
* सतपुड़ा भवन में लगी आग को शिवराज सरकार भले ही हादसा कहे
लेकिन जनता की अदालत में कांग्रेस ये मुद्दा लेकर जाएगी
आम सभा, भोपाल।
मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती विभा पटेल ने मध्य प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी दफ्तर सतपुड़ा भवन में 12 जून को लगी आग को क्लीन चिट दिए जाने पर कहा कि इसका अंदाजा तो लोगों को पहले से ही था। आश्चर्य की बात है कि 12 हजार से ज्यादा फाइलें जलने के विषय में जांच समिति ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया। श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि सतपुड़ा भवन में सरकारी दस्तावेज जलने से शिवराज सिंह चौहान सरकार के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार के अहम साक्ष्य नष्ट हो गए। लेकिन कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। इस मुद्दे को लेकर जनता की अदालत में सवाल खड़े करेगी।
श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि इससे पहले सतपुड़ा भवन में 14 दिसंबर 2018 को भी आग लगी थी। ये मौका विधानसभा चुनाव के ठीक बाद का था। इस आग से बड़ी संख्या में संवेदनशील और गोपनीय दस्तावेज जलकर राख हो गए थे। वर्ष 2013 में विधानसभा चुनाव के पहले भी इसी भवन की तीसरी मंजिल पर आग की लपटों ने फाइलें जला दी थीं। अब फिर चुनाव से करीब चार माह पहले लगी से ये संदेह बरकरार है कि ये कहीं कोई नियोजित साजिश तो नहीं थीं ?
श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि सतपुड़ा भवन में विशेष रूप से स्वास्थ्य विभाग एवं आदिम जाति विभाग में हुई खरीदी की फाइलें जलने पर समिति मौन रही। इस कारण तमाम तरह के संदेहों को बल मिला है। विशेषकर स्वास्थ्य संचालनालय में डीमेट घोटाले, नर्सिंग घोटाले समेत कोविड काल के दौरान हुए भुगतान से लेकर व्यापम घोटाले तक से जुड़े कई दस्तावेज रखे थे। यहां लगी आग में ये सब खाक हुए कि नहीं..? ये शिवराज सिंह चौहान सरकार ने अब तक आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है। वहीं, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में किन-किन दर पर किन-किन उपकरणों की खरीदी हुई थीं। उपकरणों के अलावा अन्य क्या-क्या खरीदा गया था। इनकी खरीदी के दस्तावेज भी जलना बताए जा रहे हैं। इसी तरह आदिम जाति कल्याण विभाग ने छात्रावास, निर्माण कार्यों, जरुरी उपकरणों की खरीदी की फाइलें भी स्वाहा हो गई। कितनों को भुगतान हुआ था। कितनों का शेष है। ये रिकॉर्ड भी जलना कहा जा रहा है। विभाग में तरह-तरह की हुई खरीदी नियमानुसार मान्य थी कि नहीं। ये कहना भी अब मुश्किल है।
श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि सतपुड़ा भवन की आग में कुछ कर्मचारियों की सर्विस बुक, जीपीएफ एवं सेवाओं संबंधी दस्तावेज के अलावा सीआर की फाइल्स भी खाक हो गई। ऐसे में कई कर्मियों एवं अधिकारियों को अब सेवानिवृति के समय व्यवहारिक एवं वैधानिक परेशानी आएगी। इसको लेकर जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कुछ नहीं कहा और न ही शिवराज सिंह चौहान सरकार ने कोई स्पष्टीकरण दिया है।
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