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विश्व जनसंचार दिवस : संचार ने मिटाई धरती और आसमान की दूरी

*-डॉ. केशव पाण्डेय*

आज हम संपर्क युग में जी रहे हैं। दूरसंचार के क्षेत्र में तेजी से हुई उन्नति ने मानव जीवन की गुणवत्ता पर गहरा प्रभाव डाला है। इसके विकास ने प्रत्येक क्षेत्र को अपने दायरे में ले लिया है। प्राचीनकाल में संदेशों के आदान-प्रदान में अधिक समय तथा धन लगा करता था, लेकिन वर्तमान में समय और धन दोनों की बड़े पैमाने पर बचत हुई है। संचार माध्यम आज जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं। इनके बिना जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती। आइए, जानते हैं, विश्व दूरसंचार दिवस का इतिहास, थीम और महत्व।

17 मई को पूरी दुनिया में विश्व दूरसंचार दिवस मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ की स्थापना और साल 1865 में पहले अंतरराष्ट्रीय टेलीग्राफ समझौते पर हुए हस्ताक्षर की याद में इसे मनाया जाता है। 1973 में मैलेगा-टोर्रीमोलिनोन्स में एक सम्मेलन के दौरान इसे घोषित किया था। मार्च 2006 में प्रस्ताव को अपनाया गया था, जिसमें कहा गया है कि हर साल 17 मई को विश्व सूचना समाज दिवस मनाया जाएगा। विश्व दूरसंचार दिवस विश्व स्तर पर दूरसंचार के विकास और उसके सुधार के लिए समर्पित होता है। विश्व दूरसंचार दिवस का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में दूरसंचार के महत्व को संवेदनशील बनाना और इससे जुड़ी नवीनतम प्रौद्योगिकियों व उनके उपयोग को प्रचारित करना है। ताकि दूरसंचार के महत्व और इसकी दुनिया में अपनी भूमिका को समझाया जा सके।
दूरसंचार के क्षेत्र में नई तकनीक से अब टेलीफोन, मोबाइल फोन, फैक्स और ईमेल द्वारा क्षणभर में ही किसी भी प्रकार के संदेश एवं विचारों का आदान-प्रदान किया जा सकता है। आज चन्द्रमा तथा अन्य ग्रहों से सम्प्रेषित संदेश पृथ्वी पर पलभर में ही प्राप्त हो जाते हैं। दूरसंचार ने पृथ्वी और आकाश की सम्पूर्ण दूरी को समेट लिया है।
यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा टेलिकॉम मार्केट बन चुका है। चाइना के बाद भारत में सर्वाधिक टेलीफोन और मोबाइल का उपयोग होता है। जहां पूरी दुनिया में आठ अरब से ज्यादा फोन का उपयोग किया जा रहा है। वहीं भारत में आबादी से अधिक मोबाइल का उपयोग हो रहा है। चीन में एक अरब 61 करोड़ तीन लाख 60 हजार फोन उपयोग में हैं तो भारत में एक अरब 51 करोड़ 59 लाख 71 हजार से अधिक मोबाइल व लैंडलाइन फोन हैं।
आपको बता दें कि 28 साल पहले देश में पहली बार 31 जुलाई 1995 को मोबाइल का इस्तेमाल किया गया था। उस वक्त मोबाइल अमीरों की पहचान हुआ करता था, लेकिन वक्त के साथ यह आम और खास सबकी जरूरत बन गया। भारत की प्रथम मोबाइल ऑपरेटर कंपनी थी मोदी टेल्स्ट्रा। पहली मोबाइल कॉल इसी नेटवर्क पर की गई थी। पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने तत्कालीन केंद्रीय दूरसंचार मंत्री सुखराम से सबसे पहले बात की थी। मोबाइल सेवा शुरू होने के 5 साल बाद तक मोबाइल सब्सक्राइबर्स की संख्या 50 लाख पहुंची। लेकिन इसके बाद यह संख्या कई गुना तेजी से बढ़ी। अगले 10 साल में मोबाइल सब्सक्राइबर्स बढ़कर 687.71 मिलियन हो गया।
गौर करने वाली बात है कि मोबाइल नेटवर्क की शुरुआत के समय आउटगोइंग कॉल्स के अलावा, इनकमिंग कॉल्स के पैसे भी देने होते थे। लेकिन अब यह करीबन हर हाथ में नजर आता है। यही कारण है कि आज देश में आबादी से ज्यादा मोबाइल नंबर उपयोग में हैं। भारत ने दूरसंचार के क्षेत्र में असीमित उन्नति की है। भारत का दूरसंचार नेटवर्क एशिया के विशालतम दूरसंचार नेटवर्कों में गिना जाता है। जून 2013 में 903.10 मिलियन टेलीफोन कनेक्शनों के साथ भारतीय दूरसंचार नेटवर्क चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क बना है और दिनों-दिन तरक्की करते हुए आज तक नंबर दो पर विराजमान है।
1998 से इंटरनेट सेवा निजी भागीदारी के लिए खोल दी गई। आज लगभग सभी देशों के लिए इंटरनेशनल सबस्क्राइबर डायलिंग सेवा उपलब्ध है। इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 70 करोड़ 34 लाख है। अन्तरराष्ट्रीय संचार क्षेत्र में उपग्रह संचार और जल के नीचे से स्थापित संचार सम्बन्धों द्वारा अपार प्रगति हुई है।
देश की प्रत्येक पंचायत में वर्ष 2012 से ब्रॉडबैण्ड की सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। व्यावसायिक साइटों को इंटरनेट पर लाँच किया जा चुका है। ईमेल के द्वारा जन अभियान चलाना अब एक सामान्य प्रचलन हो चुका है। आधुनिक परिवेश में ‘चैट’ एक ऐसी सेवा है, जिसके द्वारा इंटरनेट धारक एक-दूसरे के साथ आपस में ऑनलाइन वार्तालाप कर सकते हैं। ई-गर्वनेंस सरकार की पहली प्राथमिकता है।
वास्तव में दूरसंचार प्रणाली ने विश्व की दूरियों को समेटते हुए मानव जीवन को एक नया मोड़ दिया है। आज हमारा देश दूरसंचार तकनीक की दौड़ में निरंतर आगे बढ़ रहा है। विभिन्न निजी कम्पनियों का भी इसमें विशेष योगदान रहा है, जिसके कारण देश के कोने-कोने को जोड़ने में सफल हुए हैं। दूरसंचार के प्रसार ने शिक्षा, चिकित्सा, परिवहन, व्यवसाय तथा उद्योग के विकास के साथ-साथ मानव-जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उन्नति को गति प्रदान की है।
इसी भाव के साथ इस साल 2023 में “ सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से सबसे कम विकसित देशों को सशक्त बनाना“ यह थीम रखी गई है। ताकि विकसित देशों को संचार के माध्यम से और सशक्त बनाया जा सके। कह सकते हैं कि दूरसंचार ने पृथ्वी और आसमान की दूरियों को मिटा दिया है।

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