Saturday , January 10 2026
ताज़ा खबर
होम / व्यापार / 2026 में स्मार्टफोन की कीमतों में 8% तक होगी वृद्धि, कंपनियों ने दिए बड़े संकेत

2026 में स्मार्टफोन की कीमतों में 8% तक होगी वृद्धि, कंपनियों ने दिए बड़े संकेत

मुंबई 

साउथ कोरियन टेक कंपनी Samsung अपनी अगली फ्लैगशिप Galaxy S26 सीरीज को लॉन्च करने की तैयारी में है, लेकिन इससे पहले ही कंपनी ने स्मार्टफोन की कीमतों को लेकर एक अहम इशारा कर दिया है। Samsung Electronics के ग्लोबल को-CEO और मोबाइल बिजनेस हेड रोह ताए-मून ने साफ कहा है कि मौजूदा हालात पहले कभी नहीं आए हैं और ऐसे में सैमसंग स्मार्टफोन्स की कीमतों में बढ़ोतरी टालना मुश्किल हो सकता है।

जो भी डिवाइस आप इस्तेमाल करते हैं साल 2026 में उनकी कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. इसकी वजह से रैंडम एक्सेस मेमोरी (रैम) की कीमतों में तेजी आना.

अक्तूबर 2025 के बाद से रैम की कीमत दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है.

रैम का इस्तेमाल कंप्यूटर, स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, यहां तक की मेडिकल डिवाइस में भी होता है.

रैम की कीमतें बढ़ने की वजह एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े हुए डेटा सेंटर्स की ग्रोथ है. इन्हें ऑपरेट होने के लिए भी रैम की ज़रूरत होती है.

इसके चलते डिमांड और सप्लाई में भारी गैप आ गया है और सभी को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है.

2026 में कम होगी स्मार्टफोन की बिक्री

काउंटर प्वाइंट ने अनुमान लगाया है कि 2026 में स्मार्टफोन की बिक्री कम होगी और ग्लोबल शिपमेंट में 2.1 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह कंपोनेंट का महंगा होना है. कंपोनेंट महंगे होने के कारण कंपनियों को स्मार्टफोन बनाने की लागत ज्यादा आ रही है और इसका सीधा असर फोन की कीमत पर पड़ेगा, जो ग्राहकों को चुकानी होगी.

सस्ते मॉडल्स पर सबसे ज्यादा असर

लागत बढ़ने के सबसे ज्यादा असर 200 अमेरिकी डॉलर (लगभग 18,000 रुपये) से सस्ती कीमत वाले मॉडल्स पर पड़ेगा. काउंटर प्वाइंट का कहना है कि इस साल की शुरुआत से इन फोन को बनाने की लागत 20-30 प्रतिशत बढ़ चुकी है. ऐसे में अब कंपनियों के पास इनकी कीमत बढ़ाने के अलावा कोई और ऑप्शन नहीं बचा है. कीमत बढ़ाने पर बजट सेगमेंट वाले ग्राहक इन्हें खरीदेंगे नहीं. इसलिए कंपनियां अब सस्ते मॉडल लॉन्च करने से पीछे हट रही हैं.

महंगे फोन पर भी असर

बजट के साथ-साथ मिड-रेंज और प्रीमियम फोन भी बढ़ती लागत का असर पड़ा है और अब कंपनियों के लिए इन्हें बनाना 15-20 प्रतिशत महंगा पड़ रहा है. यहां लागत बढ़ने का बड़ा कारण मेमोरी चिप्स की कमी और आसमान छूते दाम है. एआई के चलते कंज्यूमर मेमोरी चिप्स का प्रोडक्शन कम हुआ है और 2026 की दूसरी छमाही तक इनके दाम 40 प्रतिशत तक और बढ़ सकते हैं. इसके चलते भी कंपनियों की लागत 8-15 प्रतिशत तक और बढ़ सकती है.

टेक इवेंट CES 2026 से पहले ग्लोबल मीडिया से बातचीत में रोह ने माना कि सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप्स की लागत तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर आने वाले प्रीमियम फोन्स की कीमत पर पड़ेगा। यानी Galaxy S26 सीरीज, Samsung के अब तक के सबसे महंगे स्मार्टफोन्स में से एक हो सकती है। ऐसा ही ट्रेंड इस साल अन्य स्मार्टफोन्स के साथ भी देखने को मिल सकता है।
क्यों बढ़ सकती है Samsung फोन्स की कीमत?

टेक इंडस्ट्री इस वक्त मेमोरी सप्लाई क्रंच से जूझ रही है। The Korea Herald की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में जनरल-पर्पज DRAM (8Gb DDR4) की कीमत 1.35 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 9.30 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है। यह लगभग 7 गुना बढ़ोतरी है। DRAMeXchange के आंकड़ों के मुताबिक, AI इंफ्रास्ट्रक्चर की जबरदस्त मांग के कारण मेमोरी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं।

रोह ताए-मून ने कहा है, 'हम मेमोरी प्राइसिंग के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं', और इसका सीधा असर नए फोन्स की लागत पर पड़ने वाला है।
Galaxy S26 सीरीज में क्या होगा खास?

Galaxy S26 सीरीज, Samsung के लिए सिर्फ एक नया फोन नहीं बल्कि एक स्ट्रैटेजिक प्रोडक्ट होगी। इस सीरीज में कंपनी का अपना 2-नैनोमीटर Exynos 2600 चिपसेट देखने को मिलेगा, साथ ही Galaxy AI के तहत कई नए AI-पावर्ड फीचर्स भी पेश किए जाएंगे। यह फोन Samsung के वर्टिकली इंटीग्रेटेड मॉडल का असली टेस्ट भी होगा, जिसमें उसके सेमीकंडक्टर और फाउंड्री डिवीजन बड़ी भूमिका निभाते हैं।
AI इकोसिस्टम को बढ़ाने की कोशिश

Samsung हार्डवेयर के साथ-साथ अपने AI इकोसिस्टम को तेजी से बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। कंपनी का दावा है कि वह 2026 के अंत तक Galaxy AI वाले डिवाइसेज की संख्या 400 मिलियन से बढ़ाकर 800 मिलियन करना चाहती है। फिलहाल Galaxy AI, Samsung की इन-हाउस टेक्नोलॉजी और Google के Gemini मॉडल के कॉम्बिनेशन पर चलता है, जिससे इमेज एडिटिंग, ऑन-डिवाइस ट्रांसलेशन जैसे फीचर्स मिलते हैं। इंटरनल सर्वे के मुताबिक, Galaxy यूजर्स में AI ब्रैंड अवेयरनेस 30 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो चुकी है।

हालांकि, कंपनी यह भी सोच रही है कि भविष्य में कुछ प्रीमियम AI फीचर्स के लिए फीस ली जाए। अभी कोर फीचर्स मुफ्त रहेंगे, लेकिन कुछ एडवांस सुविधाएं पेड मॉडल में जा सकती हैं।