. 20 अक्टूबर तक यूरोप के 12 से ज्यादा देशों में इसके मामले सामने आ चुके थे. इनमें फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और आयरलैंड भी शामिल हैं. इन देशों में बड़ी संख्या में मवेशी पाले जाते हैं. फ्रांस के अधिकारियों का मानना है कि यह वायरस देश में वसंत के मौसम से ही फैल रहा था। 

जानवरों को कैसे बीमार करता है यह वायरस?
शमोंडा वायरस का सबसे ज्यादा असर मवेशियों पर देखा गया है. गायों के अलावा भेड़, बकरी, घोड़े और अल्पाका जैसे जानवर भी इसकी चपेट में आ सकते हैं. संक्रमित जानवरों को बुखार और दस्त हो सकते हैं. गायें पहले के मुकाबले कम दूध देने लगती हैं. कुछ मामलों में गर्भवती जानवरों का गर्भपात भी हो सकता है। 

उनके पेट में पल रहे बच्चों के शरीर में भी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. कुछ घोड़ों में दिमाग और नसों से जुड़ी परेशानी भी देखी गई है. हालांकि, यूरोप में मिले वायरस के नए रूपों का जानवरों पर लंबे समय तक क्या असर होगा, यह अभी साफ नहीं है. इस बारे में और जानकारी जुटाने की जरूरत है। 

इंसानों के लिए कितना खतरनाक है शमोंडा वायरस?
फ्रांस में मिला मामला इस वायरस से इंसान के संक्रमित होने का पहला दर्ज मामला है. मरीज पहले से गंभीर बीमारी से पीड़ित था. उसके शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत भी काफी कम थी. फ्रांस के अधिकारियों को शक है कि मरीज को पूर्वी फ्रांस में एक संक्रमित मिज के काटने से यह वायरस हुआ था. इस इलाके में इस साल मवेशियों के बीच यह वायरस फैल चुका था। 

अधिकारियों के मुताबिक, मरीज के दिमाग में हुई परेशानी का संबंध शमोंडा वायरस से हो सकता है. हालांकि, मरीज की मौत और वायरस के संक्रमण के बीच संबंध की जांच अभी चल रही है. WHO के मुताबिक, अभी तक मिली जानकारी के आधार पर यह एक अकेला मामला है. फिलहाल इस वायरस के इंसानों में बड़े स्तर पर फैलने का खतरा कम है. लेकिन अभी इसके बारे में जानकारी कम है, इसलिए इसके खतरे को पूरी तरह समझने के लिए और जांच की जरूरत है। 

इस वायरस पर नजर रखना क्यों जरूरी है?
शमोंडा वायरस को WOAH की बीमारियों की सूची में शामिल नहीं किया गया है. इसलिए देशों के लिए इसके मामलों की जानकारी संगठन को देना जरूरी नहीं है. यूरोपीय संघ के नियमों में भी इस वायरस को शामिल नहीं किया गया है. इस वजह से इसके मामलों पर नजर रखने के लिए अलग से जरूरी व्यवस्था नहीं है। 

इसी कारण दुनिया के अलग-अलग देशों में इस वायरस से कितने जानवर संक्रमित हुए हैं, इसकी पूरी जानकारी मिलना मुश्किल है. इसके फैलने और जानवरों के साथ-साथ इंसानों पर पड़ने वाले असर को समझने के लिए और जानकारी की जरूरत है। 

फिलहाल इंसानों में इस वायरस के बड़े स्तर पर फैलने का खतरा कम है. यूरोप के कई देशों में मवेशियों के संक्रमित होने और पहली बार इंसान में इसका मामला मिलने के बाद इस वायरस पर नजर रखना जरूरी है।