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भोपाल कलेक्टर महोदय के दिशा निर्देश से बनेगा राजधानी में एडवांस फिजियोथैरेपी यूनिट

भोपाल 
भौतिक चिकित्सक कल्याण संघ के अध्यक्ष डॉ. सुनील पाण्डेय ने बिगत दिवस भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह से मिलकर मांग की है भोपाल जिले में एडवांस फिजियोथेरेपी यूनिट व बड़े स्पेस के साथ साथ जिला अस्पताल में फिजियोथैरेपी चिकित्सा में मास्टर डिग्री हासिल किए हुए विषय विशेषज्ञों द्वारा इलाज़ सुनिश्चित हो। ताकि मरीज़ो को बेहतर इलाज़ मिल सके।

मांग को ध्यान रखते हुए तत्काल कलेक्टर महोदय ने भोपाल जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन को कलेक्टर ऑफिस बुला कर उक्त विषय को गंभीरता से लेने को कहा।भौतिक चिकित्सक कल्याण संग के अध्यक्ष डॉ. सुनील पाण्डेय ने जिला मुख्य चिकित्सा आधिकारी डॉ. मनीष शर्मा को भी मिलकर उन्हें ज्ञापन की प्रतिलिपि सौंपी।

 CMHO ने पूर्व में स्वीकृत बजट को बढ़ा कर 40 लाख रुपये करेंगे आश्वासन दिया। और अधिक बजट के लिए फ़ाइल शासन के पास भेजेंगे स्वीकृति के लिए, जल्द ही 1250 जयप्रकाश हॉस्पिटल में संचालित यूनिट को एडवांस कर दिया जाएगा।

  •  भागदौड़ भरी जिंदगी एवं बिगड़ती दिनचर्या से लोगों जोड़ों मांसपेशियों की दिक्कत हो रही ख़ास बात यह कि यह समस्या हर उम्र के लोगों में देखने को मिल रही है। 
  • आज फिजियोथैरेपी चिकित्सा न केवल मरीजों को ठीक करने में अहम बल्कि स्वस्थ रहने के लिए अहम है।
  • फिजियोथैरेपी चिकित्सा की खासियत यह है कि यह चिकित्सा ड्रगलेश है जिसका शरीर पर क़ोई दुष्प्रभाव नही पड़ता।
  • एडवांस मशीनों क्लास 4 लेज़र थैरेपी, शॉक वेव थैरेपी, टेकार थैरेपी डी कम्प्रेशन यूनिट रोबोटिक हैंड थैरेपी, मैग्नेटिक सस्टिम्युलेसन (FMS) आदि से स्त्री रोग, बृद्ध जनों सम्बंधित उपचार एवं जोड़ों मांसपेशियों व अनेकों विषयों से जुड़ी बीमारियों में इलाज़ करना आसान होगा जैसे-
  • ऑर्थो, न्यूरो, स्पोर्ट्स, गायनी, पिड्याट्रिक, ऑन्कोलॉजी जैसी समस्या से ग्रस्त मरीज़ो को इलाज मिलना आसान हो जाएगा।

संघ के अध्यक्ष ने कलेक्टर महोदय को बताया प्रदेश सरकार बैचलर डिग्री के साथ साथ सात अलग अलग मास्टर डिग्री कोर्स संचालन कर रही है फिजियोथैरेपी के सरकारी व प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में।

  • ऑर्थोपेडिक, 
  • न्यूरोलॉजी, 
  • स्पोर्ट्स, 
  • गायनेकोलॉजी, 
  • पिड्याट्रिक, 
  • ऑन्कोलॉजी आदि विषयों में।

सुझाव
संघ के अध्यक्ष ने सिविल सर्जन को सुझाव भी दिया सभी सरकारी प्राइवेट संस्थाओं से फिजियोथैरेपी पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद 3 महीनों की इन्टरसिप सरकारी अस्पतालों के अलग अलग डिपार्टमेंट से करने की अनिवार्यता सुनिश्चित हो। इससे मरीजों को लाभ के साथ स्टूडेंट्स की गुडवत्ता में भी सुधार होगा और कालेजों में क्या स्तर हैं एजुकेशन का उसे भी परखा जा सकता है।

