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मध्यप्रदेश में तीसरी लहर को जन-सहयोग के मॉडल से रोकेंगे – मुख्यमंत्री श्री चौहान

– मध्यप्रदेश में शासन के साथ इस युद्ध में साथ खड़ा है आमजन

– प्रदेश में कोविड संक्रमण के नियंत्रण, उपचार और प्रबंधन प्रयासों की हुई समीक्षा

– कलेक्टर्स से ली गई इंतजामों की जानकारी

– मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किया क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप से संवाद

– कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में टीकाकरण कार्य और संक्रमण नियंत्रण की होगी पुनः समीक्षा

आम सभा, भोपाल : मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कोविड के नियंत्रण में मध्यप्रदेश का जन-भागीदारी मॉडल तीसरी लहर में भी काम आएगा। कोविड की पहली और दूसरी लहर में जिस तरह से जन-सहयोग से संकट की स्थितियों से निपटते हुए कार्य हुआ है उसी तरह एक बार फिर सरकार और नागरिक मिलकर तीसरी लहर को पराजित करेंगे। संयुक्त रूप से किए जाने वाले प्रयत्नों को सफलता मिलेगी, मानवता जीतेगी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा निवास से प्रदेश के जिलों में कोविड की स्थिति, किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ले रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप के सदस्यों से संवाद कर उनके सुझाव प्राप्त किए। केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और राज्य के मंत्री भी वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा चर्चा और बैठक में शामिल हुए। मुख्यमंत्री निवास से हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़े सभी जन-प्रतिनिधियों और अधिकारियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएँ दी।

सिर्फ 3 प्रतिशत के आसपास भर्ती हैं पॉजिटिव रोगी, सावधानी बरतना जरूरी

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि तीसरी लहर के रूप में एक बड़ी चुनौती हमारे सामने है। घबराना नहीं है, सजग और सतर्क रहना है। कोरोना के केस तेजी से बढ़ने की आशंका भी है। पूरी दुनिया की तरफ से एक तथ्य आया है कि इस लहर में जो संक्रमित होते हैं, उसकी गंभीरता कम है। इसलिए अस्पताल में भर्ती होने वाले प्रकरण अभी लगभग तीन प्रतिशत से थोड़े ज्यादा है। पिछली लहर में 40 प्रतिशत तक रोगी भर्ती करने पड़ते थे। अब तक हुए शोध के बाद विशेषज्ञों का मत है कि इस वैरिएंट का असर गले तक रहता है। यह लंग्स को अधिक प्रभावित नहीं करता है। लेकिन इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि हम सजग न रहें। पूरी सजगता से इस लहर का मुकाबला करते हुए कोविड महामारी से हमें जीतना है] यह हमारा संकल्प भी है। प्रदेश में अभी 21 हजार 394 मरीज होम आयसोलेशन में हैं। इन्हें आवश्यक सुविधाएँ दी जा रही हैं।

प्रदेश में हो रहे रोजाना 80 हजार टेस्ट

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज इस चर्चा में ब्लॉक के साथ वार्ड और पंचायतों की क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटियाँ भी जुड़ी हैं। मैं अपील करता हूँ कि कोरोना टेस्ट केलिए जिलों को जो लक्ष्य दिए हैं वे पूरे होने चाहिए। जन-प्रतिनिधि अपने क्षेत्र में टेस्टिंग पर ध्यान दें। गाँव और पंचायत की क्राइसिस मैनेजमेंट से भी अपील है कि अगर गाँव में किसी को भी जरा भी सर्दी और जुकाम है तो उनका टेस्ट करवाने की प्रेरणा दें। मुख्यमंत्री ने पंचायत स्तरीय क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटियों से अपील की कि वे यह देखें कि टीकाकरण से कोई न छूटे। घर-घर दस्तक देकर 15 से 18 वर्ष के नौजवानों का 100 प्रतिशत टीकाकरण करवाएँ। कोविड से बचने का यह सशक्त माध्यम है। सभी जिले फीवर क्लीनिकों में टेस्टों की संख्या बढ़ा दें। पर्याप्त मात्रा में फीवर क्लीनिक होना चाहिए। टेस्ट की रिपोर्ट 24 घंटे में आ जानी चाहिए ताकि कोई भी स्प्रेडर के रूप में न घूमें। अगर कोई पॉजिटिव आता है तो उसे घर में आयसोलेट कर मेडिकल किट दी जाए। इससे संक्रमित की दवा समय पर शुरू हो जाएगी और इंफेक्शन नहीं बढ़ेगा। अगर होम आयसोलेशन की व्यवस्था नहीं है तो कोविड केयर सेंटर में संक्रमित को भर्ती किया जाए। संक्रमित व्यक्ति को भर्ती करने केलिए एंबुलेंस की व्यवस्था रहे, जिससे उसे समय पर अस्पताल पहुँचाया जा सके। ब्लॉक स्तरीय क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी भी ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी से समन्वय कर संदिग्ध व्यक्तियों की टेस्टिंग करवाएँ। एक कंट्रोल रूम बनाकर 24 घंटे व्यवस्था बनाए रखें।

