उज्जैन
मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील के झलारिया गांव में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। गुरुवार शाम करीब 7 बजे, 3 वर्षीय मासूम भागीरथ खेलते समय अचानक एक खुले बोरवेल में जा गिरा। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन मुस्तैद हो गया है और युद्धस्तर पर बचाव कार्य जारी है।
संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन और चुनौतियां
भागीरथ को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। भोपाल से आई NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की टीम के साथ हरदा, इंदौर और उज्जैन की SDRF टीमें मिलकर जॉइंट रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।
घटनास्थल पर पुलिस और रेस्क्यू एजेंसियों की टीमें तैनात हैं। पूरे इलाके को कॉर्डन ऑफ कर दिया गया है और ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे यहां भीड़ न लगाएं। अधिकारियों के अनुसार, भीड़ से रेस्क्यू कार्य में बाधा आ सकती है। फिलहाल प्रशासन का पूरा फोकस बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने पर है और ऑपरेशन लगातार जारी है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भागीरथ को रिंग रेस्क्यू के जरिए बाहर निकालने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर अब बोरवेल के पास समानांतर सुरंग खोदने का काम फिर से शुरू कर दिया गया है।
गौरतलब है कि बीती रात से ही रेस्क्यू टीम रोप रिंग और समानांतर सुरंग दोनों तरीकों से बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी। हालांकि, रोप रिंग के जरिए बार-बार असफलता मिलने के बाद अब सुरंग बनाकर बच्चे तक पहुंचने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। रेस्क्यू टीम लगातार प्रयास में जुटी हुई है और हर संभव तरीके से भागीरथ को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है।
समानांतर खुदाई: जेसीबी (JCB) मशीनों की मदद से बोरवेल के बगल में एक गड्ढा खोदा जा रहा है।
मौजूदा स्थिति: बच्चा लगभग 70 फीट की गहराई पर फंसा हुआ है। राहत की बात यह है कि उसे लगातार ऑक्सीजन सप्लाई दी जा रही है।
कठिन राह: रेस्क्यू टीमें अब तक करीब 40 फीट की खुदाई कर चुकी हैं, लेकिन नीचे कठोर चट्टानें आने की वजह से अभियान की गति थोड़ी धीमी हुई है। कैमरे के जरिए बच्चे की हर हलचल पर पैनी नजर रखी जा रही है।
कैसे हुआ हादसा?
भागीरथ का परिवार मूल रूप से राजस्थान के पाली जिले का रहने वाला है। वे भेड़ चराने के सिलसिले में पिछले तीन दिनों से झलारिया इलाके में ठहरे हुए थे। पिता प्रवीण देवासी के अनुसार, भागीरथ दीवार के पास खेल रहा था। मासूम ने जिज्ञासावश बोरवेल का ढक्कन हटाया और उसे बाल्टी समझकर उसमें पैर डाल दिया। मां ने उसे बचाने के लिए हाथ भी बढ़ाया, लेकिन पलक झपकते ही बच्चा गहराई में ओझल हो गया।
सुरक्षा के लिहाज से मौके पर दो एंबुलेंस और मेडिकल टीम को तैनात रखा गया है, ताकि रेस्क्यू होते ही बच्चे को तुरंत उपचार मिल सके।
उज्जैन में राजस्थान में होने वाले विवाह समारोह को लेकर भागीरथ के घर में उत्साह का माहौल था। मासूम भागीरथ सबसे ज्यादा खुश था, क्योंकि उसे शादी में पहनने के लिए नए कपड़े दिलाए गए थे। कल तक वह उन नए कपड़ों को पहनकर पूरे घर में चहक रहा था और उसकी हंसी से आंगन गूंज रहा था। भागीरथ की मौसी ने भारी मन से बताया कि घर के अधिकांश लोग राजस्थान पहुंच चुके थे और भागीरथ का परिवार भी निकलने ही वाला था। शाम को नए कपड़ों में खेलते हुए वह अचानक 200 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया। अब घर के एक कोने में वह नई पोशाक रखी है और दूसरी ओर उसकी मां की पथराई आंखें बस बोरवेल के मुहाने की ओर टिकी हैं।
उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने कहा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बीती रात से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं। उन्होंने बताया कि भागीरथ को बचाने के प्रयास लगातार जारी हैं। कैमरे के माध्यम से उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है और प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है कि उसे जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
घटनास्थल पर पहुंचे बड़नगर विधायक जितेंद्र पंड्या ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रशासन और सरकार पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भागीरथ को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं। विधायक पंड्या ने कहा कि सभी का यही प्रयास है कि मासूम भागीरथ को सकुशल बाहर निकाला जा सके।
एसडीआरएफ के कमांडेंट संतोष जाट ने कहा कि हम कोशिश कर रहे हैं कि बच्चे के हाथों में रेस्क्यू रोप की रिंग पहनाकर उसे बाहर निकाल लिया जाए। उन्होंने बताया कि इस प्रयास में भोपाल से पहुंची एनडीआरएफ की टीम, हरदा, इंदौर और उज्जैन की एसडीआरएफ टीमों के साथ संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है। बोरवेल में कैमरा डालकर बच्चे की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। उसे ऑक्सीजन सपोर्ट भी दिया जा रहा है। मौके पर दो एंबुलेंस भी तैनात हैं। रेस्क्यू के दौरान भागीरथ की शर्ट निकाली गई है।
Dainik Aam Sabha