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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल की बड़ी कार्रवाई, भंग की कर्नाटक कार्यकारिणी

कर्नाटक में जारी सियासी संग्राम के बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बड़ी कार्रवाई की है. कांग्रेस ने अपनी राज्य कार्यकारिणी को भंग कर दिया है, हालांकि प्रदेश अध्यक्ष और कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे. इससे पहले कर्नाटक के विधायक रोशन बेग को पार्टी से निलंबित कर दिया गया था.

कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुंडूराव ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भंग करने की मंजूरी दी है. अब हमें सोचना है कि कैसे न केवल केपीसीसी बल्कि जिला कांग्रेस और ब्लॉक समितियों का पुनर्गठन किया जाए. सभी स्तरों पर पार्टी का पुनर्गठन होगा.

कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने बताया, ‘मुझे बताया गया है कि कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भंग कर दिया गया है. गुंडूराव अभी भी केपीसीसी अध्यक्ष में बने रहेंगे. हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा. नई कार्यकारिणी का जल्द ही गठन होगा. कोई पद मांगा नहीं जाता है. पार्टी को जिसमें काबिलियत दिखेगी, उसे पद दिया जाएगा.’ डीके शिवकुमार ने कहा कि कावेरी बेसिन पर हमारी स्थिति बहुत खराब है. कोई बारिश नहीं हो रही है, लेकिन भविष्य में मौसम विभाग ने कुछ राहत मिलने का अनुमान लगाया है.

लोकसभा 2019 चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद लचर रहा. राज्य की 28 लोकसभा सीटों में से बीजेपी ने 25 पर जीत हासिल की. वहीं कांग्रेस और जेडीएस को 1-1 सीटों से संतोष करना पड़ा. एक सीट निर्दलीय के हिस्से में गई.  दरअसल कर्नाटक कांग्रेस में विरोध के सुर चुनाव के नतीजे आने से पहले ही उठने लगे थे.

विधायक रोशन बेग ने एग्जिट पोल में पार्टी के खराब प्रदर्शन को लेकर पार्टी के प्रदेश प्रभारी केसी वेणुगोपाल, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और पार्टी के प्रदेश इकाई के अध्यक्ष दिनेश गुंडू पर निशाना साधा था. इसके बाद उन्हें पार्टी की ओर से नोटिस जारी किया गया था. इसमें उनसे पूछा गया कि पर्टी विरोधी बयान देने के लिए उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए.

बेग बेंगलुरु सेंट्रल क्षेत्र के शिवाजीनगर विधानसभा सीट से विधायक हैं. उन्होंने मंगलवार को पार्टी से निलंबित कर दिया गया. विधानसभा चुनाव के बाद जेडीएस और कांग्रेस गठबंधन में लगातार टकराव की खबरें आती रहीं, जिसका असर लोकसभा चुनाव पर भी साफ नजर आया. दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच जमीन पर कोई तालमेल नहीं था, जिसका फायदा सीधे-सीधे बीजेपी को मिला.

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