कोविड केयर सेंटर का लाभ लें

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि क्राइसिस मैनेजमेंट समिति के सदस्य यह तय कर लें कि संक्रमितों को कोविड केयर सेंटर में भर्ती किया जाए। जिला स्तरीय क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटियों का महत्वपूर्ण काम है कि वे आमजन में कोविड अनुकूल व्यवहार का पालन करवाएँ। सभी को जागरूक करें कि घर से बाहर निकलने पर मास्क अवश्य लगाएँ। साथ ही यह भी देखें कि किसी स्थान पर अधिक भीड़-भाड़ न हो और नियमित रूप से टेस्ट होते रहें।

टेस्ट रिपोर्ट जल्दी आए

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी कमिश्नर्स को निर्देश दिए कि ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करें कि 24 घंटे में टेस्टिंग की रिपोर्ट आ जाए। मेडिकल कॉलेजों में जो लेब हैं, उसकी निगरानी करें। भारत सरकार के पोर्टल पर आवश्यक जानकारियां अपलोड करने और अन्य सभी व्यवस्थाओं को पब्लिक डोमेन पर रखने का कार्य भी किया जाए। जिले की क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी को अपने जिले के कोविड केयर सेंटर की सुचारू संचालन की व्यवस्था देखना है। सिविल अस्पतालों, जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाएँ चाक-चौबंद रहें। हमारे पास आईसीयू बेड, ऑक्सीजन बेड, सामान्य बिस्तर पर्याप्त संख्या में हैं। कोविड केयर सेंटर्स के आईसीयू बेड्स, ऑक्सीजन बेड्स, सामान्य बिस्तर चेक कर लें। ऑक्सीजन प्लांट चलाकर देखें। वेंटीलेंटर्स, कन्संट्रेटर सहित जितने भी आवश्यक उपकरण हैं उनकी व्यवस्था देख लें। संसाधनों की कमी नहीं रहनी चाहिए। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता जनता की जन्दगी बचाना है और संकट के समय उनके साथ खड़े रहना है।

सार्वजनिक स्थानों पर हो टेस्ट की व्यवस्था

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड और एयरपोर्ट पर टेस्टिंग की व्यवस्था रहे। होम आयसोलेशन में रह रहे मरीजों से बात की जाए। निजी अस्पतालों को मुख्यमंत्री कोविड उपचार योजना में अनुबंधित रखा जाए। निजी अस्प्ताल के लिए जो पैकेज तय किया गया है उससे ज्यादा पैसे अस्पताल प्रबंधन न ले। ऑक्सीजन सिलेण्डर उपलब्ध और क्रियाशील रहें। एक महीने की दवाइयों की व्यवस्था रहे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि टेस्ट, कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग, पॉजिटिव आने पर होम आयसोलेशन, मेडिकल किट वितरण, आवश्यकता पड़ने पर एंबूलेंस की व्यवस्था, कोविड केयर सेंटर में भर्ती करते हैं तो ऑक्सीजन की व्यवस्था, दवाइयों की व्यवस्था, टीकाकरण और कोविड अनुकूल व्यवहार का पालन कर जनता को तीसरी लहर से सुरक्षित निकाल कर ले जाएंगे।

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