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जीवन में प्रयोग और परिवर्तन प्रगति के दो पहिए


* श्रम और नवीनता से जीवन सार्थक बनाइए

परिवर्तन का क्रिया चक्र खुद इस बात का प्रमाण है कि परिवर्तन की खोज ही नवीनता है। परिवर्तन का सीधा-सीधा तात्पर्य जड़ता का नाश और विकास की अनंत गाथा का प्रादुर्भाव होना और स्थिरता का अंत ही है। चलायमान परिवर्तन की विदाई स्थिर और जंगम का का समापन होता है। आज की परिस्थितियों ने जड़ता और स्थिरता को बड़ी चोट दी है। मशीनों का शोर, हथियारों की होड़ के बीच कैलिफोर्निया क्रांति ने विश्व को सूचना प्रौद्योगिकी का बहुत बड़ा अवदान दिया है, इस परिवर्तन ने मानवीय समाज को को नया अवसर प्रदान किया है। इस परिवर्तन ने काम को सरल बनाया और व्यवस्था को पारदर्शिता के साथ समाज के सम्मुख रखा है। एक युगीन क्रांतिकारी कदम उठाया गया था। इतिहास में सबसे बड़ा तथा पहला परिवर्तन 1215 से मैग्नाकार्टा यानी कि नागरिक अधिकार पत्र की प्राप्ति हुई थी। यह वही समय था कि जब सदियों की जड़ता का प्रतिकार करते हुए मानव मस्तिष्क में नव विकास तथा नव प्रवर्तन का बीज बोया था। परिवर्तन की उस घड़ी में एक बड़े अवसर ने दस्तक दी थी। उसी अवसर का सदुपयोग करते हुए मानव को अधिकार प्रदान किया गया था, अब वह साधन नहीं साध्य बन गया है। अवसर में किए गए प्रयत्नों का परिणाम है कि आज हर सभ्य समाज को सभ्यता का प्रमाण उसी अधिकार पत्र की पारदर्शिता एवं उपलब्धता के कारण दिया जाता है। विश्व में बढ़ती जनसंख्या के कारण उत्पादन की न तो मात्रा संपूर्ण उपाय थी और ना ही गति के साथ साधन ही उपलब्ध हो पा रहे थे, ऐसे समय में युग में परिवर्तन की करवट ली और माननीय बौद्धिक क्षमता ने मशीनीकरण को जन्म दिया। मशीनीकरण के फल स्वरुप कार्य करने की गति, क्षमता और स्वरूप को बदला गया, मनुष्य ने अवसर के साथ परिवर्तन के चलते नए-नए कल पुर्जों का इजाद किया और प्रयत्नों का अंबार लगा कर संपूर्ण विश्व में औद्योगिक क्रांति का शंखनाद किया। और यही परिवर्तन आज विकास की धुरी है। इस बात से यह स्पष्ट होता है कि परिवर्तन नए-नए विकास तथा अविष्कार को जन्म देता है, और वह समाज के लिए सदैव बहु उपयोगी होते हैं। समाज में या देश में जब जब जनता ने गति रोकने का प्रयास किया तब तब माननीय साहस तथा मस्तिष्क ने उसे अपने प्रयासों से पराजित कर नई युक्ति को जन्म दिया। परिवर्तन वस्तुतः ना केवल जीवन की आवश्यक विशेषता और अपरिहार्य सच है बल्कि वह विकास के प्रत्येक स्वप्न का प्रथम चरण भी है। मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने जिस ‘आय हैव ए ड्रीम’ की कल्पना की थी वह परिवर्तन में छिपे अवसर को पाने का ही एक सपना था। महात्मा गांधी जी ने जिस ‘स्वराज’ की कल्पना की,वह भी अवसर की तलाश की तरफ अग्रसर एक महत्वपूर्ण प्रयास ही था। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने ‘यस वी कैन’ में भी उसी परिवर्तन को साकार करने की लालसा थी। कुल मिलाकर बात यह है कि जब जब मनुष्य पुराने विचारों जड़ता स्थिरता का प्रतिकार करता है है तब-तब परिवर्तन ने समाज में नवप्रवर्तन आया है। प्रत्येक परिवर्तन अपने साथ अनेक अवसर लेकर आया और अवसर को जिसने प्राप्त कर अपने अनुकूल ढालने की सामर्थ्यता दिखाई वह विश्व विजेता कहलाया। मनुष्य का जीवन ही विजय गाथा का एक संवेदनशील गीत और गान है। परिवर्तन के साथ-साथ आए अवसर को पहचान कर जो समाज राष्ट्र आगे बढ़ा है वह निश्चित तौर पर एक प्रबुद्ध शक्तिशाली और महान राष्ट्र बन पाया है।

*-संजीव ठाकुर*

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