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आत्मा गोकुल, शरीर है मथुरा : मुन्नाजी

आम सभा, पियूष कामड़े छिंदवाड़ा : मोहगांवहवेली में भागवताचार्य मुन्नाजी महाराज के मुखारविंद से चल रही श्रीमद् भागवत कथा का सातवें दिन फूलों की होली, सुदामा चरित्र वर्णन, महाप्रसाद के साथ समापन हुआ, उज्जवल कामड़े की पुण्यस्मृति में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा प्रसंग को सुनाते हुए मुन्नाजी महाराज ने कहा कि हमारा शरीर मथुरा है. हमें अपने मन के भीतर भगवान श्रीकृष्ण को बिठाकर गोकुल-वृंदावन बनाकर आनंद से जीना श्रीमद् भागवत कथा सिखाती है, क्योंकि हम सच्चिदानंद का अंश हैं और हम सभी आनंद से जीना चाहते हैं. | मुन्ना महाराज ने अनेक दृष्टांत देकर समझाया कि हम आत्मा रूपी परमात्मा का अंश हैं. सुदामा चरित्र का सुंदर वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जीव और शिव की मित्रता ही अध्यात्म है. | हमें श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी

मित्रता करनी चाहिए. आज सुदामा चरित्र सुनकर श्रोताओं की आंखों में आंसू आ गए तो थोड़ी ही देर बाद फूलों की होली में श्रोता अपने कदम थिरकने से नहीं रोक पाए. बालकृष्ण की सजीव झांकी से दहीहांडी फोड़कर श्रीमद् भागवत कथा का समापन हुआ, यजमान संजय कामड़े एवं सुरेखा कामड़े ने अतिथियों का स्वागत किया.

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