वित्त मंत्रालय के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के 15 वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन रिटायर किया है। ये अधिकारी सीबीआईसी के प्रधान आयुक्त, आयुक्त, और उपायुक्त के रैंक के हैं। इन अधिकारियों को अर्टिकल 56 के तहत रिटायरमेंट दिया गया है।
इससे पहले 10 जून को वित्त मंत्रालय ने भ्रष्टाचार के आरोप में लिप्त 12 वरिष्ठ अफसरों को अनिवार्य तौर पर रिटायर कर दिया है। इन अफसरों में आयकर विभाग के चीफ कमिश्नर के साथ-साथ प्रिंसिपल कमिश्नर जैसे पदों पर तैनात रहे अधिकारी भी शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों को नियम 56 जे के तहत रिटायर किया गया था। इनमें 1985 बैच के आईआरएस अशोक अग्रवाल का नाम सबसे ऊपर है। आयकर विभाग में ज्वाइंट कमिश्नर रैंक के अफसर अग्रवाल ईडी के संयुक्त निदेशक रहे हैं और भ्रष्टाचार के आरोप में 1999 से 2014 के बीच निलंबित रहे हैं। इन पर कारोबारियों से वसूलीव तांत्रिक चंद्रास्वामी की मदद का आरोप रहा है। 1985 बैच के आईआरएस अधिकारी होमी राजवंश को सेवानिवृत्ति दी गई है। उन पर पद का गलत इस्तेमाल करते हुए संपत्ति अर्जित करने का केस चला और सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया। तभी से वो निलंबित हैं।
नोएडा के कमिश्नर (अपील) रहे 1989 बैच के आईआरएस एसके श्रीवास्तव को भी सेवानिवृत्त किया गया है। इन पर कमिश्नर रैंक की दो महिला आईआरएस के साथ यौन शोषण करने का आरोप है।
भ्रष्टाचार में कार्रवाई
अन्य अफसरों में बी बी राजेंद्र प्रसाद, बी अरुलप्पा, अशोक मित्रा, चंदर सैनी भारती,अंदासु र्रंवदर, श्वेताभ सुमन, विवेक बत्रा व राम कुमार भार्गव शामिल हैं। सभी महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप रहे हैं।
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