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सट्टे लॉटरी में जीत के योग (ज्योतिष)

लॉटरी में जीत के योग
ज्योतिष के द्वारा लक्की ड्रा लॉटरी आदि में जीतने के उपाय करने से पूर्व यह देख लेना चाहिए कि अपने या खेलने वाले की कुंडली में ,लॉटरी ,सट्टे ,शेयर मार्केट आदि के माध्यम से धन लाभ होने के योग बनते भी हैं या नहीं कारण यह है कि यदि व्यक्ति के भाग्य में ही इस प्रकार का लाभ प्राप्त होना नहीं होगा तो सब तिकड़म है जोड़-तोड़ उपाय चतुराई व्यर्थ ही जाएंगे फायदा तो खैर क्या कैसे होगा ,अलबत्ता फिर भी इस दिशा में प्रयास किए जाएं तो हानि जरूर हो जाएगी यदि कुंडली में दिवालिया योग याचक योग, दरिद्र योग ,निर्धन योग आदि हुए तो बेड़ा गर्ग ही समझें
आदमी और से भी फर्श पर आ गिरेगा कहीं जेल योग ,निष्कासन योग आदि अशुभ योग हुए या सूर्य शनि राहु बुध कुपित हुए तो सरकारी दंड जुर्माना ,जेल व अनादर या अपयश भी होंगे अतः अन्य सभी लोगों को नहीं , तो भी कम से कम शेयर मार्केट ,सट्टा , लॉटरी जैसे आकस्मिक प्रशस्त साधनों से लाभ होने के योग को तो कुंडली में अवश्य ही देख लेना चाहिए तभी और बढ़ना चाहिए
आवश्यक ही है तो इस योग को एक दो बार लाभ लेकर संतोष कर लिया जाए
किंतु यदि लालच में अंधा होकर बराबर यही काम करते रहे तो योग अपना बल फल दिखाकर क्षीण हो जाता है और संबंधित ग्रह कुपित होने लगते हैं जिससे कालांतर में सत्यानाश होना पूर्णता निश्चित हो जाता है और इस प्रकार के योग कुंडली में बनते ही ना हो तब तो भगवान का शुक्रिया अदा करके ईश्वर से सदा के लिए आंखें बंद कर लेना ही कल्याणकारी होता है वैसे भी एक बार बिना मेहनत किए खाने की आदत पड़ जाए तो आदमी कहीं का नहीं रहता पहले शरीर फिर दिमाग और फिर अंतरात्मा तक जंग खा जाती है
*प्रमुख योग:*
1.अद्वितीय से अष्टमेश का या अष्टमेश से लाभेश का या चतुर्थेश से अष्टमेश का शुभ संबंध बनता हो तो आकस्मिक लाभ की संभावना होती है यह लाभ खजाने ,गड़े धन ,लॉटरी शेयर मार्केट ,वसीयत ,सट्टा ,बीमा आदि किसी भी अकस्मिक माध्यम से हो सकता है
2.यदि जन्मकुंडली के 2,5 ,11 भाव तथा इनके स्वामी बलवान हो शुभ स्थिति में हो तो अनायास धन प्राप्ति कराते हैं यदि यह शुभ ग्रहों से दृष्ट हो या यूती भी हो तो अच्छा लाभ दीलाते हैं नवम भाव और नवमेश पीटे हुए नहीं हो तो,
(साथ में गोचर वह दशा भी देखें)
3.जन्म कुंडली के दूसरे भाव में गुरु समर्थ हालत में हो शुक्र 11 वे भाव में अनस्त व शुभ हो, दशम में सुर्य व चंद्र अष्टमस्त हो तो चांदी या सोने आभूषणों के व्यापार में सट्टे संचय से अच्छा लाभ होता है
4.प्रश्न कुंडली में यदि 2,5,9 ,11 भाव तथा इनके स्वामियों की स्थिति वह शुभ हो तो लॉटरी शेयर मार्केट सट्टे, सोदे ,वायदे आदि लाभ होता है
5.राहु अकासमिकता प्रधान तथा माया का कारक ग्रह है यदि वह शुभ स्थिति में उपरोक्त में से किन्ही बाहों में हो प्रभावित करें और शुभ दृष्टि भी हो तो शेयर मार्केट लॉटरी सट्टे रिश्वत रेस जैसे और अप्रशस्त माध्यमों से लाभ प्राप्त करता है या ड्राइंग निकल आता है

*-सोनिया राठौर सोनी*
M- 9907779800

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