फिजियोथैरेपी खेल के ग्राउंड से लेकर (ICU) गहन चिकित्सा ईकाई एवं बच्चों से लेकर बुजुर्गों, गर्भावस्था* में महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय की सबसे उपयुक्त चिकित्सा के उत्थान के लिए सरकार को बजट में भी प्रवधान करना चाहिए। मध्यप्रदेश सरकार से आग्रह है, भोपाल जिला अस्पताल की तरह ही मध्यप्रदेश के सभी जिलों में एक डेडिकेटेड एडवांस फिजियोथैरेपी यूनिट मरीजों के इलाज़ के लिए उपलब्ध हो व्यवस्था सुनिश्चित करना चाहिए।

महत्वपूर्ण योगदान-
मध्यप्रदेश में फिजियोथैरेपी चिकित्सा के आधुनिकीकरण, स्पष्ट पहचान एवं कानूनी समरूपता की मांग तेज — स्वास्थ्य विभाग से त्वरित निर्णय की अपील
मध्यप्रदेश में फिजियोथैरेपी चिकित्सा सेवाओं के आधुनिकीकरण, पेशे की स्पष्ट पहचान और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कानूनी समरूपता सुनिश्चित करने हेतु स्वास्थ्य विभाग से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई है। विशेषज्ञों एवं फिजियोथैरेपी समुदाय का कहना है कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में फिजियोथैरेपी की भूमिका तेजी से बढ़ी है, लेकिन राज्य स्तर पर अभी भी संरचनात्मक एवं नीतिगत सुधार आवश्यक हैं।

“फिजियोथैरेपी आज केवल सहायक सेवा नहीं बल्कि एक स्वतंत्र एवं वैज्ञानिक हेल्थकेयर प्रोफेशन है। मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार देने के लिए आधुनिक तकनीकों एवं स्पष्ट नीति ढांचे की आवश्यकता है।”

मुख्य मांगें (Key Demands)

  • उपकरणों एवं तकनीकों का आधुनिकीकरण
  • सरकारी फिजियोथैरेपी संस्थानों में आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
  • क्लास-4 लेज़र थैरेपी, एडवांस इलेक्ट्रोथेरेपी, रोबोटिक रिहैबिलिटेशन एवं आधुनिक पुनर्वास तकनीकों को शामिल किया जाए।

फिजियोथैरेपी की स्पष्ट पहचान एवं जागरूकता
राज्य में फिजियोथैरेपी को लेकर बनी भ्रम की स्थिति को समाप्त किया जाए।
इसे स्वतंत्र एवं मान्यता प्राप्त हेल्थकेयर प्रोफेशन के रूप में स्थापित किया जाए।
सभी शासकीय विभागों में जागरूकता अभियान चलाया जाए।

स्टेट एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल काउंसिल को प्रभावी बनाना
काउंसिल को तुरंत सक्रिय एवं कार्यशील किया जाए।
पंजीकरण, नियमन और पेशेवर मानकों के क्रियान्वयन को मजबूत किया जाए।

कानूनी शब्दावली का पालन
भारत सरकार द्वारा मान्य “Allied Healthcare & Healthcare Professional” शब्दावली का उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
“पैरामेडिकल” शब्द के उपयोग पर तत्काल रोक लगाई जाए ताकि केंद्र सरकार के सर्कुलर का पालन हो सके।

राष्ट्रीय स्तर पर समरूपता
केंद्र द्वारा लागू कानून के अनुरूप राज्य में समान नीतियां लागू की जाएं।
स्वास्थ्य सेवाओं में एकरूपता और स्पष्ट प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

समापन
फिजियोथैरेपी समुदाय का मानना है कि इन कदमों से न केवल पेशे की पहचान सुदृढ़ होगी बल्कि मरीजों को आधुनिक, सुरक्षित एवं वैज्ञानिक उपचार उपलब्ध होंगे, जिससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार संभव है।