अबू धाबी/तेल अवीव
ईरान ने सोमवार शाम को संयुक्त अरब अमीरात और ओमान की राजधानियों पर मिसाइल और ड्रोन हमले के बाद एक बार फिर मिडिल ईस्ट जंग के मुहाने पर पहुंच गया है। इन हमलों के बाद इजरायल के लिए खतरा बढ़ गया है। विश्लेषकों का कहना है इजरायल जल्द ही एक बार फिर ईरान के निशाने पर हो सकता है। विश्लेषक ईरान के हमलों को उसी तैयारी की पृष्ठभूमि में देखते हैं।
यह हमले ऐसे समय में हुए जब अमेरिका ने अपने दो विध्वंसक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हुए फारस की खाड़ी में भेजा है। ट्रंप ने प्रोजेक्ट फ्रीडम की घोषणा की है, जो सोमवार को शुरू हुआ है। इसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए खोलना है। इसके पहले अमेरिका ने युद्धविराम का इस्तेमाल करते हुए एक विशाल नौसैनिक, हवाई और जमीनी सेना तैयार कर ली है।
ईरान को किस बात का खौफ?
तेहरान समझ गया है कि अगर अमेरिका होर्मुज को कमर्शियल जहाजों के लिए आंशिक रूप से भी खोलने में कामयाब हो जाता है, तो ईरान बातचीत में अपनी मोलभाव करने की ताकत खो देगा। इसके अलावा उसे ऐसी शर्मिंदगी झेलनी पड़ेगी जो उसके शासन के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है।
अमेरिका नेवी के विध्वसंक जहाज अब ईरानी तट और जहाजों के बीच खड़े हैं और उन पर होने वाले हर हमले का जवाब देने को तैयार हैं। इसमें मिसाइल-जैमर सिस्टम के साथ सेंट्रल कमांड के टोही विमान और ड्रोन तैनात किया है। ये विध्वंसक जहाजों के ऊपर गश्त करते हुए दुश्मन के हर लॉन्च का पता लगाते हैं और उस पर हमला करते हैं। अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसने ईरान की छह स्पीडबोट्स को डुबो दिया है।
UAE पर तेहरान ने क्यों किया हमला?
ईरान समझता है कि ऐसे किसी भी टकराव में ईरान के सफल होने की संभावना नहीं है। यही कारण है कि तेहरान ने खाड़ी देशों पर पहले हमला करने का फैसला किया। सबसे पहले UAE को निशाना बनाया, जो खाड़ी देशों के बीच ईरान के विरोध का नेतृत्व करता है। तेहरान के पास UAE की तेल सुविधाओं और बंदरगाहों पर हमला करने की असीमित क्षमता मौजूद है।
UAE में इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम
अमेरिका और इजरायल ने हाल ही में UAE की मिसाइल और ड्रोन रक्षा प्रणाली को मजबूत करने पर काम किया है। इनमें इजरायल के आयरन डोम और लेजर वेपन आयरन बीम की UAE में तैनाती अहम है। इसके बावजूद अमीरात का तेल उद्योग ईरान के हमले के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।
इजरायली विश्लेषकों का कहना है कि UAE और ओमान पर किए गए हमले अभी बस एक शुरुआत हैं। तेहरान इस बात को समझता है कि अगर वह इस अभियान में हार जाता है और ईरान पर ट्रंप की घेराबंदी जारी रहती है, तो ईरान के इस्लामिक शासन के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगेगा।
Dainik Aam Sabha