Tuesday , October 20 2026
ताज़ा खबर
होम / राज्य / छत्तीसगढ / Jaggi murder case में Amit Jogi को राहत: Supreme Court of India ने सरेंडर पर लगाई रोक

Jaggi murder case में Amit Jogi को राहत: Supreme Court of India ने सरेंडर पर लगाई रोक

रायपुर.

एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए सीबीआई का जवाब आने तक सरेंडर पर रोक लगाई है. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के बेटे अमित जोगी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी.

बता दें कि एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में दो अप्रैल को हाई कोर्ट ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) सुप्रीमो अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया था. इस पर अमित जोगी ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. राम अवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने लल्लूराम डॉट कॉम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर टू में आज इस मामले में सुनवाई हुई. कोर्ट ने सीबीआई, स्टेट और उन्हें (सतीश जग्गी) तो नोटिस जारी किया है. सीबीआई का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी.

2007 में निचली अदालत ने किया बरी
एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की साल 2003 में हुई हत्या के मामले में निचली अदालत ने 2007 में 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन सबूतों का अभाव बताते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था. इस फैसले को पीड़ित के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया था. हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी माना और दोषी करार देते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया था.

2004 में सीबीआई ने शुरू की जांच
सतीश जग्गी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर जग्गी हत्याकांड का आरोप लगाया था. केस की जांच साल 2004 में सीबीआई को सौंपी गई थी. सीबीआई ने जांच के बाद करीब 11 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 31 लोगों को आरोपी बनाया गया. मई 2007 में स्पेशल कोर्ट ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. दो लोग सरकारी गवाह बन गए, जबकि सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था.