Tuesday , March 17 2026
ताज़ा खबर
होम / राज्य / मध्य प्रदेश / ‘बगरौ वसंत है’ दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय की वासन्ती गोष्ठी सम्पन्न

‘बगरौ वसंत है’ दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय की वासन्ती गोष्ठी सम्पन्न

आम सभा, धर्मेंद्र साहू, भोपाल : महाप्राण पण्डित सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के जन्मदिवस अवसर पर दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय में ‘बगरौ बसन्त है ‘ विशिष्ट कवि गोष्ठी सम्पन्न हुई, जिसमे राजधानी के युवा एवम वरिष्ठ रचनाकारों ने माँ वीणापाणि की आराधना पर्व को अपनी मोहक रचनाओं से स्मरणीय बना दिया ,मां सरस्वती व निराला जी के चित्र पर कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ ग़ज़लकार अशोक निर्मल, एवम आयोजन के मुख्य अतिथि गीतकार नरेंद्र दीपक ,सारस्वत अतिथि सुपरिचित साहित्यकार मनोज सिंह मीक एवम संग्रहालय के निदेशक राजुरकर राज ने माल्यार्पण एवम दीप प्रज्वल्लन के पश्चात गोष्ठी का शुभारंभ हुआ.

कार्यक्रम में कमलकिशोर दुबे ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत करते हुए-‘ मातु शारदे प्रणाम ,कोटि कोटि सिद्ध काम’ गोष्ठी के क्रम को आगे बढ़ाया कवियत्री मनोरमा ने उनकी पंक्तियां थी ‘फिर से आया वसंत बयार महकी चली’ रचनाकार शैलेंद्र शैली ने अपनी बात रखते हुए कविता प्रस्तुत की -‘वसंत है तो वासन्ती मन भी तो हो’ चर्चित रचनाकार डॉ मीनू पांडेय नयन ने -‘गांव की गलियों से फूलों की कलियों तक ,ऐ सखि देखो आया वसंत है’ रचना प्रस्तुत की गोष्ठी के क्रम को आगे बढ़ाया -सीमा हरि शर्मा ने उनकी पंक्तियों को भरपूर स्नेह मिला -‘ओ बसन्त तुम घर तक मेरे कैसे आओगे,दूर दूर तक पेड़ नहीं मल्टी घर मेरा.

कार्यक्रम का संचालन कर रहे घनश्याम मैथिल ‘अमृत’ की पंक्तियां थीं पीत वसन सरसों हंसी, कोयल गाये गान,ढाई आखर प्रेम का वासन्ती परिधान, वरिष्ठ कवि हरिवल्लभ शर्मा की पंक्तियां थी -‘ शिशिर का अंत कन्त घूमती वसंत ऋतु’ वरिष्ठ गीतकार डॉ रामवल्लभ आचार्य ने गोष्ठी को नई ऊंचाई प्रदान की अपने गीतों दोहों के माध्यम से’ सरसों देखी किसने मुखमंडल पीले हैं.

इस अवसर पर वरिष्ठ कवि व्यंग्यकार गोकुल सोनी ने भी अपने धारदार व्यंग्य कविताएं व दोहे प्रस्तुत किये, मन का कलुष सघन तम हर ले उन्हें भी श्रोताओं की खूब दाद मिली, इस अवसर पर राजुरकर राज, मनोज सिंह मीक एवम अशोक निर्मल ने भी अपनी वासन्ती रचनाएं प्रस्तुत कर आयोजन को यादगार बना दिया.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)