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क्या कहता है गोरखपुर का मूड, जीतने के लिए क्या है योगी की स्पेशल सोशल इंजीनियरिंग

दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है, ये कहावत गोरखपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी के लिए सटीक बैठ रही है. बीते उपचुनाव में मिली हार और बिगड़े जाति समीकरण को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्पेशल सोशल इंजीनियरिंग शुरू की है. बीजेपी उम्मीदवार भोजपुरी स्टार रवि किशन के लिए सीएम योगी दमखम से मैदान में उतर गए हैं. जातीय गणित बैठाने के लिए सीएम खुद बैठक और जनसभाएं कर रहे हैं.

इससे पहले के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को ऐसी कड़ी मश्क्कत नहीं करनी पड़ी थी. उपचुनाव से पहले मठ के नाम पर बीजेपी को एकतरफा वोट मिलता था. लेकिन योगी के सीएम बनने के बाद हुए उपचुनाव में यह मिथक टूट गया. बसपा के समर्थन से सपा कैंडिडेट प्रवीण निषाद चुनाव जीत गए. जो अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं.

कहा जाता है कि उपचुनाव के परिणाम ने योगी को आईना दिखा दिया. सपा-बसपा में गठबंधन के साथ ही यह तय हो गया कि अगर गोरखपुर की सीट बीजेपी को बचानी है तो उन गलतियों से सबक सीखना होगा जो उपचुनाव के परिणाम के बाद हुए मंथन में निकली थीं. उप चुनाव की हार का सबसे बड़ा सबक यही था कि बीजेपी ओवर कॉन्फिडेंस में थी. जातीय समीकरण को हल्के में लेना दूसरी भूल मानी गई. यह भी माना गया कि मतदाताओं को यह समझाने में दम नहीं लगाया गया कि उनका वोट देना कितना जरूरी है. इसके अलावा अलग-अलग वर्गों को एकजुट न करना भी बड़ी भूल मानी गई.

इसे देखते हुए योगी ने इस बार रणनीति बदल दी है. गोरखपुर लोकसभा सीट पर सीएम योगी आदित्यनाथ 10 से 17 मई के बीच करीब 14 सभाएं खुद करने वाले हैं. 5 विधानसभाओं वाले इस संसदीय सीट पर हर वर्ग को साधने की बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग चल रही है. सीएम योगी आदित्यनाथ 14 मई को खजनी और डोहरिया में जनसभा करेंगे. 16 मई को गोरखपुर में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पहुंच रहे हैं. अमित शाह की सभा से बीजेपी को फायदे के कयास लगाए जा रहे हैं. इसके बाद 17 मई को सीएम योगी हरपुर बुधहट में जनसभा को संबोधित करेंगे. वहीं, रवि किशन अपने पूर्वजों के गांव मामखोर में कैंपेनिंग करके खुद को गोरखपुर का लाल बता चुके हैं.

बीजेपी नेता नितिन बख्शी ने कहा कि बीजेपी पूरे दमखम से चुनाव लड़ रही है. हर स्तर पर पार्टी की तैयारी महागठबंधन से मजबूत है. उन्होंने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने करीब 2300 बूथों के हर अध्यक्ष और एक प्रमुख कार्यकर्ता से मुलाकात की है. उन्हें उनकी जिम्मेदारी सौंप दी गई है. सीएम खुद लगातार जनसभाएं कर रहे हैं. साथ ही रवि किशन भी डोर टू डोर कैंपेनिंग कर रहे हैं.

स्थानीय पत्रकार मनोज सिंह ने बताया कि गोरखपुर में इस बार चुनावी लड़ाई दिलचस्प हो गई है. नॉमिनेशन के बाद सीएम योगी खिलाड़ियों, वकीलों, व्यापारियों से अलग-अलग मिले हैं. इसके अलावा ब्राह्मण, कायस्थ, सिख कम्युनिटी के लोगों के बीच कैंपेनिंग की है. इस तरह की सोशल इंजीनियरिंग पहले बीजेपी ने नहीं की थी. कुल मिलाकर ये कह सकते हैं बीजेपी यहां मेहनत कर रही है, लेकिन वह कितनी सफल होगी, ये कहना मुश्किल है. इस सीट पर निषाद वोटर ही जीत-हार तय करेंगे.

मनोज सिंह ने कहा कि निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद और उनके सांसद बेटे ने भी रवि किशन के लिए प्रचार शुरू कर दिया है. निषाद वोटरों को साधने की बड़ी जिम्मेदारी सही मायने में संजय निषाद पर ही है, लेकिन महागठबंधन से भी निषाद (रामभुआल निषाद) कैंडिडेट है. ऐसे में निषाद वोटरों को ब्राह्मण उम्मीदवार की तरफ मूव कराना चुनौती है. मनोज सिंह ने कहा कि बीते उपचुनाव में संजय निषाद सपा के साथ थे, लेकिन अब वह बीजेपी में आ चुके है. इसलिए निषादों को साधना बड़ी चुनौती है.

पत्रकार मनोज सिंह ने कहा कि उपचुनाव से बीजेपी ने सबक लिया है. शायद सीएम भी इसी वजह से निषाद समाज के बीच लगातार कैंपेनिंग कर रहे हैं. इस बार सपा-बसपा गठबंधन ने राम भुआल निषाद को उतारा है. राम भुआल निषाद 2014 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी के टिकट पर मैदान में थे. उन्हें योगी आदित्यनाथ ने 362715 वोटों से हराया था. रामभुआल को 176412 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर सपा की राजमति निषाद थीं, जिन्हें 2,26,344 वोट मिले थे.

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