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निर्भया केस: दोषी अक्षय सिंह की पुनर्विचार याचिका पर SC में 17 दिसंबर को सुनवाई

नई दिल्ली

पूरे देश को हिला कर रख देने वाले निर्भया गैंगरेप व मर्डर केस के एक दोषी अक्षय कुमार सिंह की पुनर्विचार याचिका पर शीर्ष अदालत में 17 दिसंबर को सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच इस पर सुनवाई करेगी। बता दें कि निर्भया के चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है।

पलूशन का हवाला दे मांग रहा माफी

अक्षय ने अपनी अर्जी में कहा है कि प्रदूषण के कारण वैसे ही लोगों की जिंदगी कम हो रही है फिर फांसी देने की क्या जरूरत है। उसने अपनी याचिका में कहा, ‘दिल्ली की हवा और पानी खराब होने के चलते जिंदगी लगातार कम हो रही है। ऐसे मौत की सजा की क्या जरूरत है। गांधी जी हमेशा कहते थे कि कोई भी फैसला लेने से पहले सबसे गरीब व्यक्ति के बारे में सोचें। यह सोचें कि आखिर आपका फैसला कैसे उस व्यक्ति को मदद करेगा। आप ऐसा विचार करेंगे तो आपके भ्रम दूर हो जाएंगे।’

फांसी के डर में छोड़ा खाना

उनकी दया याचिका पर जहां राष्ट्रपति का फैसला अभी नहीं आया है वहीं फांसी के डर से चारों दोषियों ने तिहाड़ में खाना-पीना छोड़ दिया है। माना जा रहा है कि उन्हें इस बात की भनक लग चुकी है कि किसी भी वक्त उनकी फांसी पर फैसला लिया जा सकता है। निर्भया गैंगरेप के तीन दोषी अक्षय, मुकेश और मंडोली जेल से यहां शिफ्ट किए गए पवन को तिहाड़ की जेल नंबर-2 के वॉर्ड नंबर-3 के तीन सेल में रखा गया है। जबकि चौथे कैदी विनय शर्मा को जेल नंबर-4 में रखा हुआ है।

निर्भया की मां बोलीं, अदालत का फैसला होगा स्वीकार

निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि अदालत को पुनर्विचार याचिका को सुनना चाहिए लेकिन इस याचिका को पहले ही खारिज कर दिया जाना चाहिए था। शीर्ष अदालत के निर्णय को स्वीकार करने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।

जब हिल गया था पूरा देश

16 दिसंबर 2012 की रात राजधानी दिल्ली को फिजियोथेरेपी की स्टूडेंट के साथ हुए गैंगरेप की घटना ने सकते में डाल दिया था। इस रात दक्षिणी दिल्ली में निर्भया के साथ छह लोगों ने न सिर्फ गैंगरेप किया गया था बल्कि उन्हें और उनके दोस्त के साथ बेहद क्रूरतापूर्वक मारपीट कर सड़क पर फेंक दिया था। इस घटना के बाद देशभर में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे। दिल्ली पुलिस ने मामले में सभी छह आरोपियों को अरेस्ट किया था। जिसमें से एक राम सिंह ने कथित रूप से तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी। पांचों आरोपियों में से एक नाबालिग था जिसे दोषी साबित करने के बाद जुवेनाइल होम भेज दिया गया, वहीं बाकी चार को फांसी की सजा सुनवाई। दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।

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