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प्रदेश में एक साथ पैदल गश्त पर निकले 20 हजार से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी

* जनसामान्य में सुरक्षा की भावना बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर सड़कों पर उतरी पुलिस

* डीजीपी सुधीर कुमार सक्सेना ने 10 किमी की पैदल गश्त, नागरिकों से किया संवाद

* बेसिक पुलिसिंग को बढ़ावा देने के लिए की गई पैदल गश्त

* प्रदेश भर में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने लिया कानून व्यवस्था का जायजा

* समस्त आईजी/पुलिस कमिश्नर, डीआईजी/एडिशनल सीपी, एसपी/डीसीपी, एडिशनल एसपी, एसडीओपी तथा थाना/चौकी प्रभारियों ने की पैदल गश्त

आम सभा, भोपाल।

नागरिकों में सामान्य सुरक्षा की भावना बनाये रखने तथा पुलिस की विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में पुलिस ने पैदल गश्त की। शनिवार, 6 मई को डीजीपी सुधीर कुमार सक्सेना सहित पूरे प्रदेश में एक साथ 20 हजार से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी सड़कों पर निकले और कानून व्यवस्था का जायजा लिया। भोपाल में डीजीपी ने अधिकारियों के साथ ढाई घण्टे में करीब 10 किमी पैदल गश्त की और नागरिकों से संवाद किया। टीटी नगर थाना से जीआरपी थाना, बजरिया तक पैदल गश्त की गई।

*प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पैदल गश्त की प्रभावशीलता पर दिया जोर:-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी माह में नई दिल्ली में हुए पुलिस महानिदेशकों/ महानिरीक्षकों के 57वें अखिल भारतीय सम्मेलन में भी पैदल गश्त की प्रभावशीलता पर जोर दिया था। उन्होंने मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा की जा रही पैदल गश्त का भी उल्लेख किया था, साथ ही निर्देश दिए थे कि पारंपरिक पुलिस प्रणाली जैसे पैदल गश्त आदि को और मजबूत करें। उन्होंने कहा कि जनता में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ाने के लिए सीधा संवाद करें। इस दौरान उन्होंने पुलिस बलों को अधिक संवेदनशील बनाने और उन्हें उभरती प्रौद्योगिकियों में प्रशिक्षित करने का सुझाव भी दिया।
*मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बेसिक पुलिसिंग को बढ़ावा देने के लिए दिए निर्देश:-*
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए थे कि बेसिक पुलिसिंग को बढ़ावा दिया जाए। जनसामान्य में सामान्य सुरक्षा की भावना बनाये रखने तथा पुलिस की सड़कों पर विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए पैदल गश्त करने पर भी जोर दिया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मध्यप्रदेश शांति का टापू है। यहां शांति एवं कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों पर पुलिस सख्ती बरते। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी पुलिस अपराधियों के लिए वज्र से ज्यादा कठोर और नागरिकों के लिए फूल की तरह कोमल हो।

*डीजीपी ने भोपाल में की 10 किमी की पैदल गश्त:-*
डीजीपी सुधीर सक्सेना के साथ वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस बल ने भोपाल के भीड़-भाड़ और संवेदनशील क्षेत्राें में 10 किमी पैदल गश्त की। शाम 6 बजे टीटी नगर थाने से डीजीपी श्री सक्सेना ने पैदल गश्त शुरू की। वे रंगमहल चौराहा, रोशनपुरा, कंट्रोल रूम, पीएचक्यू तिराहा, शब्बन चौराहा, जिन्सी चौराहा, पुल बोगदा, प्रभात चौराहा, थाना अशोका गार्डन के सामने से होते हुए स्टेशन बजरिया थाना तक पहुंचे। इस दौरान उन्हाेंने जनता से संवाद किया और पुलिस व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्हाेंने जगह-जगह रुककर दुकानदारों एवं रहवासियों से बात की। नागरिकों से उन्होंने पुलिस संबंधी समस्याओं के बारे में जानकारी ली, साथ ही नागरिकों से पूछा कि उन्हें इस दौरान जगह-जगह रुककर उन्होंने दुकानदारों और रहवासियों से बात की। पुलिस संबंधी समस्याओं के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने नागरिकों से पूछा कि कोई गुंडा, बदमाश या माफिया उन्हें परेशान तो नहीं कर रहा है। कोई गुंडा, बदमाश या माफिया परेशान तो नहीं कर रहा है। डीजीपी ने कहा कि पैदल गश्त कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम लोगों में सुरक्षा की भावना सुदृढ़ करना, आम लोगों के बीच पुलिस की उपलब्धता एवं दृश्यता सुनिश्चित करना है। डीजीपी सुधीर सक्सेना के साथ पुलिस कमिश्नर हरिनारायणाचारी मिश्र, एडिशनल सीपी अनुराग शर्मा, डीसीपी साईं कृष्णा, डीसीपी क्राइम श्रुत कीर्ति सोमवंशी एवं अन्य अधिकारी शामिल हुए।
*प्रदेश भर की पुलिस निकली सड़कों पर:-*
प्रदेश के सभी जोन के आईजी/पुलिस कमिश्नर, डीआईजी/एडिशनल सीपी, एसपी/डीसीपी, एएसपी/एडिशनल डीसीपी, एसडीओपी/ असिस्टेंट सीपी तथा लगभग एक हजार थानों के प्रभारी एवं 550 चौकियों के चौकी प्रभारी पैदल गश्त पर निकले। पूरे प्रदेश में वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में सभी जिलों के भीड़-भाड़ वाले एवं संवेदनशील क्षेत्राें में पैदल गश्त की गई। पैदल गश्त के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आमजन से संवाद भी किया गया। इस दौरान उन्हाेंने जनता को होने वाली परेशानियों के संबंध में जानकारी ली एवं उनके निराकरण के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए। .
*पैदल गश्त का उद्देश्य:-*
पैदल गश्त व्यस्ततम क्षेत्रों में पुलिस की दृश्यता में वृद्धि करती है। नागरिकों में सुरक्षा की भावना एवं अपराधियों के मन में भय उत्पन्न करती है। नागरिकों और पुलिस के बीच संवाद सेतु का निर्माण करती है। आम जनता में पुलिस के प्रति विश्वास को बढ़ाती है। आपराधिक व असामाजिक तत्वों पर पुलिस द्वारा नजर रखी जाती है। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस को भौगोलिक स्थिति का ज्ञान कराती है। पुलिस के सूचना तंत्र को मजबूती प्रदान करती है।

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