क्या आपने कभी सोचा है कि इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन कौन होता है? इंसान का सबसे बड़ा शत्रु अपना मन होता है. मन अगर नियंत्रण में हो तो जीवन आसान हो जाता है, लेकिन अगर ये कहीं भटक जाए तो हर पल अशांति पैदा करता है. संतों और गुरुओं ने इसे समझाने के लिए कई उदाहरण भी दिए हैं. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कथा हमें मथुरा वृंदावन के प्रेमानंद महाराज ने सुनाई, जो बताती है कि मन को कैसे काबू में रखा जा सकता है.
कथा के माध्यम से जाने मन को काबू करने का तरीका
प्रेमानंद महाराज कथा सुनाते हुए कहते हैं कि, 'बहुत समय पहले एक गुरुजी और शिष्य रहते थे. शिष्य ने गुरुजी से भूत मंत्र की सिद्धि के बारे में पूछा. गुरुजी ने उसे मंत्र बता दिया. शिष्य ने पूरी लगन से साधना की और कुछ समय बाद वह मंत्र सिद्ध हो गया. एक दिन सचमुच एक भूत उसके सामने आ गया. भूत ने कहा, 'मुझे काम बताओ, मैं तुरंत कर दूंगा. लेकिन अगर तुमने मुझे काम देना बंद किया, तो मैं तुम्हें उठा कर पटक दूंगा.'
शिष्य घबरा गया, लेकिन उसने सोचा कि यह तो अच्छी बात है. उसने भूत को काम देना शुरू कर दिया. वह जो भी काम कहता, भूत पलक झपकते ही पूरा कर देता और फिर कहता, 'अब अगला काम बताओ.' धीरे-धीरे शिष्य के पास काम खत्म हो गए, लेकिन भूत लगातार धमकी देता रहा. डर के मारे शिष्य तुरंत गुरुजी के पास गया और सारी बात बताई.
गुरुजी मुस्कुराए और बोले, 'घबराओ मत. एक काम करो, एक लंबा बांस गाड़ दो और उस भूत से कहो कि वह लगातार उस पर चढ़ता-उतरता रहे. जब तक मैं नया काम न दूं, तब तक वही करता रहे.' शिष्य ने वैसा ही किया. अब भूत उसी बांस पर चढ़ता-उतरता रहता और शिष्य सुरक्षित हो गया.
मिली ये सीख
आगे प्रेमानंद महाराज कथा से ये सीख देते हुए कहते हैं कि असल में वह भूत कोई और नहीं, बल्कि हमारा मन है और वह शिष्य हम खुद हैं. मन हमेशा हमें किसी न किसी कामना, चिंता या विचार में उलझाए रखता है. अगर हम उसे खाली छोड़ दें, तो वह हमें डर, तनाव और ओवरथिंकिंग में डाल देता है.
गुरुजी का दिया हुआ 'बांस' क्या है? वह है नाम जप जैसे 'राम-राम', 'राधा-राधा, 'कृष्ण-कृष्ण'. जब मन भटकने लगे, तो उसे किसी सकारात्मक दिशा में लगाना जरूरी है. यही उपाय हमें मानसिक शांति देता है और मन को भी शांत रखता है.
Dainik Aam Sabha