लखनऊ
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म षड्यंत्र का माध्यम हो गया है। देशविरोधी ताकतें इसका दुरुपयोग कर भारत के खिलाफ अफवाहें फैला रही हैं। षड्यंत्र के तहत समाज को गुमराह करने करने का प्रयास हो रहा है। सीएम योगी ने ऐतिहासिक 'काकोरी ट्रेन एक्शन' के 101 साल पूरे होने पर आयोजित 'काकोरी ट्रेन कांड शताब्दी वर्ष' के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा, भारत बिना किसी कारण के गुलाम नहीं बना। गुलामी के कारण हमारे भीतर का विभाजन और हमारे खिलाफ रचे गए षड्यंत्र थे। आज भी कुछ ताकतें जाति, धर्म और भाषा के नाम पर भारत को कमजोर कर रही हैं।
उन्होंने कहा, इन षड्यंत्रों का अब तीसरा माध्यम सोशल मीडिया मंच है। सभी भारत विरोधी ताकतें भारत के खिलाफ अफवाह फैलाने, इसका दुरुपयोग करने और समाज को गुमराह करने के लिए इस मंच का इस्तेमाल कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने युवा पीढ़ी को देश के क्रांतिकारियों से दूर रखा, उन्होंने उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय किया।
चौरीचौरा की घटना के बाद कांग्रेस ने स्थगित कर दिया था आंदोलन
आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के बाद राम प्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खान, चंद्रशेखर आजाद, वीर सावरकर, भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों को जानबूझकर लोगों की स्मृति से दूर रखा गया। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार षड्यंत्र किए गए कि इन क्रांतिकारियों के नाम वर्तमान पीढ़ी तक न पहुंचें। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1922 में गोरखपुर में चौरी चौरा की घटना के बाद कांग्रेस ने आंदोलन स्थगित कर दिया था और खुद को इस प्रकरण से अलग कर लिया था। उन्होंने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय ने इन क्रांतिकारियों की ओर से मुकदमा लड़ा था। आदित्यनाथ ने कहा, कई क्रांतिकारियों को आजीवन कारावास की सजा हुई और दुर्भाग्य से लखनऊ में कांग्रेस के दो नेता एवं वकीलों ने अदालत में इन क्रांतिकारियों के खिलाफ बहस की थी।
2014 के बाद स्वतंत्रता संग्राम के नायकों का हुआ सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक नायकों को सम्मान देने के लिए 2014 के बाद प्रयास शुरू करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार को जाता है। उन्होंने कहा कि डॉ. बी. आर. आंबेडकर, वीर सावरकर, राम प्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खान से जुड़े स्मारकों को विकसित किया जा रहा है। योगी ने कहा कि क्रांतिकारियों को उचित सम्मान देने के लिए इस ऐतिहासिक घटना को 'काकोरी डकैती' के बजाय 'काकोरी ट्रेन एक्शन' के रूप में संदर्भित किया गया है। उन्होंने कहा, अंग्रेजों ने इसे डकैती कहा था। दुर्भाग्य से, स्वतंत्र भारत में भी जो लोग सत्ता में आए, उन्होंने इसे 'काकोरी डकैती कांड' कहकर इन क्रांतिकारियों का अपमान जारी रखा
Dainik Aam Sabha