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अहंकार के वशीभूत अपनी श्रेष्ठता का बखान करना ही रावण की प्रवृत्ति है : मानस आचार्य

(उमेश चौबे)

आम सभा, उदयपुरा।

वनवासी क्षेत्र ग्राम छिकरा, में सदाशिव नित्यानंद गिरी जी महाराज ऋषिकेश, की प्रेरणा से संचालित, मानस यात्रा, का ग्राम वासियों, द्वारा परंपरागत ढंग से तिलक, अक्षत, पुष्प, भेंट कर विद्वानों का सम्मान किया, ग्राम खेड़ापति मंदिर पर, सत्संग सभा में मानस के चल रहे प्रसंग, लंका कांड में वर्णित राम रावण युद्ध, की व्याख्या करते हुए मानस आचार्य, सुरेंद्र कुमार शास्त्री, ने बताया कि रावण को उसके भाई, पुत्र ,पत्नी, मंत्री एवं बयोबृद मालवंत, नाना के द्वारा श्री राम से युद्ध ना करने एवं श्री सीता जी को वापस करने के संबंध में कई प्रकार से समझाया, लेकिन रावण अपने विदृता के अहंकार से किसी की नीतिगत, बात को मानने तैयार नहीं हुआ, इसी को दुष्ट एवं राक्षसी प्रवृत्ति कहा जाता है, राम के द्वारा भौतिक रावण का विनाश हो चुका है, लेकिन उसकी दुष्ट प्रवृत्ति आज भी सज्जनों को परेशान कर रही है, जिसको रामचरितमानस के माध्यम से नष्ट किया जा सकता है, सत्संग सभा में संगीताचार्य हरिदत्त शास्त्री, नर्मदा प्रसाद रामायणी, सुदामा शास्त्री, आशीष शास्त्री, देवव्रत राजोरिया, योगेश पांडे, कीर्ति नंदन दुबे, प्रेम नारायण शास्त्री द्वारा भी अपने उदगार, प्रकट किए, यात्रा संयोजक, चतुरनारायण अधिवक्ता ने बताया कि वेद लक्ष्णा गाय के प्रति श्रद्धा एवं पूज्य भाव जागृत के लिए प्रत्येक एकादशी को नित्यानंद गौशाला पचामा, में गौ आरती आयोजित होगी, मानस ग्रंथ, की मंगल आरती में शिवनारायण बिंडैया, हरि गोविंद, भोजराज सिंह शिक्षक, जगदीश सरपंच, देवेंद्र मोरी जनपद सदस्य, जिला प्रतिनिधि लाल सिंह पवैया, अरुण उदैनिया, डीपी पाठक, ओंकार सिंह पटेल, भरत सिंह राजपूत, संजय सिंह, संदीप लोधी, सर्जन सिंह कौरव, राजकिशोर, कमलेश रघुवंशी, अभिषेक मेहरा, यात्रा प्रभारी अमर सिंह लोधी, सहित वनवासी अंचल के श्रद्धालुओं ने भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया।

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