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आ गया मौसम विभाग का रिकॉर्ड, झारखंड में बारिश की कमी हो गयी पूरी

रांची : 

झारखंड में जाते-जाते मॉनसून इतना बरसा कि कई जगहों पर तबाही तो मचायी ही, बारिश की कमी को भी पूरा कर दिया. 1 जून से 30 सितंबर तक प्रदेश में 1054.7 मिमी के मुकाबले 863.9 मिमी वर्षा हुई. यह सामान्य और वास्तविक वर्षापात के बीच 18 फीसदी का अंतर दिखाता है. यानी झारखंड में 30 सितंबर तक 18 फीसदी कम बारिश हुई. मॉनसून के दौरान बारिश में 20 फीसदी तक की कमी को सामान्य वर्षा माना जाता है. हालांकि, अब भी 10 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से बहुत कम बारिश हुई है. यह कमी 26 फीसदी से 52 फीसदी तक है.

गढ़वा जिला में लगातार तीन दिन की बारिश से भले कई नदियां उफना गयी हों, कई लोग पानी में बह गये, मकान गिर गये, लेकिन मॉनसून के दौरान हुई बारिश 52 फीसदी कम रही. यहां मॉनसून के दौरान 946.7 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, जबकि हुई मात्र 450 मिमी. गोड्डा में 44 मिमी, पाकुड़ में 42 मिमी और खूंटी में 39 मिमी तक कम बारिश हुई.

इसके विपरीत, पूर्वी सिंहभूम में 1084.8 मिमी सामान्य वर्षा की तुलना में 1145.5 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 6 फीसदी अधिक है. वहीं, कोरडमा में तीन फीसदी और साहिबगंज में 46 फीसदी अधिक बारिश हुई. साहिबगंज में 1301.3 मिमी की तुलना में 1893.6 मिमी बारिश हुई, जो इस वर्ष राज्य में सर्वाधिक वर्षापात है.

झारखंड में मॉनसून के आखिरी तीन दिन इतनी बारिश हुई कि 30 फीसदी की कमी, 18 फीसदी रह गयी. 12 फीसदी बारिश की कमी की भरपाई तीन दिन में ही हो गयी. हालांकि, मौसम विभाग ने अगस्त के अंत में अनुमान जताया था कि मॉनसून की बारिश अभी खत्म नहीं होगी और राज्य के अलग-अलग जगहों पर अच्छी बारिश होगी. साथ ही यह भी जोड़ा था कि मॉनसून के दौरान होने वाली बारिश की जो कमी रह गयी है, उसकी भरपाई नहीं हो पायेगी.

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