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मोहन भागवत और मौलाना मदनी की मुलाकात की इनसाइड स्टोरी, रात 12 बजे तक हुई बातचीत

देश के बदले हुए सियासी माहौल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की. मदनी ने यह मुलाकात संघ के दिल्ली कार्यालय केशव कुंज में जाकर की. जमीयत उलेमा-ए-हिंद के इतिहास में पहली बार है जब जमीयत का कोई अध्यक्ष संघ के द्वार पर जाकर दस्तक दिया है.

रात 12 बजे तक हुई बातचीत

मौलाना अरशद मदनी और मोहन भागवत की मुलाकात शुक्रवार को दिल्ली में हुई. यह मुलाकात महज तीस मिनट के लिए तय थी, लेकिन दोनों प्रमुखों ने बंद कमरे में बातचीत का सिलसिला शुरू किया तो डेढ़ घंटे तक बात चलती रही. मौलाना अरशद मदनी शुक्रवार की रात दस बजे संघ के दिल्ली कार्यालय केशव कुंज पहुंचे, इसके बाद सवा दस बजे से पौने 12 बजे रात तक बंद कमरे में भागवत से उनकी बातचीत हुई. हालांकि इस दौरान क्या बातें हुई हैं वह अभी तक सामने नहीं आ सकी हैं, लेकिन जमीयत की ओर कहा जा रहा है कि बातचीत मौजूदा सियासी हालात को लेकर बातचीत हुई है.

रामलाल ने तैयार की मुलाकात की पृष्ठभूमि

सूत्रों की मानें तो मौलाना अरशद मदनी की संघ प्रमुख भागवत से मुलाकात भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री और आरएसएस के सहसंपर्क प्रमुख रामलाल ने कराई है. इस मुलाकात के पहले जमीयत उलेमा-ए-हिंद के वरिष्ठ पदाधिकारियों और रामलाल के बीच कई दौर की बैठक और बातचीत हो चुकी थी.

राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में पक्षकार है जमीयत

मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद और मौजूदा समय में राममंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई के बीच मौलाना अरशद मदनी और मोहन भागवत के मुलाकात के सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं. अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकार की ओर से पांच पार्टियां सुप्रीम कोर्ट में मुकदमे की पैरवी कर रही हैं. इसमें जमीयत की ओर अरशद मदनी भी शामिल हैं. ऐसे में इस मुलाकात को अयोध्या मामले से भी जोड़कर देखा जा रहा है.

2 साल से हो रही थी तैयारी

मौलाना अरशद मदनी की संघ प्रमुख से मुलाकात की पटकथा दो साल पहले से लिखी जा रही थी. अरशद मदनी 2016 से संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात करने की लगातार कोशिश कर रहे थे. इस संबंध में मौलाना अरशद मदनी कई बार अपनी इच्छा जाहिर कर चुके थे. संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात के लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद के पदाधिकारियों ने संघ नेता रामलाल से संपर्क साधा था. इस संबंध में मौलाना अरशद मदनी के साथ साये की तरह रहने वाले उनके खास एक मौलाना ने रामलाल से जाकर मुलाकात भी की थी. इस दौरान उन्होंने रामलाल से मौलाना अरशद मदनी को भागवत से मिलाने की सिफारिश की थी. इसके बावजूद संघ प्रमुख ने मौलाना अरशद मदनी को मुलाकात का वक्त नहीं दिया, जिसके चलते यह सिलसिला टलता रहा.

नरेंद्र मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलने की कोशिशों को जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से एक बार फिर से तेज कर दिया गया था. बीजेपी के संघ में दोबारा वापसी करने के बाद रामलाल की आरएसएस में पकड़ मजबूत हुई है. रामलाल की कोशिशों के चलते मौलाना अरशद मदनी की संघ प्रमुख से मुलाकात को अमली जामा पहनाया जा सका है.

संघ से पहले भी हुई है जमीयत की मुलाकात

हालांकि जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष की संघ प्रमुख से मुलाकात यह कोई पहली नहीं है. अरशद मदनी से पहले जमीयत के अध्यक्ष रहे मौलाना असद मदनी ने संघ के तत्कालीन अध्यक्ष के सुदर्शन से दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में मुलाकात की थी. हालांकि यह मुलाकात जमीयत उलेमा-ए-हिंद के एक कार्यक्रम के सिलसिले में हुई थी. जबकि मौलाना अरशद मदनी की मोहन भागवत से मुलाकात संघ कार्यालय केशव कुंज में हुई है.

बता दें कि मौलाना असद मदनी के निधन के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद दो गुटों में बट गया है. इसमें एक गुट की कमान मौलाना अरशद मदनी के हाथों में तो दूसरे की कमान महमूद मदनी के हाथों में है. संघ प्रमुख से मुलाकत करने वाला जमीयत उलेमा-ए-हिंद अरशद मदनी गुट का है.

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