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महिला काव्य मंच मध्यप्रदेश की प्रांतीय अध्यक्ष डॉ.प्रीति प्रवीण खरे ने बताया सकारात्मक ऊर्जा से सुवासित रचनाओं ने रंग अनगिनत बिखेरा

आम सभा, भोपाल : महिला काव्य मंच शहडोल इकाई की जून माह की काव्य गोष्ठी गूगल मीट  के द्वारा बड़े ही खुशनुमा माहौल में संपन्न हुई। इस गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रुप में मकाम भोपाल इकाई की अध्यक्ष आदरणीय शशि बंसल जी हमारे बीच उपस्थिति रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रांतीय अध्यक्ष डाॅ प्रीति प्रवीण खरे जी कर रही थी।स्वागत वक्तव्य आदरणीय अंजू सिंह जी ने की । कार्यक्रम का संचालन आदरणीय छाया गुप्ता जी द्वारा किया गया ।

सरस्वती वंदना शिल्पी सिंह जी द्वारा संपन्न हुआ। सुंदर काव्य पाठ का शुभारंभ वंदना खरे जी के द्वारा की गई, जिसमें उन्होंने अपनीं सुंदर रचना
गीत लिखूंगी मैं प्यार के,गीत लिखूंगी संस्कार के। सुना कर भाव विभोर कर दिया।

इसके बाद रेनू श्रीवास्तव जी ने अपनी सुंदर गीत की प्रस्तुति दी, जिसके बोल थे…
कैसे भूले रिश्ते और कैसे हुई पराई,
क्या तुझको कभी ना मां याद आई।
बहुत ही सुंदर तरन्नुम में प्रस्तुत किया ,जिसको सुनकर सभी मंत्रमुग्ध हो गए ।

इसी क्रम में मीना सिंह जी ने अपनी सुंदरतम रचना का पाठ किया…
सांस रुक जाती है,जब याद आती है तेरी।

इसके बाद पर्वतारोही शैलजा तिवारी ने रामप्रसाद बिस्मिल जी की जंयती पर देशभक्ति रचना पढ़ी,
वो जो गुजर गया एक शाम हो गया,अधूरे सपनों का भी अरमान हो गया।
तत्पश्चात शिल्पी सिंह ने शानदार गज़ल की प्रस्तुति दी जिसके बोल थे,,,
चल रहा ज़माना सिक्कों से आजकल,
होती हैं विदा बेटियाँ सौदों से आजकल।

इसके बाद संचालिका छाया गुप्ता जी ने प्रेम पर कविता का पाठ किया “अंतर्मन की गहरी पीड़ा, क्या किसको बतलाऊँ मैं।
तत्पश्चात कीर्ति तिवारी जी ने सुन्दर गज़ल की प्रस्तुति दी “झुके जो गलतियों पर शर्म से वह सर नहीं मिलता, यहाँ अब कोई  सच्चा यार घर बाहर नहीं मिलता।

एवं इसी क्रम में अंजू सिंह जी ने सुन्दर बाल कविता “मेरी प्यारी सुन्दर माँ,लोरी एक सुना दो ना” का पाठ करके मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके बाद मुख्य अतिथि शशि बंसल जी ने अपनीं बहुत ही सुंदर कविता गौरैया पर “चीं-चीं का मधुर स्वर” का पाठ किया।
इसके बाद कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डाॅ प्रीति प्रवीण खरे जी ने ऊर्जावान उद्बोधन के साथ सुंदर तरन्नुम में  माहिया विधा सुनाया… जिसके बोल थे
“पिंजर का ढाँचा है
रब को बाँचा है
एक तू ही साँचा है”

इस तरह हमारी काव्य गोष्ठी बहुत ही शानदार तरीके से संपन्न हुई। कार्यक्रम के अंत में रेनू श्रीवास्तव जी के द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।
सभी की रचनाएं एक से बढ़कर एक उम्दा थी ,सभी सुनने वालों ने भी बहुत आनंद उठाया एवं सुंदरतम तरीके से कार्यक्रम का समापन किया गया।

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