तेहरान.
अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए हैं। इस जंग का यह निर्णायक मोड़ माना जा रहा है क्योंकि ईरान में सत्ता बदलने की कोशिश में अमेरिका लंबे समय से रहा है। अब खामेनेई के मारे जाने के बाद अपनी पिट्ठू सरकार बनाने की अमेरिका की कोशिश रंग ला सकती है।
इस तरह खामेनेई का 47 साल का शासन ईरान में खत्म हुआ है तो वहां काफी कुछ बदलने जा रहा है। अमेरिका को उम्मीद होगी कि वह अपने समर्थन वाली सरकार बनवा लेगा। वहीं ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद उनके अकाउंट से ही एक आयत शेयर की गई है। इसका अर्थ है कि अब भी कुछ लोग इंतजार में हैं और वे अल्लाह से किया अपना वादा निभाएंगे।
तेल और गैस के दाम बढ़ेंगे: इस जंग से दुनिया भर में ऊर्जा का एक अस्थायी संकट पैदा होगा। पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा बिजली भी महंगी होने की आशंका है।
महंगाई भड़कने का खतरा: ऊर्जा और ईंधन की कीमतें यदि महंगी होती हैं तो उसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट, खाद्य वस्तुओं, दवाओं आदि पर पड़ता है। इन चीजों की महंगाई सीधे तौर पर हर देश को प्रभावित करेगी और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगी।
पूरे मिडल ईस्ट पर संकट: यदि इस यु्द्ध का विस्तार हुआ तो इसका असर पूरे मिडल ईस्ट पर होगा। इसके लक्षण तब दिखने भी लगे, जब ईरान ने अकेले ही 8 देशों पर हमला किया है। ईरान के सहयोगी हिज़्बुल्लाह, हूती आदि सक्रिय हो सकते हैं। इसके कारण यह युद्ध इज़रायल, लेबनान, यमन तक युद्ध फैल सकता है।
मिडल ईस्ट में सेना बढ़ाएगा अमेरिका: इन हालातों से साफ है कि तत्काल जंग खत्म नहीं होगी और अमेरिका को मिडल ईस्ट में अपनी उपस्थिति बढ़ानी पड़ेगी। साफ है कि अमेरिका को फिर बड़े पैमाने पर मध्य-पूर्व में फौज रखनी पड़ सकती है।
ईरान का परमाणु अभियान होगा तेज: अमेरिका की ओर से लगातार यह कहा गया है कि ईरान परमाणु हथियार ना बनाए। अब ऐसे हालात हो गए हैं कि ईरान को करारा हमला झेलना पड़ा है। ऐसी स्थिति में यह भी संभावना है कि वह भविष्य में अस्तित्व की जंग के लिए परमाणु हथियार ही बनाना शुरू कर दे। इससे वह अपने लिए सुरक्षा की गारंटी महसूस करेगा।
रूस, चीन और भारत पर नजर: इस जंग में अमेरिका और इजरायल तो सक्रिय हैं ही। मिडल ईस्ट के भी कई मुसलमान देश मूक समर्थन अमेरिका को दे रहे हैं। अब तक इस पूरी जंग से एशिया के तीन बड़े प्लेयर चीन, रूस और भारत थोड़ा दूरी बनाए हुए हैं। आने वाले समय में हालात कैसे होंगे। इन तीनों देशों का रुख ही यह तय करेगा।
तेल की सप्लाई अटकने का खतरा: अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हुआ तो दुनिया का 20% तेल व्यापार प्रभावित होगा। भारत पर भी इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।
Dainik Aam Sabha