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मतदान समाप्ति के बाद जारी डाक मतपत्रों को गणना में न करें शामिल – श्रीमती विभा पटेल

– भोपाल के जिला निर्वाचन अधिकारी और पर्यवेक्षक को निर्वाचन कार्य से तत्काल हटाएं

– कांग्रेस की महापौर प्रत्याशी विभा पटेल ने कहा चुनाव प्रभावित कर रहे हैं निर्वाचन अधिकारी

आम सभा, भोपाल। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं भोपाल नगर निगम से कांग्रेस की महापौर प्रत्याशी श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि उन्हें आशंका है कि डाक मतपत्र (कर्त्तव्य मतपत्र) डलवाने में भारी गड़बडी़ की गई है। निर्वाचन प्रावधान के अनुसार 6 जुलाई 2022 के बाद जारी किए गए डाक मत पत्रों को मतगणना में शामिल नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद निर्वाचन अधिकारियों ने 6 जुलाई 2022 को मतदान समाप्ति के बाद भी डाक मतपत्र जारी किए गए। इन डाक मतपत्रों की गणना न की जाए। भोपाल के जिला निर्वाचन अधिकारी महापौर चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का षड़यंत्र कर रहे हैं। वे भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री नरोत्तम मिश्रा के दामाद हैंं और भाजपा के पक्ष में काम कर रहे हैं। चुनाव के पर्यवेक्षक की भूमिका भी संदिग्ध है। निष्पक्ष मतदान के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी एवं पर्यवेक्षक को नगर निगम भोपाल के निर्वाचन कार्य से तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।

श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि जिला निर्वाचन अधिकारी ने मतदान समाप्ति 6 जुलाई के बाद डाक मतपत्र जारी किए। जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर जानकारी चाही गई कि मतदान से पूर्व कितने डाक मतपत्र जारी किए और मतदान के बाद कितने जारी किए गए थे। उन्होंने अभी तक किसी तरह की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। न ही जिला निर्वाचन अधिकारी दूरभाष पर उपलब्ध हो रहे हैं और न ही मिल रहे हैं। श्रीमती पटेल ने कहा कि उन्हें भोपाल की जनता पर पूर्ण विश्वास है। जनता उन्हें जनादेष दे रही है, लेकिन भोपाल नगर निगम चुनाव कार्य में शामिल कुछ अफसर सत्ता पक्ष की कठपुतली बनकर चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का काम कर रहे हैं। श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग को भी ज्ञापन सौंपा गया है, लेकिन आयोग ने भी अभी तक इस मामले में कोई संज्ञान नहीं लिया है।

श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि हमारी मांग है कि 4 जुलाई 2022 के बाद डाले डाक मतपत्रों को गणना में शामिल नहीं किया जाए। इसके लिए दोषी अफसरों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाए। साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी, जो गृहमंत्री के दामाद हैं, उन्हें तत्काल चुनाव कार्य से हटाया जाए। ऐसा निर्वाचन की निष्पक्षता को बरकरार रखने के लिए आवश्यक है।

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