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अयोध्या केस: ASI की रिपोर्ट पर सवाल खड़े करने को लेकर मुस्लिम पक्ष ने मांगी माफी

नई दिल्ली
राम जन्मभूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट में एएसआई की रिपोर्ट पर सवाल उठाने के बाद गुरुवार को मुस्लिम पक्ष अपने रुख से पलट गया और ऐसा करने पर माफी मांग ली। मामले की सुनवाई कर रही 5 जजों की संवैधानिक बेंच के समक्ष मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट पर सवाल उठाए जाने को लेकर माफी मांगी। धवन ने कहा कि वह एएसआई रिपोर्ट की प्रमाणिकता पर कोई सवाल नहीं करना चाहते। मुस्लिम पक्ष की ओर से दलीलें दे रहे धवन ने कहा, ‘यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि हर पेज पर हस्ताक्षर हों। रिपोर्ट की ऑथरशिप और उसके सारांश पर सवाल खड़े किए जाने की जरूरत नहीं है। यदि हमने बेंच का समय नष्ट किया हो तो हम इसके लिए माफी मांगते हैं।’

बता दें कि बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली एक अन्य अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा था कि एएसआई के हर चैप्टर पर लेखक का जिक्र है, लेकिन उसके सारांश में किसी लेखक का जिक्र नहीं है। चीफ जस्टिस के अलावा बेंच में शामिल जस्टिस एस.ए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस. अब्दुल नजीर ने कहा कि धवन ने सुनवाई की शुरुआत में कहा था कि वह अपने सवाल करने के हक को नहीं छोड़ सकते। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह भी कहा था कि सबूतों को खारिज नहीं किया जा सकता है क्योंकि कोर्ट ने उन्हें स्वीकार कर लिया है।

अयोध्या: SC बोला- बस साढ़े 10 दिन हैं बाकी

इसके साथ ही बेंच ने कहा कि हिंदू और मुस्लिम पक्ष को तय समय में ही अपनी दलीलें देनी होंगी क्योंकि 18 अक्टूबर के बाद एक दिन का भी वक्त नहीं दिया जाएगा। चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा, ’18 अक्टूबर के बाद एक भी दिन का अतिरिक्त समय नहीं मिलेगा। यदि हम 4 सप्ताह में फैसला देते हैं तो फिर वक्त देना मुश्किल होगा।’ कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से कहा कि वे एएसआई रिपोर्ट पर अपने सवालों को एक ही दिन में निपटा लें। अदालत ने कहा कि अक्टूबर में कई दिन अवकाश हैं और हिंदू पक्ष के सिर्फ एक ही वकील को प्रत्युत्तर के लिए मौका दिया जाएगा।

मीनाक्षी अरोड़ा ने ASI रिपोर्ट पर यूं उठाया था सवाल

गौरतलब है कि बुधवार को मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा था, ‘अगर कोई स्ट्रक्चर जीर्ण अवस्था में नष्ट हो जाए और उसे न बनाया जाए और बाद में उस खाली स्थल पर स्ट्रक्चर खड़ा किया जाए तो इसके खिलाफ दावा नहीं किया जा सकता। स्ट्रक्चर को विध्वंस किया जाना महत्वपूर्ण पहलू है और एएसआई की रिपोर्ट में पुराने स्ट्रक्चर को विध्वंस करने की बात नहीं है। इस पर एएसआई की रिपोर्ट चुप है।’ इस पर जस्टिस बोबडे ने कहा था, ‘एएसआई की रिपोर्ट अब केस रेकॉर्ड बन चुका है कोर्ट को जब तक रिपोर्ट में विरोधाभास नहीं लगता तब तक यह रेकॉर्ड का हिस्सा बना रहेगा। यह बात आपकी ओर से ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान नहीं कही थी।’

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