भोपाल
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) प्रभावी होने के बाद लव जिहाद के मामलों में कमी आएगी। राज्य सरकार ने यूसीसी की धारा 366 में लिव-इन रिलेशनशिप स्थापित करने के लिए बल या कपट से सहमति प्राप्त करने पर पांच वर्ष की सजा का प्रविधान किया है।
लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीयन करवाना होगा। पहचान दस्तावेज से सुनिश्चित की जाएगी, इसलिए नाम बदलकर धोखा देना संभव नहीं होगा। अभी लव जिहाद के मामलों में नाम बदलकर झांसा देने के सबसे ज्यादा मामले आते हैं।
इससे पहले वर्ष 2021 में प्रदेश सरकार ने लव जिहाद की घटनाएं रोकने के लिए मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लागू किया था, पर यह ज्यादा प्रभावी नहीं रहा। इसमें सजा की दर भी बहुत कम रही है।
धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के अंतर्गत प्रदेश में अभी तक 430 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं। अभी तक 58 मामलों में निर्णय आया है। लगभग डेढ़ सौ मामले न्यायालयों में विचाराधीन हैं।
बता दें कि लव जिहाद के भोपाल और इंदौर में संगठित गिरोह पिछले वर्ष सामने आ चुके हैं। भोपाल के मामलों में पुलिस की जांच में यह भी सामने आया था कि आरोपितों ने गिरोह बनाकर एक निजी कालेज की हिंदू छात्राओं से पहले दोस्ती की, फिर उनके साथ दुष्कर्म किया।
छात्राओं के अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया। मतांतरण कराने का भी दबाव बनाया। एक वर्ष पहले इंदौर के बाणगंगा थाने में दो युवकों पर दुष्कर्म और मत बदलने का दबाव बनाने का प्रकरण दर्ज किया गया था।
पुलिस जांच में पता चला था कि युवक इंटरनेट मीडिया पर अपना हिंदू नाम दिखाते थे। लव जिहाद के लिए फंडिंग करने के मामले में इंदौर में पार्षद अनवर कादरी को भी पुलिस ने आरोपित बनाया था।
Dainik Aam Sabha