जबलपुर
मध्य प्रदेश में स्थित जबलपुर को देश की प्रमुख डिफेंस सिटी के रूप में जाना जाता है. यह शहर भारतीय सेना की सामरिक जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है. जबलपुर में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी चार बड़ी फैक्ट्रियां स्थापित हैं. जहां आर्मी के वाहनों के साथ-साथ तोप, बम, गोले और आधुनिक बंदूकें तैयार की जाती हैं. यहां बनने वाले हथियार और उपकरण देश की थलसेना की ताकत को मजबूत करते हैं. डिफेंस इंडस्ट्री की मौजूदगी के कारण जबलपुर न सिर्फ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां हजारों लोगों को रोजगार भी मिलता है. यही वजह है कि जबलपुर को भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता का एक मजबूत केंद्र माना जाता है।.
भारत का एक इकलौता शहर जो ज्वालामुखी की गोद में है. चौंकिए नहीं! ऐसा इसलिए क्योंकि, इस शहर में एक या दो नहीं, बल्कि चार डिफेंस की फैक्ट्रियां हैं. यहां भारतीय सेना के अस्त्र-शस्त्र के साथ ही तोप, बारूद, कलपुर्जे से लेकर आर्मी व्हीकल तैयार किए जाते हैं.
अंग्रेजों के शासनकाल की यह फैक्ट्रियां बरसों पुरानी हैं. अंग्रेजों ने इन फैक्ट्री का निर्माण किया था. भारतीय सेना इन फैक्ट्रियों की बदौलत स्वदेशी हथियार बनाकर दुश्मनों के दांत खट्टे कर रही है. इन फैक्ट्री की ताकत इतनी है कि यह शहर की फैक्ट्रियां ही पाकिस्तान जैसे देश को आसानी से तबाह कर सकती हैं.
जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री में सारंग और धनुष जैसी तोपों का उत्पादन किया जाता है. इतना ही नहीं, लाइट फील्ड गन भी फैक्ट्री में बनाई जाती है. इस फैक्ट्री में गन के कलपुर्जे भी बनाए जाते हैं. यह फैक्ट्री 1904 की है, जिसकी शुरुआत अंग्रेजों ने की थी. सारंग तोप जो 32 किलोमीटर दूर तक हमला करने की क्षमता रखती है.
जबलपुर की ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया 1942 में स्थापित की गई थी, जिन्हें अंग्रेजों ने बनाया था. ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया के बने बम से भारत-पाकिस्तान 1965 की लड़ाई हो या फिर बांग्लादेश सहित चीन की लड़ाई, हर जगह जबलपुर की फैक्ट्री के गोला-बारूद का इस्तेमाल हुआ. इतना ही नहीं, एयर स्ट्राइक में भी जो बम आतंकी अड्डों पर गिराए गए, वह खमरिया में ही बने थे.
जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री, इंडियन आर्मी के हर व्हीकल को तैयार करती है. इसमें हैवी वाहन, स्टालिन, रसोई टैंकर, जनरेटर, बस, ट्रक जैसे व्हीकल शामिल है, जो भारतीय सेना को ताकत देते हैं.
इतना ही नहीं lmv जैसे व्हीकल भी तैयार किए जाते हैं, जो मुश्किल रास्तों में भी दुश्मनों के छक्के छुड़ा देते हैं. यह व्हीकल बुलेट प्रूफ होते हैं. यह व्हीकल बुलेट प्रूफ होते हैं. ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया में गोला-बारूद जिन अस्त्र-शस्त्रों में भरे जाते हैं. यह कलपुर्जे जबलपुर की जीआईएफ फैक्ट्री में बनाए जाते हैं.जबलपुर शहर में सेंट्रल ऑर्डिनेंस डिपो, COD फैक्ट्री भी है जो भारतीय सेना के लिए गोला-बारूद और हथियारों के भंडारण करने का काम करती है.
देशभर में ऑर्डिनेंस की 12 फैक्ट्रियां हैं, जिसमें से चार फैक्ट्रियां सिर्फ जबलपुर में ही हैं. इसलिए इसे डिफेंस सिटी के नाम से भी जाना जाता है.
Dainik Aam Sabha